कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में 21 दिन जेल में रहने के बाद शालू मिनोचा सोमवार को जेल से बाहर आ गईं. अदालत ने उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के बाद रिहाई का आदेश दिया. पुलिस ने भी जांच में शालू की भूमिका नहीं मिलने की बात कहते हुए कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी. अदालत ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड पर उनकी तत्काल रिहाई के निर्देश दिए.
जेल से बाहर निकलते ही शालू अपनी बहन के साथ गाड़ी में बैठकर रवाना हुईं. उनके सामने 21 दिनों की वह पूरी कहानी थी, जिसमें एक तरफ ससुर की हत्या का सनसनीखेज मामला था और दूसरी तरफ उन पर लगे गंभीर आरोप. अब पुलिस की जांच में उनका नाम हत्या की साजिश से जुड़ा नहीं पाया गया है.
रिहाई के बाद शालू ने 'आजतक' से बातचीत में कहा कि उन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि उनके साथ आखिर हुआ क्या है. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पति सुब्रत की कथित योजना की कोई जानकारी नहीं थी और वह अब भी यह स्वीकार नहीं कर पा रही हैं कि उनके पति ऐसा कर सकते हैं.
पार्टी में पति के साथ थीं, घर में क्या चल रहा था पता ही नहीं चला
शालू के मुताबिक हत्या वाले दिन वह अपने पति सुब्रत के साथ पार्टी में थीं. उनके अनुसार दोनों ने सामान्य तरीके से बातचीत की और साथ में समय बिताया.
शालू ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि घर पर कुछ और चल रहा है या उनके पति के मन में ऐसी कोई योजना है. उन्होंने सुब्रत के स्वभाव का जिक्र करते हुए कहा कि वह काफी 'सेक्रेटिव नेचर' के थे. पिता के साथ उनके रिश्ते अच्छे नहीं थे और दोनों के बीच अनबन रहती थी, लेकिन शालू को कभी नहीं लगा कि यह विवाद इतनी बड़ी घटना तक पहुंच सकता है.
यही वजह है कि जब पुलिस की जांच में हत्या की साजिश में उनका नाम सामने आया तो उनके लिए यह पूरा घटनाक्रम किसी सदमे से कम नहीं था.
विशाल से बातचीत पर भी शालू ने दी सफाई
जांच के दौरान शालू और पूर्व कर्मचारी विशाल के बीच बातचीत और घर में उसकी एंट्री को लेकर भी सवाल उठे थे. शालू ने इन आरोपों को खारिज किया. उनका कहना है कि पार्टी वाले दिन विशाल से उनकी सिर्फ इतनी बातचीत हुई थी कि उन्होंने रंगोली के लिए फूल मंगाए थे. गार्ड से भी उन्होंने केवल उसकी एंट्री करवाने के लिए कहा था.
शालू ने कहा कि उन्होंने गार्ड को विशाल के साथ किसी अन्य व्यक्ति का नाम नहीं बताया था और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि आगे क्या होने वाला है. घर की चाबी देने के आरोपों को लेकर भी वह पहले अदालत में अपना पक्ष रख चुकी हैं.
'मेरे दिमाग में अभी सिर्फ मेरा 6 साल का बच्चा है'
21 दिन जेल में रहने के बाद बाहर आईं शालू के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता उनका छह साल का बेटा है. उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि बच्चे को इन सब घटनाओं के बारे में कुछ भी पता न चले. रिहाई के बाद उनकी सबसे पहली इच्छा बच्चे से मिलने की है.
शालू ने कहा कि फिलहाल वह यह सोचने की स्थिति में नहीं हैं कि आगे उनकी जिंदगी किस तरह चलेगी. पति सुब्रत को माफ करना है या उनके साथ रिश्ते किस तरह रहेंगे, इस पर भी वह अभी कोई फैसला नहीं लेना चाहतीं. उनके मुताबिक, इस पूरी घटना से बाहर निकलने के लिए उन्हें थोड़ा समय चाहिए. देखें VIDEO:-
जिस बयान से शुरू हुआ था शक, उसी केस की दिशा बदल गई
विनीत मिनोचा की हत्या के बाद पुलिस ने पूर्व नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया था. शुरुआती जांच में विशाल की ओर से शालू का नाम लिया गया और आरोप लगाया गया कि हत्या की सुपारी उन्हें दी गई थी. पुलिस ने इसके बाद शालू को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. लेकिन पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान जांच का रुख बदल गया. पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और सामने आए साक्ष्यों के बाद मृतक के बेटे सुब्रत की भूमिका सामने आई.
रिपोर्टों के अनुसार, विशाल ने बाद की पूछताछ में दावा किया कि हत्या की साजिश सुब्रत ने रची थी और पकड़े जाने की स्थिति में शालू का नाम लेने के लिए कहा गया था. इसके बाद पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार किया और शालू की भूमिका की दोबारा जांच की.
5 सितंबर की रात क्या हुआ था?
पूरा मामला 5 सितंबर की रात का है. कानपुर के कल्याणपुर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या कर दी गई थी. शुरुआती जांच में पुलिस ने पूर्व नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया. सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही थी.
इसके बाद हत्या की कथित साजिश में शालू का नाम सामने आया और उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन मामले की आगे की विवेचना में पुलिस को शालू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले.
पुलिस ने अदालत में कहा कि विवेचना के दौरान शालू की भूमिका सामने नहीं आई है. इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त करने के लिए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई.
सुब्रत पर क्यों गया पुलिस का शक?
जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस के अनुसार विनीत मिनोचा के बेटे सुब्रत की भूमिका सामने आई. पुलिस की जांच में उसके कर्ज, पिता के साथ रिश्तों और संपत्ति से जुड़े विवादों को भी जांच के दायरे में रखा गया.
पुलिस के मुताबिक, हत्या की साजिश में सुब्रत की भूमिका सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया. जांच एजेंसियों के अनुसार घर की जानकारी और चाबी से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की गई. हालांकि, इस पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में होने वाली आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.
कोर्ट ने क्या कहा?
सीजेएम प्रदीप कुमार शुक्ला की अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद शालू की न्यायिक अभिरक्षा समाप्त करने का आदेश दिया. अदालत ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड पर रिहाई के निर्देश दिए.
आदेश में यह भी कहा गया कि यदि शालू किसी दूसरे मामले में वांछित नहीं हैं तो जेल अधीक्षक उन्हें तत्काल रिहा करें. साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें पुलिस की जांच और अदालत की कार्यवाही में सहयोग करना होगा. देखें शालू की रिहाई का VIDEO:-
वकील बोले- 21 दिन जेल में रहना पड़ा, लेकिन अब सच सामने आया
शालू के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने रिहाई को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. उनका कहना है कि शुरुआत से ही उनका पक्ष था कि शालू का नाम केवल किसी अन्य व्यक्ति के बयान के आधार पर मामले में जोड़ा गया था.
वकील के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को शालू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले और इसी आधार पर अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई.
अब इस हत्याकांड की कहानी किस मोड़ पर है?
विनीत मिनोचा हत्याकांड की शुरुआत में शक की दिशा शालू की ओर गई थी. उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और 21 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा.
लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस के अनुसार कहानी का केंद्र मृतक के बेटे सुब्रत की ओर चला गया. सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने शालू की भूमिका को लेकर अपनी जांच दोबारा की और उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात अदालत में रखी. अब शालू जेल से बाहर हैं, जबकि मामले की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है.
शालू के लिए हालांकि यह मामला केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं है. 21 दिन बाद जेल से बाहर निकलते समय उनके सामने सबसे पहले अपने छह साल के बच्चे से मिलने की चिंता थी. उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल वह अपने बच्चे के साथ रहना चाहती हैं और जिंदगी में आगे क्या करना है, इस बारे में सोचने के लिए उन्हें थोड़ा वक्त चाहिए.