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सिंगूर विवाद के बाद नई शुरुआत! TATA ग्रुप से निवेश पर बातचीत कर रही बंगाल सरकार

पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार टाटा ग्रुप को राज्य में नए निवेश के लिए मनाने में जुटी है. उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा कि सरकार टाटा के संपर्क में है और निवेश को लेकर बातचीत जारी है. यह पहल सिंगूर विवाद के वर्षों बाद हो रही है. पश्चिम बंगाल सरकार को टाटा मोटर्स को सिंगूर प्रोजेक्ट से जुड़े आर्बिट्रल अवॉर्ड के तहत ₹765.78 करोड़ और 11 फीसदी सालाना ब्याज का भुगतान किया जाना है.

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बंगाल की भाजपा सरकार सिंगूर विवाद को भुलाकर टाटा ग्रुप के साथ राज्य में नए निवेश को लेकर बातचीत कर रही. (File Photo)
बंगाल की भाजपा सरकार सिंगूर विवाद को भुलाकर टाटा ग्रुप के साथ राज्य में नए निवेश को लेकर बातचीत कर रही. (File Photo)

पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार टाटा ग्रुप (TATA Group) को राज्य में नए निवेश के लिए आमंत्रित करने की कोशिश कर रही है. राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने रविवार को कहा कि सरकार टाटा ग्रुप के संपर्क में है और राज्य में निवेश को लेकर बातचीत जारी है. यह पहल ऐसे समय में हो रही है, जब सिंगूर प्रोजेक्ट से जुड़े ₹765.78 करोड़ के आर्बिट्रल अवॉर्ड और उस पर 11 फीसदी सालाना ब्याज का मामला भी चर्चा में है.

तापस रॉय ने कहा, 'हम टाटा के संपर्क में हैं. उन्हें राज्य में लाने के लिए बातचीत जारी है.' उनके बयान से संकेत मिलता है कि सरकार सिंगूर विवाद से आगे बढ़कर टाटा ग्रुप के साथ नए निवेश और कारोबारी संभावनाओं पर फोकस कर रही है. रॉय के मुताबिक टाटा ग्रुप का पश्चिम बंगाल में कारोबार सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर तक सीमित नहीं है. समूह की IT सर्विसेज, मेटल्स, हॉस्पिटैलिटी और रिटेल समेत कई क्षेत्रों में मौजूदगी है. सरकार यह देख रही है कि टाटा ग्रुप राज्य में अपने मौजूदा कारोबार का विस्तार करना चाहता है या किसी नई यूनिट की स्थापना में रुचि रखता है.

क्या है सिंगूर का पूरा मामला?

टाटा मोटर्स ने अक्टूबर 2008 में पश्चिम बंगाल के सिंगूर से अपना नैनो कार प्रोजेक्ट वापस ले लिया था. इसके बाद कंपनी ने इस परियोजना को गुजरात के साणंद में ट्रांसफर कर दिया. सिंगूर में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ लंबे समय तक आंदोलन चला था, जिसका नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने किया था. प्रोजेक्ट से हटने के बाद टाटा मोटर्स और वेस्ट बंगाल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (WBIDC) के बीच विवाद आर्बिट्रेशन तक पहुंचा. 30 अक्टूबर 2023 को आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने टाटा मोटर्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को ₹765.78 करोड़ देने का आदेश दिया. इसके साथ 11 फीसदी सालाना ब्याज भी तय किया गया.

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आर्बिट्रल अवॉर्ड मामले में सरकार की चुप्पी

वेस्ट बंगाल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की ओर से टाटा मोटर्स को आर्बिट्रल अवॉर्ड और ब्याज के भुगतान को लेकर सवाल पूछे जाने पर उद्योग मंत्री तापस रॉय ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को ऐसे मामलों पर विचार करना होगा. बाद में उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करना चाहते. इस बीच, फरवरी 2026 में वेस्ट बंगाल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. यानी एक तरफ सरकार टाटा ग्रुप के साथ नए निवेश की संभावनाओं पर बातचीत कर रही है, तो दूसरी तरफ सिंगूर प्रोजेक्ट से जुड़ा पुराना कानूनी विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

सिंगूर विवाद के बाद नए निवेश की राहत

पश्चिम बंगाल सरकार के लिए टाटा ग्रुप के साथ नए इन्वेस्टमेंट पर बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि सिंगूर प्रोजेक्ट के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार और टाटा ग्रुप के रिश्तों में लंबे समय तक खटास रही. अब बीजेपी के नेतृत्व वाली नई सरकार नए निवेश के जरिए कारोबारी रिश्तों को एक नई दिशा देने की कोशिश करती दिख रही है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि टाटा ग्रुप पश्चिम बंगाल में किस सेक्टर में नया निवेश करेगा या कोई नई यूनिट स्थापित करेगा. सरकार ने भी इस संबंध में कोई विस्तृत रोडमैप साझा नहीं किया है.

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