एक अग्नि मिसाइल, 12 टारगेट्स स्वाहा... जानिए इसके पीछे की MIRV तकनीक

DRDO ने ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से अग्नि-5 मिसाइल का एडवांस MIRV वर्जन का सफल टेस्ट किया. एक मिसाइल से कई अलग-अलग टारगेट्स को नष्ट कर सकती है. यह तकनीक भारत की सेकंड स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करेगी.

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अग्नि मिसाइल के एकदम ऊपर MIRV बस लगाया जाता है, जिसमें कई वॉरहेड्स होते हैं. (Photo: DRDO/Defence Decode) अग्नि मिसाइल के एकदम ऊपर MIRV बस लगाया जाता है, जिसमें कई वॉरहेड्स होते हैं. (Photo: DRDO/Defence Decode)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:02 PM IST

ओडिशा के डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम द्वीप से भारत ने अग्नि-5 मिसाइल का एडवांस MIRV वर्जन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. यह परीक्षण मात्र एक सामान्य मिसाइल टेस्ट नहीं है, बल्कि एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक समीकरण को पूरी तरह बदल देने वाला है. एक ही मिसाइल से कई स्वतंत्र वॉरहेड अलग-अलग टारगेट्स को भेदने में सफल रहे. इससे भारत विश्व की चुनिंदा MIRV शक्तियों में शामिल हो गया.   

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MIRV तकनीक क्या है?

MIRV का पूरा नाम मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल है. इसका मतलब है कि एक मिसाइल कई परमाणु वॉरहेड ले जा सकती है. हर वॉरहेड सैकड़ों किलोमीटर दूर अलग-अलग टारगेट्स को निशाना बना सकता है. पहले एक मिसाइल का मतलब था एक लक्ष्य, लेकिन अब एक मिसाइल कई सैन्य या रणनीतिक लक्ष्यों को एक साथ नष्ट कर सकती है. 

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अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के बाद भारत अब इस एलीट क्लब में शामिल हो गया है. प्रत्येक वॉरहेड 400 किलोग्राम तक का हो सकता है. MIRV बस 4-5 वॉरहेड ले जा सकती है. कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि भविष्य में यह संख्या 10-12 तक पहुंच सकती है.

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दूसरे हमले की क्षमता क्यों मजबूत हुई?

यह MIRV से लैस अग्नि-5 भारत की सेकंड स्ट्राइक क्षमता को बहुत बढ़ा देती है, जो परमाणु निरोध की सबसे मजबूत नींव है. अगर दुश्मन कुछ वॉरहेड रोक भी ले तो बाकी लक्ष्य तक पहुंच ही जाते हैं. इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को कई वॉरहेड को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है.
 
इस परीक्षण में मिसाइल ने मध्य उड़ान में 90 डिग्री का तेज मोड़ लिया, जो सामान्य मिसाइलों के लिए लगभग असंभव होता है. इसने मिसाइल को अप्रत्याशित दिशा बदलने की क्षमता दी है, जिससे दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम को चकमा मिलता है.

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पड़ोसी देश क्यों चिंतित होंगे?

यह परीक्षण पश्चिमी मोर्चे, उत्तरी सीमा और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निरोधक क्षमता को मजबूत करता है. यह ऐसे समय में हुआ है जब चीन की PLA अपनी मिसाइल क्षमता तेजी से बढ़ा रही है. एशिया में हाइपरसोनिक हथियारों की होड़ चल रही है. हिंद महासागर में पनडुब्बियों की संख्या बढ़ रही है. 

इंडो-पैसिफिक व्यापार मार्गों का सैन्यीकरण हो रहा है. अग्नि-5 की 5000 से 8000 किलोमीटर की रेंज चीन के उत्तरी हिस्सों तक पहुंच सकती है. MIRV और 90 डिग्री मोड़ की क्षमता भारत को मजबूत जवाबी हमले की ताकत देती है, खासकर नो फर्स्ट यूज नीति के तहत.

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इस करतब के पीछे की तकनीक

MIRV जैसी उन्नत क्षमता हासिल करने के लिए देश को कई सालों या दशकों की मेहनत करनी पड़ती है. इसमें जरूरी हैं- एडवांस गाइडेंस कंप्यूटर, प्रेसिजन नेविगेशन सिस्टम, छोटे आकार के वॉरहेड, गर्मी सहन करने वाले री-एंट्री व्हीकल, अल्ट्रा एक्यूरेट पेलोड सेपरेशन और लंबी दूरी के ट्रैकिंग सिस्टम. 

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DRDO ने स्वदेशी एवियोनिक्स, हाई-प्रेसिशन सेंसर, प्रेशर टैंक, ऑक्सीडाइजर सिस्टम और कंपोजिट मटेरियल का इस्तेमाल कर मिसाइल का वजन 20% कम किया है. कार्बन कंपोजिट ने री-एंट्री के दौरान वारहेड को अत्यधिक गर्मी से बचाया. डिकॉय वॉरहेड भी दुश्मन को भ्रमित कर सकते हैं.

भारत के भविष्य के कार्यक्रम

भारत एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है. हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल प्रोग्राम, एंटी-सैटेलाइट (ASAT) सिस्टम, स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस, न्यूक्लियर पनडुब्बी बेड़े का विस्तार, लंबी दूरी के ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युद्ध प्रणाली और स्पेस-बेस्ड सैन्य निगरानी शामिल हैं. 

अग्नि-6 मिसाइल की योजना तैयार है, जिसकी रेंज 12000 किलोमीटर तक होगी. K-सीरीज पनडुब्बी लॉन्च मिसाइलों के परीक्षण भी जल्द होने वाले हैं. भारत के रक्षा निर्यात अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं. स्वदेशी सिस्टम कई देशों को निर्यात किए जा रहे हैं.

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यह परीक्षण दर्शाता है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय संतुलनकारी शक्ति नहीं रह गया है. वह लंबी दूरी की निरोधक क्षमता, रणनीतिक स्वायत्तता, स्वदेशी सैन्य-तकनीकी इकोसिस्टम और मल्टी-डोमेन युद्ध क्षमता बना रहा है.
 
आधुनिक भू-राजनीति में सिर्फ आर्थिक ताकत काफी नहीं है. तकनीकी निरोधक क्षमता उतनी ही जरूरी है. अगले 25 वर्षों में जो देश AI, स्पेस, साइबर, मिसाइल सिस्टम, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर में आगे रहेंगे, वही दुनिया पर हावी रहेंगे. भारत स्पष्ट रूप से उस युग के लिए खुद को तैयार कर रहा है.

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