अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों का पहला बैच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच रहा है. पहले बैच का चार साल की सर्विस सर्विस इस साल के अंत में पूरा होने वाला है. भारतीय नौसेना तीनों सेवाओं में सबसे पहले अग्निवीरों का प्रशिक्षण शुरू करने वाली थी, इसलिए अब वह भी उन सेवाओं में शामिल है जो रिटेंशन (स्थाई रखने) और एग्जिट (बाहर जाने) की प्रक्रिया को नीति से लागू करने की पोजिशन में पहुंच गई है.
यह उपलब्धि लगभग चार साल बाद आई है, जब नवंबर 2022 में पहले नौसेना अग्निवीर INS चिल्का में प्रशिक्षण के लिए पहुंचे थे. नौसेना ने सेना और वायुसेना से पहले प्रशिक्षण शुरू किया था, इसलिए पहले बैच का पूरा होना अग्निपथ मॉडल के पहले चक्र के अंत में उसके काम करने के तरीके का एक महत्वपूर्ण परीक्षण साबित होगा.
लगभग 2600 नौसेना अग्निवीरों (महिलाओं सहित) के पहले बैच ने मार्च 2023 में INS चिल्का में 16 सप्ताह का बेसिक ट्रेनिंग पूरा किया. उसके बाद प्रोफेशनल व समुद्री प्रशिक्षण में चले गए. 28 मार्च 2023 को INS चिल्का में पहली बार अग्निवीर पासिंग-आउट परेड हुई थी.
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चार साल बाद: अग्निपथ की पहली बड़ी परीक्षा
अग्निपथ में चार साल की सर्विस तय है. इस अवधि के अंत में अग्निवीर नियमित कैडर में जारी सेवा के लिए आवेदन कर सकते हैं. मौजूदा ढांचे के अनुसार प्रत्येक बैच के अधिकतम 25% अग्निवीरों को रखा जा सकता है.
सरकार की मूल योजना के मुताबिक आवेदनों पर केंद्रीय प्रक्रिया के जरिए विचार किया जाता है, जिसमें चार साल की सेवा के दौरान प्रदर्शन, संगठनात्मक जरूरतें और संबंधित सेवा की नीतियां शामिल होती हैं. इसका मतलब है कि पहला बैच सेवाओं को भर्ती, प्रशिक्षण, ऑपरेशनल काम, प्रदर्शन और अंतिम रिटेंशन तक मॉडल का पहला पूरा आकलन करने का मौका देगा.

25 प्रतिशत का आकलन कैसे हो रहा है?
पहले बैच के लिए सेवा-विशिष्ट स्कोरिंग मैट्रिक्स की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. आधिकारिक अग्निपथ ढांचे से साफ है कि चयन केंद्रीय, वस्तुनिष्ठ और प्रदर्शन आधारित होना चाहिए, न कि सेवा का स्वचालित विस्तार.
भारतीय नौसेना की वर्तमान शर्तों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चार साल बाद स्थाई नामांकन के आवेदनों पर केंद्रीय तरीके से वस्तुनिष्ठ मानदंडों (जिसमें चार साल की सेवा के दौरान प्रदर्शन शामिल है) के आधार पर विचार किया जाएगा. नौसेना अपनी जरूरतों और लागू नीति के अनुसार प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नामांकित कर सकती है.
मूल सरकारी ढांचे में संगठनात्मक जरूरत भी एक प्रमुख कारण है. इसलिए अंतिम चयन में व्यक्ति के प्रदर्शन के साथ सेवा की जनशक्ति और ट्रेड संबंधी जरूरतों का संतुलन रखा जाएगा. महत्वपूर्ण बात यह है कि अग्निवीर को स्थाई नामांकन का स्वतः अधिकार नहीं है. नौसेना की वर्तमान भर्ती शर्तों में साफ कहा गया है कि सेवा चार साल की अवधि के बाद अग्निवीरों को रखने के लिए बाध्य नहीं है.
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सेवाएं ज्यादा रिटेंशन दर चाह सकती हैं
पहला एग्जिट चक्र अग्निपथ मॉडल की आंतरिक समीक्षा के साथ ही चल रहा है. हाल की रिपोर्टों के अनुसार तीनों सेवाएं मौजूदा 25 प्रतिशत की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही हैं. सेनाएं कहीं ज्यादा रिटेंशन प्रतिशत की मांग कर रही हैं. इस प्रस्ताव पर सोच-विचार हो रहा है. मौजूदा नीति में बदलाव के रूप में मंजूर नहीं हुए हैं.
नौसेना का मामला खासतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि नाविकों को जटिल हथियारों, सेंसरों, संचार प्रणालियों और अन्य तकनीकी उपकरणों पर काम करने का प्रशिक्षण दिया जाता है. चार साल के प्रशिक्षण और ऑपरेशनल अनुभव के बाद बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कर्मियों को छोड़ने का मतलब होगा कि सेवा ने जिन लोगों पर समय और संसाधन लगाए हैं, उन्हें खोना. सरकार आखिरकार सीमा बदलेगी या नहीं, इसके लिए औपचारिक नीतिगत फैसला जरूरी होगा. तब तक मौजूदा 25 प्रतिशत का ढांचा ही लागू रहेगा.

वायुसेना और सेना का पहला बैच 2027 में
भारतीय सेना का पहला अग्निवीर समूह थोड़े अलग समय पर है. नौसेना का पहला बैच नवंबर 2022 में प्रशिक्षण में आया. 2023 की शुरुआत में बेसिक ट्रेनिंग पूरी की, जबकि सेना के पहले बैच बाद में प्रशिक्षित और शामिल किए गए.
भारतीय वायुसेना का पहला अग्निवीरवायु बैच दिसंबर 2022 में प्रशिक्षण शुरू हुआ. सेना का पहला बैच 2027 की शुरुआत में अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करेगा. सेना भी कथित तौर पर मौजूदा 25 प्रतिशत सीमा से ज्यादा रिटेंशन की जरूरत पर विचार कर रही है. यह भी अभी मंजूर नहीं हुआ है.
बाकी अग्निवीरों का क्या होगा?
जो अग्निवीर नहीं रखे जाएंगे, वो सेवा निधि पैकेज के हकदार हैं. सरकार ने सुरक्षा बलों, पुलिस, सरकारी संगठनों और अन्य क्षेत्रों में उनके आगे के रोजगार के कई रास्ते भी बनाए हैं. पहले एग्जिट चक्र से पहले एक महत्वपूर्ण कदम में केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और असम राइफल्स में राइफलमैन के पदों पर 50 प्रतिशत रिक्तियां पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित होंगी.
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पात्र पूर्व अग्निवीरों के लिए आयु में छूट और भर्ती के कुछ चरणों से छूट भी दी गई है. गृह मंत्रालय भी भर्ती नियमों और पूर्व अग्निवीर श्रेणी पर काम कर रहा है, ताकि CAPFs और असम राइफल्स में व्यवस्थित प्रवेश का रास्ता बने.
कई राज्यों ने प्रावधान किए हैं...

अगली यूनिफॉर्म वाली नौकरी के लिए प्राथमिकता
सरकार अब ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है जिसमें चार साल पूरा करने वाला अग्निवीर कई विकल्पों में से चुन सके – सशस्त्र बलों में जारी रहना (यदि चयन हो), CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती, राज्य पुलिस के अवसर या अन्य सरकारी व निजी क्षेत्र की नौकरियां.
प्रस्तावित भर्ती नियमों की हालिया रिपोर्ट के अनुसार सेवाएं और गृह मंत्रालय एक ऐसा तंत्र सोच रहे हैं जिसमें पूर्व अग्निवीर अपनी पसंदीदा फोर्स बता सकें. अंतिम आवंटन रिक्तियों और संबंधित संगठन की भर्ती जरूरतों पर निर्भर होगा. यह एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा. पहला बैच सिर्फ चार साल की सैन्य सेवा का अंत नहीं, बल्कि प्रशिक्षित सैन्य कर्मियों के व्यापक सुरक्षा और रोजगार पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े पैमाने पर संक्रमण की शुरुआत भी बनेगा.
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पहला बैच तय करेगा अग्निपथ का भविष्य
पहले बैच का महत्व सिर्फ कितने लोग रखे या छोड़े जाएंगे, इससे कहीं ज्यादा है. सशस्त्र बलों के लिए यह पहला मौका होगा आकलन करने का कि चार साल तकनीक-गहन सैन्य भूमिकाओं के लिए कर्मियों को प्रशिक्षित, नियुक्त और विकसित करने के लिए पर्याप्त है या नहीं, और ज्यादा अनुपात में रखने से ऑपरेशनल व जनशक्ति की दृष्टि से फायदा है या नहीं.
सरकार के लिए पहला बैच अग्निपथ के दूसरे स्तंभ का वास्तविक परीक्षण होगा – क्या चार साल बाद सेवा छोड़ने वाले लोग अन्य करियर में सफलतापूर्वक संक्रमण कर पाते हैं. नौसेना पहले ही दिखा चुकी है कि भर्ती, प्रशिक्षण और तैनाती मॉडल बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है.
अब जब पहला समूह अपने चार साल के सर्विस के अंत के करीब है, तो सवाल अगले चरण पर जा रहा है – कौन रुकेगा, कौन जाएगा, ये फैसले कैसे होंगे और क्या 25 प्रतिशत रिटेंशन सीमा अग्निपथ प्रयोग की पहली पूरी परीक्षा में बनी रहेगी.