भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोटरों के नाम कथित रूप से हटाए जाने का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरमाने लगा है. भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की रिपोर्ट्स पर गहरी चिंता व्यक्त की है
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए डेमोक्रेटिक सांसद जयपाल ने लिखा, "मैं भारत में मतदाता सूचियों से 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने की कार्रवाई से बेहद चिंतित हूं. भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हो रहे प्रयासों का विरोध करने के लिए चलाए जा रहे अहिंसक आंदोलनों का मैं समर्थन करती हूं. ऐसे समय में अहिंसक आंदोलन बेहद जरूरी हैं."
जयपाल ने भारत की स्थिति की तुलना अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नीतियों से करते हुए कहा कि दोनों जगह मतदान के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशों का एक जैसा तरीका दिखाई देता है. उन्होंने भारत में कथित अलोकतांत्रिक प्रयासों का विरोध कर रहे लोगों के अहिंसक आंदोलनों के प्रति समर्थन जताया.
यह भी पढ़ें: 'चुनाव आयोग पर भरोसा टूटा, आंदोलन और बढ़ेगा', CJP प्रदर्शन पर बोले प्रशांत किशोर
चुनाव आयोग की सफाई
हालांकि निर्वाचन आयोग ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है. आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के पहले और दूसरे चरण में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट लिस्ट से करीब 7.2 करोड़ नाम हटाए गए थे. वहीं, 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे तीसरे चरण के दौरान हटाए गए नामों की संख्या 6.16 करोड़ दर्ज की गई है.
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से छूट गया है, तो वह दावा एवं आपत्ति प्रक्रिया और फॉर्म 6 के माध्यम से पुनः नाम जुड़वा सकता है.