देश के तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान संपन्न हो गया. बिहार के बांकीपुर, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव में उतरे उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है और नतीजे 3 अगस्त को आएंगे. उपचुनाव के मतदान के आंकड़े और जमीनी रुझान कई बड़े संकेत दे रहे हैं.
बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर 34.30 फीसदी मतदान हुआ तो मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर 70 फीसदी वोटिंग हुई है. इसी तरह गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर 37.50 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है. तीनों ही सीटों पर वोटिंग घटी है.
बांकीपुर सीट पर बीजेपी, जनसुराज और आरजेडी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजालपुर में बीजेपी और कांग्रेस के बीच टक्कर मानी जा रही है. तीनों ही सीटों पर नतीजे भले ही सोमवार को आएं, लेकिन वोटिंग ट्रेंड से नतीजे की संभावना समझी जा सकती है.
बांकीपुर में 7% घटा मतदान बढ़ा रहे टेंशन
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के खाली हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर गुरुवार को मतदान हुआ. बांकीपुर में कुल 34.30 फीसदी वोटिंग हुई है जबकि 2025 के विधानसभा चुनाव में 41.39 फीसदी मतदान रहा था. इस तरह से बांकीपुर सीट पर 2025 के मुकाबले 7 फीसदी कम वोटिंग हुई. इस शहरी सीट पर अब तक का सबसे कम मतदान रिकॉर्ड माना जा रहा है.
बांकीपुर सीट पर कुल 26 उम्मीदवार मैदान थे, लेकिन मुख्य टक्कर बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोरऔर आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता के बीच मानी जा रही है. यह सीट भाजपा का पारंपरिक गढ़ रही है. बीजेपी 1995 से लगातार जीत रही है. नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर बीजेपी ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर है, लेकिन प्रशांत किशोर के उतरने से मुकाबला रोचक हो गया.
मध्य प्रदेश में 10 फीसदी कम वोटिंग हुई
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव हुए हैं ग्रामीण और अर्ध-शहरी बहुल इस सीट पर मतदाताओं में गजब का उत्साह देखा गया. उपचुनाव के लिए करीब 70 फीसदी मतदान दर्ज किया गया जबकि 2023 के चुनाव में 80.20 फीसदी वोटिंग हुई थी. 2023 के मुकाबले दतिया सीट पर इस बार 10 फीसदी कम मतदान हुआ है.
2023 में दतिया सीट पर परिवर्तन हो गया था और बीजेपी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए थे. उपचुनाव में बीजेपी से आशुतोष तिवारी और कांग्रेस से घनश्याम सिंह मैदान में है. वहीं, आजाद समाज पार्टी से दामोदर यादव किस्मत आजमा रहे हैं. तीनों नेताओं ने दतिया फतह करने के लिए पूरी ताकत लगाया है. उपचुनाव के हिसाब दतिया में इस बार भी वैसी ही वोटिंग हो रही है, जिसके चलते बीजेपी और कांग्रेस दोनों की सियासी धड़कने बढ़ी हुई हैं.
मांजलपुर सीट पर 22.65 फीसदी कम वोटिंग
गुजरात की मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव में करीब 37.50 फीसदी मतदान दर्ज किया गया जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में 60.15 प्रतिशत मतदान हुआ था. 2022 के मुकाबले 22.65 फीसदी कम मतदान हुआ है. इस तरह मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस उम्मीदवार के बीच है.
मांजलपुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव बीजेपी विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद हो रहा है.यह विधानसभा सीट पाटीदार बहुल मानी जाती है, इसलिए बीजेपी ने अपने पाटीदार नेता को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी बीजेपी के इस गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश में हैं. कांग्रेस ने एक अनुभवी नेता को उतारा है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो नजर आ रहा है.
उपचुनाव के वोटिंग ट्रेंड के सियासी मायने
बांकीपुर और मांजलपुर दोनों ही पूरी तरह शहरी और अर्बन सीटें हैं. उपचुनावों में अक्सर आम मतदाताओं (विशेषकर कॉस्मोपॉलिटन और मध्यम वर्ग) में मुख्य आम चुनावों की तरह उत्साह नहीं होता, उन्हें लगता है कि एक विधायक के बदलने से सरकार या व्यवस्था पर कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा,जिसके कारण बड़ी संख्या में मतदाता पोलिंग बूथ तक नहीं पहुंच पाते.
परंपरागत रूप से यह माना जाता है कि कम मतदान अक्सर सत्ताधारी दल या उस दल के पक्ष में जाता है, जिसका संगठन और कैडर जमीन पर सबसे मजबूत होता है. बांकीपुर और मांजलपुर दोनों ही लंबे समय से बीजेपी के गढ़ रहे हैं, इसलिए कम मतदान को बीजेपी के वफादार वोटों के ध्रुवीकरण के रूप में देखा जा सकता है.
शहरी क्षेत्रों में वोटिंग गिरकर 34 फीसदी आसपास आ जाती है,तो यह इस बात का संकेत होता है कि आम जनता या फिर न्यूट्रल वोटर घर बैठे रहे. ऐसे में परिणाम पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करते हैं कि किस दल ने अपने पक्के कैडर और बूथ-लेवल कार्यकर्ताओं को बूथ तक ले जाने में सफल रही है. बांकीपुर के शहरी मतदाताओं में सवर्ण जातियों (कायस्थ, भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत) और वैश्य वर्ग की खासी आबादी है, जो लंबे समय से भाजपा का कोर वोटर मानी जाती रही है.
प्रशांत किशोर और नरोत्तम मिश्रा का क्या होगा
प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने और आरजेडी के जोर लगाने से शहरी युवाओं और बदलाव चाहने वाले कुछेक वर्ग में सुगबुगाहट जरूर दिखी, जिसके चलते बीजेपी को पहले की तरह लीड मिलना मुश्किल है. नीतिन नवीन के मुकाबले नीरज सिन्हा कमजोर उम्मीदवार जरूर माने जाते हैं, लेकिन बीजेपी की परंपरागत सीट और कैडर के दम पर जीत सकते हैं.
मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी मतदाताओं ने भारी उत्साह दिखाया और लगभग 70 फीसदी के आसपास मतदान किया. यह मतदान इस बात का संकेत है कि मुकाबला बेहद आक्रामक है, स्थानीय समीकरण बेहद मजबूत थे और जनता सत्ता या राजनीतिक उठापटक को लेकर पूरी तरह जागरूक व विभाजित थी.
बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है, लेकिन नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने का असर बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी पर पड़ सकता है. हालांकि, नरोत्तम मिश्रा ने पूरी ताकत से बीजेपी को लड़ा सकते हैं.