'अगर आप खुश नहीं है या फिर आपका मूड खराब है, तो काम पर ऑफिस मत आइए', ये रूल भारत का नहीं है, बल्कि चीन की एक कंपनी का है. इसका जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव रहने वाले भारतीय अरबपति हर्ष गोयनका ने ऑफिस वर्क कल्चर पर एक नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या भारतीय कंपनियों को भी इस तरह की पॉलिसी नहीं अपनानी चाहिए?
अरबपति के वायरल पोस्ट में क्या?
क्या कर्मचारी अपनी नाखुशी के कारण छुट्टी ले सकते हैं? यह विचार भले ही अटपटा लगे, लेकिन आरपीजी ग्रुप (RPG Group) के चेयरमैन हर्ष गोयनका (Harsh Goenka) द्वारा एक चीनी रिटेल कंपनी की अनूठी लीव पॉलिसी का जिक्र करने बाद वर्क प्लेस पर कर्मचारियों के कल्याण को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर अपने पोस्ट में गोयनका ने चीनी रिटेलर पैंग डोंग लाई द्वारा अपनाई गई अनहैप्पी लीव पॉलिसी (China Unhappy Leave Policy) की ओर ध्यान आकर्षित किया है और अपनी एक्स पोस्ट में लिखा है कि क्या भारतीय कंपनियों को भी ये तरीका अपनाना चाहिए.
उन्होंने Viral Post में लिखा, 'चीनी रिटेलर अपने कर्मचारियों को 10 दिन की वेतन सहित अनहैप्पी लीव देती है. पैंग डोंग लाई के फाउंडर यू डोंगलाई का सिद्धांत सरल है. अगर आप खुश नहीं हैं, तो काम पर मत आइए.' उन्होंने आगे लिखा कि ऐसा भी बताया जाता है कि मैनेजमेंट को इस तरह अनुरोध को अस्वीकार या रिजेक्ट करने की परमिशन नहीं है.
Chinese retailer Pang Dong Lai gives employees 10 days of paid “unhappy leave.” Founder Yu Donglai’s philosophy is simple “If you’re not happy, don’t come to work.” Managers are reportedly not allowed to refuse the request.
— Harsh Goenka (@hvgoenka) August 7, 2026
Extreme? Perhaps.
We do need a broader conversation if…
क्या भारत में भी है इसकी जरूरत?
हर्ष गोयनका ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, 'हमें इस बात पर व्यापक चर्चा करने की जरूरत है कि क्या भारतीय कंपनियों के संदर्भ में 'Unhappy Leave Policy की आवश्यकता है या कार्यस्थल को बेहतर बनाने के लिए कोई बेहतर तरीका है, जहां लोग वास्तव में काम पर आना चाहें? उनकी इस पोस्ट ने वर्क लाइफ बैलेंस, मानसिक स्वास्थ्य और क्या कंपनियों को अपनी पारंपरिक लीव पॉलिसी पर पुनर्विचार करना चाहिए, ऐसे मुद्दों को फिर से हवा दे दी है.

क्या है चीन की अनहैप्पी लीव पॉलिसी?
Unhappy Leave Policy की यह अवधारणा चीन के हेनान प्रांत में स्थित एक रिटेल चेन पैंग डोंग लाई से आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 चाइना सुपरमार्केट वीक के दौरान, कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन यू डोंगलाई ने घोषणा की थी कि अगर कर्मचारी मानसिक या भावनात्मक रूप से स्वस्थ नहीं हैं, तो वे वेतन सहित अवकाश के हकदार ले सकेंगे.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में डोंगलाई के हवाले से कहा गया कि कर्मचारियों को नाखुश होने पर काम करने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए. उनका संदेश सीधा है कि अगर कर्मचारी खुश नहीं हैं, तो उन्हें काम पर आने की जरूरत नहीं है. कर्मचारियों से मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करने के बावजूद काम करने की अपेक्षा करने के बजाय, कंपनी उन्हें छुट्टी लेने और बेहतर महसूस करने पर वापस लौटने की अनुमति देती है.
कार्यस्थल पर खुशहाली पर चर्चा
अरबपति कारोबारी की इस Viral Post ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ऐसी नीति भारत में कारगर हो सकती है. हालांकि, यह चर्चा सिर्फ छुट्टियों की एक नई कैटेगरी शामिल करने के बारे में नहीं है, बल्कि ऐसे कार्यस्थल बनाने पर जोर देने के बारे में है, जहां कर्मचारियों को ऐसा माहौल देने पर है जहां उनमें तनावग्रस्त होने की संभावना कम होती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही भारत में Unhappy Leave Policy वास्तविकता बने या न बने, लेकिन इस विचार ने निश्चित रूप से मानसिक स्वास्थ्य, कर्मचारी कल्याण और कार्यस्थल को स्वस्थ बनाने वाले तरीकों पर चर्चा को फिर से हवा देने का काम किया है.