रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच देशों में अमेरिका 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारियां कर रहा है, जिसमें भारत भी शामिल है. इस पर अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं. नवारो का ये बयान अमेरिकी सीनेट द्वारा एक बिल पारित किए जाने के कुछ दिनों बाद आया है.
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए नवारो ने 6-8 महीने पहले फाइनेंशियल टाइम्स में लिखे अपने एक लेख का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस के साथ तेल व्यापार में शामिल नहीं था, लेकिन बाद में उसने रूसी रिफाइंड प्रोडक्ट्स को बेचना शुरू किया. जिससे युद्ध मशीनरी को मदद मिली.
नवारो ने दावा किया कि ये मुद्दा सुलझ गया है. हालांकि, उस लेख के बाद उन्हें सोशल मीडिया भारी विरोध और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था. मैं बस इतना ही कहूंगा कि ऐसा न करें.
PM मोदी और ट्रंप सुलझा लेंगे मुद्दा
नवारो ने कहा कि अमेरिका में समस्याओं को इस तरीके से हल नहीं किया जाता है. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बहुत अच्छे कामकाजी संबंध हैं. वो इसे आपस में सुलझा लेंगे और मेरे या किसी और समूह के लिए उनके बीच दखल देना सही नहीं है.
अमेरिकी सीनेट में विधेयक पास
दरअसल, 7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट ने एक बिल पारित किया था. इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार देशों (जिनमें भारत और चीन शामिल हैं) पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है. बिल का तर्क है कि इस तरह का व्यापार मॉस्को की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और यूक्रेन में उसके सैन्य अभियानों को फंड करने में मदद करता है.
सीनेट ने भारी बहुमत (86-11 वोट) से 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को मंजूरी दी. दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम (जो इसके मुख्य निर्माताओं में से एक थे) के नाम पर रखे गए इस कानून का उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है.
पुतिन-रूसी सैन्य अधिकारियों और तेल टैंकरों पर नए प्रतिबंध
इस विधेयक के प्रावधान केवल ऊर्जा खरीदार देशों तक सीमित नहीं हैं. इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ राजनीतिक व सैन्य अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा परियोजनाओं पर भी नए प्रतिबंधों की रूपरेखा दी गई है. साथ ही वैश्विक प्रतिबंधों को दरकिनार कर ऊर्जा राजस्व जुटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पुराने और रिफ्लैग किए गए तेल टैंकरों पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का विस्तार किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था और सैन्य अभियानों के वित्तीय सोर्स को रोकना है.
विधेयक ऊर्जा आयातक देशों के सामने विकल्प रखता है कि वो या तो रियायती रूसी ऊर्जा खरीदें या अमेरिकी बाजार तक अपनी पहुंच बनाए रखें. भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं. भारत ने 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बीच राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती रूसी तेल की खरीद बढ़ाई थी. इससे भारतीय रिफाइनरियों को कच्चे माल की लागत कम करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान के दौरान निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिली है.