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पकड़ में आया दुनिया का पहला 'कार वायरस', कितना पहुंचा सकता है नुकसान

क्या आपकी कार हैक हो सकती है? इसकी चर्चा एक नई रिपोर्ट के आने के बाद से खूब हो रही है, जिसमें कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम में मैलवेयर पाया गया है. ये मैलवेयर कार की स्क्रीन पर ऐड्स दिखाने के साथ ही कई दूसरे काम भी कर सकता था. सिक्योरिटी फर्म कैस्परस्काई ने इसके बारे में जानकारी दी है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.

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ये मैलवेयर चुपके से आपकी कार में एंट्री करता है. (Photo: BYD)
ये मैलवेयर चुपके से आपकी कार में एंट्री करता है. (Photo: BYD)

कारों का काम लोगों का सफर आसान बना था. लेकिन वक्त के साथ इसके हिस्से में दूसरे काम भी जोड़ दिए गए हैं. अब एक कार का इस्तेमाल सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए नहीं किया जा रहा है. बल्कि इसमें एंटरटेनमेंट और दूसरी लाइफस्टाइल जरूरतों का भी ख्याल रखा जा रहा है. 

इसकी वजह से कारों में बहुत से फीचर जोड़े जा रहे हैं. इन फीचर्स की वजह से कार को हैक किया जा सकता है. ऐसे एक मैलवेयर को स्पॉट किया गया है. बल्कि ये कार के इंफोटेनमेंट यूनिट्स को टार्गेट करने वाला पहला मैलवेयर बताया जा रहा है. सिक्योरिटी फर्म कैस्परस्काई की थ्रेट रिसर्च टीम ने इसकी जानकारी दी है. 

अपनी तरह का पहला मैलवेयर 

कैस्परस्काई की मानें, तो ये पहला डॉक्यूमेंटेड मैलवेयर है, जो खासतौर पर कारों के इंफोटेनमेंट यूनिट को उनके ऑटोमेटिक अपडेट कैपेबिलिटी से टार्गेट करता है. हालांकि, इस अटैक को पूरा करने के लिए मैलवेयर को मल्टीपल स्टेप्स उठाने पड़ते हैं. 

एक बार सिस्टम कॉम्प्रोमाइज हो जाए, तो अटैकर्स इसका इस्तेमाल कई तरीकों से कर सकते हैं. इसमें सबसे आम एडवर्टाइजमेंट फ्रॉड है. ऐसे में आपकी स्क्रीन पर बैकग्राउंड में ऐड्स चलते रहेंगे और आपको पता भी नहीं चलेगा. ये ऐड्स आपका डेटा तेजी से खत्म करते हैं. ऐसा खतरा फैक्टरी फिटेड और आफ्टर मार्केट दोनों तरह के एंड्रॉयड बेस्ड यूनिट्स को निशाना बना सकता है.

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इस मैलवेयर को चीनी मैन्युफैक्चर्र डूफन (DoFun) की इंफोटेनमेंट यूनिट्स में पाया गया है. ये कंपनी अपना खुद का एंड्रॉयड बेस्ड ओएस और क्लाउड ऐप्स बनाती है, जिनका इस्तेमाल दुनिया भर की 3 करोड़ कारों में होता है. ये मैलवेयर डूफन के ओवर-दि-एयर अपडेट मैकेनिज्म के जरिए डिस्ट्रिब्यूट हुआ है. 

कैस्परस्काई की मानें, तो जिस खामी की वजह से ये मैलवेयर अटैक कर रहा था, उसका पैच जारी कर दिया गया है. बहुत सी कारों के इंफोटेनमेंट सिस्टम में ऑल्वेज ऑन इंटरनेट कनेक्टिविटी का फीचर आता है, जो इन्हें ऐसे मैलवेयर का सबसे आसान टार्गेट बनाता है.

खुद को छिपा सकता है 

डूफन के मामले में टीडब्लू कोर कॉम्प्रोमाइज हुआ था. इसका इस्तेमाल मैन्युफैक्चर्र एनालिटिक्स को कलेक्ट करने और सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करने के लिए करते हैं. अटैकर्स अपना मैलवेयर इस प्रॉसेस में डालने में सफल हो गए थे, जिससे उसे प्रभावित यूनिट्स तक आसानी से भेजा जा सका. इस मैलवेयर को पकड़े जाने से बचने के लिए बनाया गया था.

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ये सिर्फ बैकग्राउंड में काम कराता था और जिससे यूजर को इसके बारे में जानकारी नहीं होती थी. ये मैलवेयर फर्जी ऐड्स दिखाने, यूनिक आइडेंटिफाइंग इंफॉर्मेशन भेजने के साथ ही सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने और उन्हें एग्जीक्यूट करने की क्षमता रखता था. यानी आपकी कार की इंफोटेनमेंट यूनिट में एंटर करने के बाद हैकर वहां कोई भी ऐप डाउनलोड कर सकता है.

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