यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) 2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित एक इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम है. इंटरफेस इंटर-बैंक पीयर-टू-पीयर (P2P) और व्यक्ति-से-व्यापारी ( P2M) लेनदेन है. इसका इस्तेमाल मोबाइल पर दो बैंक खातों के बीच इंस्टेंट पेमेंट करने के लिए किया जाता है.
इसके लिए आपका मोबाइल नंबर बैंक के साथ पंजीकृत होना चाहिए. पेमेंट प्राप्तकर्ता की UPI आईडी का इस्तेमाल पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जा सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इसको रेग्यूलेट करता है. भारतीय बैंकों ने 25 अगस्त 2016 को अपने UPI-सक्षम ऐप्स को Google Play Store पर उपलब्ध कराना शुरू किया था.
UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. इसकी सरलता, सुरक्षा और त्वरित भुगतान की विशेषता इसे दुनिया के सबसे सफल डिजिटल भुगतान प्लेटफार्मों में से एक बनाती है. सरकार और NPCI समय-समय पर इसमें सुधार और नई सुविधाएं जोड़ रहे हैं, जिससे यह और अधिक सुरक्षित, तेज और उपयोगी बनता जा रहा है.
UPI से कुछ लोकप्रिय ऐप्स भी जुड़े हैं जिनमें BHIM UPI, Google Pay, PhonePe, Paytm और Amazon Pay मुख्य हैं.
1 नवंबर 2026 से LPG की कीमतों, GST प्रक्रिया, तमिलनाडु में शराब की खरीदारी, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और मोबाइल कॉलर नेम व्यवस्था से जुड़े बदलाव लागू होने की तैयारी है. वीडियो में जानें इन नियमों का आम लोगों और कारोबारियों पर क्या असर पड़ सकता है. इनका असर रसोई के बजट से लेकर हाइवे पर सफर, कारोबार और मोबाइल यूजर्स पर पड़ सकता है.
Rule Change from 1st November: शराब के शौकीनों के लिए तमिलनाडु में बड़ा बदलाव हुआ है और ये चेंज 1 नवबंर से लागू होने जा रहा है. इसके तहत एक तय लिमिट से ज्यादा की खरीदारी पर कैश नहीं चलेगा.
कारोबारी संगठनों और पेमेंट कंपनियों का मानना था कि त्योहारों के बीच इसे लागू करने से पेमेंट को लेकर दिक्कतें आ सकती हैं. इसी बात को ध्यान में रखकर NPCI ने दिवाली तक इस फैसले को आगे बढ़ा दिया है.
यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने के बजाय दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है. शुल्क वापस लेने की घोषणा नहीं हुई है. प्रस्तावित दरों और नियमों को लेकर कारोबारियों की चिंताएं और कांग्रेस के सवाल आगे भी बहस बढ़ा सकते हैं.
डिजिटल लेनदेन का इस्तेमाल करने वाले लोगों और व्यापारियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी चार्ज लगाने के फैसले को फिलहाल दिवाली तक के लिए टाल दिया गया है. पहले इस फैसले को 15 अक्टूबर से लागू करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए समिति ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है.
UPI MDR Alert: 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर 15 अक्टूबर से एमडीआर चार्ज लागू होने वाला है, लेकिन फेस्टिव सीजन को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है और कुछ ट्रांजैक्शन पर एमडीआर को दिवाली तक टाल दिया है.
MDR New Rule: IIT बॉम्बे की स्टडी डिजिटल पेमेंट सिस्टम की कमाई और खर्च के बंटवारे पर बहस को आगे बढ़ाती है. अंतिम फैसला सरकार और संबंधित नियामकों का होगा.
UPI Payment MDR के विरोध में व्यापारियों के संगठन सीटीआई ने वित्त मंत्री को पत्र लिखा है और उनसे इस चार्ज को टालने की डिमांड की है. CTI चेयरमैन के मुताबिक, इसे लेकर देशभर के व्यापारियों में आक्रोश है.
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान Jio ने न्यू प्रोडक्ट को शोकेश किया है, जिसमें AI वियरेबल हैं. इसमें स्मार्ट ग्लासेस और AI इयरबड्स के नाम शामिल हैं. यह स्मार्ट ग्लासेस AI कैपिबिलिटीज के साथ आते हैं, जिसमें UPI का इंटीग्रेशन कर सकेंगे.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन पीएफ का पैसा निकालने की प्रक्रिया आसान बनाने की तैयारी कर रहा है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अंशधारक यूपीआई के जरिए अपने पीएफ खाते में जमा रकम का 75 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे. इसके लिए यूएएन पोर्टल को यूपीआई से जोड़ने और नया मोबाइल ऐप लाने पर काम चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, सुविधा दिसंबर 2026 के अंत तक शुरू हो सकती है. फिलहाल यह व्यवस्था परीक्षण के चरण में है.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने अंशधारकों को UPI के जरिए भविष्य निधि की रकम निकालने की सुविधा देने की तैयारी कर रहा है. इसके तहत पात्र लोग अपने PF बैलेंस का 75% तक हिस्सा निकाल सकेंगे, जबकि 25% रकम खाते में बनाए रखनी होगी.
UPI MDR 15th October: यूपीआई से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों और कारोबारियों के लिए अगले कुछ दिन अहम हैं. ₹2,000 से ज्यादा के कुछ यूपीआई लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होने की तारीख 15 अक्टूबर तय है. लेकिन डेडलाइन नजदीक आते ही मर्चेंट संगठनों, फिनटेक और पेमेंट कंपनियों ने इसे जनवरी 2027 तक टालने की मांग कर दी है.
15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा. आशंका है कि दुकानदार इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं या यूपीआई लेने से बच सकते हैं. हालांकि RBI का कहना है कि इससे यूपीआई इस्तेमाल में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है.
2 अक्टूबर को खरीदारी या घूमने निकल रहे हैं, तो जेब में कुछ कैश जरूर रख लें. दिल्ली में कुछ व्यापारी संगठनों ने ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर प्रस्तावित चार्ज के विरोध में No UPI Day मनाने की अपील की है. हालांकि, इस विरोध पर व्यापारी संगठन एकमत नहीं हैं. कुछ संगठन डिजिटल पेमेंट बंद रखने पर अड़े हैं, तो कुछ ने इससे दूरी बना ली है.
NO UPI Day: शुक्रवार 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर दिल्ली चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने 'नो यूपीआई डे' मनाने का ऐलान किया है. हालांकि, इससे CAIT ने दूरी बनाई है.
सितंबर में यूपीआई पर 24.07 बिलियन यानी 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹29.37 लाख करोड़ रही. ये आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर MDR का नया नियम लागू होगा.
सरकार ने साफ कहा है कि ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर लगने वाला 0.4% MDR ग्राहक से नहीं लिया जाना चाहिए. लेकिन अगर दुकानदार यह खर्च ग्राहक से मांगते हैं, तो हालिया सर्वे में ज्यादातर यूजर्स ने UPI छोड़कर कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या बैंक ट्रांसफर का विकल्प चुनने की बात कही है.
Supreme Court To Govt On MDR: 15 अक्टूबर से लागू होने वाले यूपीआई एमडीआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई और अदालत ने सरकार व आरबीआई के इसे लेकर कई सवाल किए हैं.
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाने की अपील की है. इस दिन व्यापारी QR कोड और साउंड बॉक्स ढककर सिर्फ कैश लेने का विरोध कर सकते हैं. सरकार ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा है.
मध्य प्रदेश में व्यापारियों ने NO UPI Day मनाकर 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4% MDR के विरोध में प्रदर्शन किया. भोपाल में QR कोड ढके गए, जबकि इंदौर, ग्वालियर समेत कई शहरों में व्यापारियों ने ग्राहकों से कैश पेमेंट की अपील की.
NPCI ने तर्क दिया है कि यूपीआई के लिए एमडीआर चार्ज चुनिंदा व्यापारियों से वसूला जाएगा, लेकिन जीएसटी पूरे ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा, बल्कि भुगतान किए गए MDR पर लागू होगा. अगर 10,000 रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है तो 10 हजार रुपये पर जीएसटी नहीं लगेगा, बल्कि पेमेंट किए गए 40 रुपये एमडीआर पर 18 फीसदी लगेगा.