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ऑपरेशन सिंदूर के बीच डिफेंस बजट को 1 लाख करोड़ ज्यादा, धड़ाधड़ बनेंगी मिसाइलें और फाइटर जेट

रक्षा मंत्रालय को 2026-27 के लिए ₹7.8 लाख करोड़ का बजट मिला, जो पिछले साल से काफी अधिक है. आधुनिकीकरण के लिए कैपिटल बजट ₹1.80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.19 लाख करोड़ कर दिया गया है. प्रमुख प्रोजेक्ट्स में राफेल फाइटर जेट, नई स्टील्थ सबमरीन (प्रोजेक्ट 75I) और UAV/ड्रोन शामिल हैं. यह बजट आत्मनिर्भर भारत और सेना की मजबूती पर फोकस करता है.

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डिफेंस बजट बढ़ाया गया है. इससे घरेलू डिफेंस सेक्टर को फायदा मिलेगा. (Photo: ITG)
डिफेंस बजट बढ़ाया गया है. इससे घरेलू डिफेंस सेक्टर को फायदा मिलेगा. (Photo: ITG)

1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में यूनियन बजट 2026-27 पेश किया. इसमें रक्षा मंत्रालय को कुल ₹7.8 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है. यह पिछले साल के ₹6.81 लाख करोड़ से काफी ज्यादा है. रक्षा क्षेत्र में मजबूती का संकेत देता है. रक्षा बलों को मॉडर्नाइजेशन के लिए ₹2.19 लाख करोड़ दिए जाएंगे, जो पिछले साल के ₹1.80 लाख करोड़ से बढ़कर अब ज्यादा है.

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बजट में क्या बड़ा बदलाव हुआ?

  • कुल रक्षा बजट: ₹7.8 लाख करोड़ – यह पिछले बजट से लगभग 14-15% की बढ़ोतरी दिखाता है (पिछले साल 9.5% बढ़ा था).
  • कैपिटल बजट (आधुनिकीकरण के लिए): ₹1.80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.19 लाख करोड़. यह नई खरीद, हथियार, उपकरण और तकनीक पर खर्च होगा.
  • फोकस: घरेलू उत्पादन (आत्मनिर्भर भारत), स्वदेशी हथियार और निर्यात बढ़ाना. रक्षा उत्पादन पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है.

यह बढ़ोतरी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया में युद्ध और तनाव बढ़ रहे हैं – रूस-यूक्रेन, मध्य पूर्व, भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान सीमा पर चुनौतियां. भारत को अपनी सेना को आधुनिक बनाने की जरूरत है, जैसे ड्रोन, मिसाइल, फाइटर जेट और साइबर सुरक्षा.

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प्रमुख प्रोजेक्ट्स जो पाइपलाइन में हैं

रक्षा मंत्रालय के पास कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं या जल्द शुरू होंगे. इन पर यह नया बजट मदद करेगा...

  • राफेल फाइटर जेट: नौसेना के लिए अतिरिक्त राफेल-एम (26 या ज्यादा) के सौदे. पहले से वायुसेना में 36 राफेल हैं, अब और खरीद की योजना.
  • सबमरीन: प्रोजेक्ट 75I के तहत 6 नई स्टील्थ सबमरीन, जिनमें AIP तकनीक होगी. यह बहुत बड़ा सौदा है.
  • अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAV/ड्रोन): MQ-9B जैसे हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन, स्वदेशी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम. हाल के संघर्षों में ड्रोन की अहमियत बढ़ी है.
  • अन्य: LCA Mk1A/Mk2 तेजस फाइटर, LCH प्रचंड हेलिकॉप्टर, ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 एयर डिफेंस और नई मिसाइल/रडार सिस्टम.

ये प्रोजेक्ट्स सेना की ताकत बढ़ाएंगे. बजट में घरेलू कंपनियों को ज्यादा हिस्सा मिलेगा.

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क्यों इतना बड़ा बजट?

  • वैश्विक खतरे बढ़े हैं – ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटनाओं से सबक लिया.
  • रक्षा विशेषज्ञों ने 20% बढ़ोतरी की मांग की थी, जो पूरी हुई.
  • निर्यात लक्ष्य: 2029 तक ₹50,000 करोड़ का रक्षा निर्यात.

रक्षा क्षेत्र में भारत को क्या फायदे मिले?

नई राहत: 2026 बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए बड़ा फायदा मिला है. रॉ मैटेरियल्स पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी माफ कर दी गई है. इससे एयरक्राफ्ट पार्ट्स के मैन्युफैक्चरिंग के लिए जो चीजें आयात होती हैं, वो देश में बनेंगी. मेंटेनेंस, रिपेयर या ओवरहॉल (MRO) की सुविधा बढ़ेगी. यह छूट डिफेंस सेक्टर की यूनिट्स को मिलेगी, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और लागत कम होगी. सिविलियन, ट्रेनिंग और अन्य एयरक्राफ्ट्स के कंपोनेंट्स पर भी ड्यूटी छूट दी गई.

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एविएशन फ्यूल (ATF) का डिफेंस पर असर?

एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि Su-30MKI, राफेल, मिराज, MiG-29 जैसे फाइटर जेट और IL-78 टैंकर इसी पर चलते हैं. हाल में ATF की कीमतें ऊंची थी (जनवरी 2026 में YoY 2.2% ज्यादा, लेकिन MoM 7.2% कम). वैश्विक तेल संकट (मध्य पूर्व तनाव, रूस-यूक्रेन) से प्रभावित हुआ है. 

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समस्या: IAF को मिड-एयर रिफ्यूलिंग की कमी है, IL-78 फ्लीट पुरानी है. ATF महंगा होने से ट्रेनिंग, ऑपरेशन, लॉन्ग-रेंज मिशन प्रभावित हो सकते हैं. अगर वैश्विक तेल कीमतें बढ़ें या सप्लाई बाधित हुई तो फाइटर जेट की ऑपरेशनल रेडीनेस कम हो सकती है. ATF कीमतों में 1% बढ़ोतरी से एयरलाइंस का प्रॉफिट 3% कम होता है. रक्षा में भी असर पड़ता है.

असर: सीधा बड़ा संकट नहीं, क्योंकि रक्षा बजट से ATF खरीदा जाता है. स्ट्रैटेजिक रिजर्व हैं. लेकिन लंबे समय में हाई कॉस्ट से फ्लाइट ऑवर्स कम हो सकते हैं, जो रेडीनेस प्रभावित करेगा. इंडस्ट्री GST में ATF लाने की मांग कर रही है ताकि टैक्स कम हो.

समाधान की ओर: सरकार बायो-फ्यूल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) पर काम कर रही है. 2027 तक 1% SAF ब्लेंडिंग टारगेट. इससे आयात निर्भरता कम होगी और डिफेंस को फायदा होगा.

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यह बजट भारत की रक्षा को मजबूत बनाने का बड़ा कदम है. ₹2.19 लाख करोड़ का कैपिटल बजट सेना को आधुनिक हथियार, तकनीक और तैयार रहने में मदद करेगा. सरकार आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है, ताकि आयात कम हो और देश खुद मजबूत बने.

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