स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) भारत के चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची (voter list) को अपडेट और शुद्ध करना होता है. “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” यह शब्द ना सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि इसका सीधा असर मतदाताओं पर पड़ता है.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) एक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को अपडेट करता है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि वोटिंग के दिन सही और अपडेटेड जानकारी के साथ वोटर लिस्ट तैयार हो.
NVSP पोर्टल पर जाकर वोटर लिस्ट में अपना नाम ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. “Voter Helpline” ऐप से भी पता लगाया जा सकता है. स्थानीय BLO (Booth Level Officer) से संपर्क कर सकते हैं. साथ ही, सुधार/नामांकन के लिए Form-6, 7, 8 का उपयोग किया जा सकता है.
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुल इलाकों में जमकर मतदान हुआ है. मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना जिलों में मतदान में 10% से लेकर 20% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण में 142 सीटों पर कल यानी 29 अप्रैल को मतदान होना है. 3.21 करोड़ वोटर 1448 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे, जबकि लाखों वोटर लिस्ट आवेदन अब भी लंबित हैं.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने एक बार फिर मोर्चा खोलते हुए राज्यसभा में महाभियोग का नोटिस दिया है. विपक्ष का आरोप है कि CEC ने चुनावों और वोटर लिस्ट पुनरीक्षण के दौरान पक्षपातपूर्ण आचरण किया है. मार्च में प्रस्ताव खारिज होने के बाद, इस बार 73 सांसदों के समर्थन के साथ विपक्ष 200 का आंकड़ा छूने की कोशिश में है. स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया को बचाने का हवाला देते हुए विपक्ष इस बार पहले से अधिक आक्रामक नजर आ रहा है
प्रवासी मजदूर बिहार, असम और गुजरात जैसे राज्यों से लौटकर बंगाल में वोट देने आ रहे हैं. ये मजदूर मतदान करके अपनी राजनीतिक पहचान सुरक्षित करना चाहते हैं. कुछ मजदूरों में दस्तावेजों को लेकर बेचैनी भी देखी जा रही है, क्योंकि उन्हें अपनी नागरिकता और पहचान को लेकर चिंता है. ये वोट उनके अस्तित्व का दस्तावेज है.
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी तापमान हाई है. सभी पार्टियों ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. इन चुनावों में SIR सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है. SIR के दौरान लाखों लोगों का नाम वोटर लिस्ट से कट गया, जो इस बार मतदान नहीं कर पाएंगे. देखें बंगाल से SIR पर आजतक की ये स्पेशल रिपोर्ट.
उत्तर प्रदेश में एसआईआर के बाद आए मतदाता आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चेतावनी के बावजूद कई दिग्गज नेताओं के क्षेत्रों में भारी संख्या में वोट कटे हैं.
चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या करीब 6.08 करोड़ घट गई है. पहले जहां कुल संख्या लगभग 51 करोड़ थी, अब यह घटकर 44.92 करोड़ रह गई है. इस प्रक्रिया का दूसरा चरण पूरा हो चुका है, जबकि अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा.
यूपी में चुनाव आयोग ने SIR की फाइनल लिस्ट जारी कर दी. यूपी में वोटर्स की संख्या 13% घटकर 13.39 करोड़ हो गई. फाइनल लिस्ट से 2.04 करोड़ नाम कटे. इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने SIR को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा. देखें वीडियो.
यूपी में चुनाव आयोग ने SIR की फाइनल लिस्ट जारी कर दी है. यूपी में वोटर्स की संख्या 13% घटकर 13.39 करोड़ हो गई है. फाइनल लिस्ट से 2.04 करोड़ नाम कटे हैं. 84 लाख नए नामों को जोड़ा गया है. SIR से पहले अक्टूबर 2025 में यूपी में कुल 15.44 करोड़ वोटर्स थे. SIR की फाइनल लिस्ट पर क्या बोले यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी? देखें वीडियो.
उत्तर प्रदेश में 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है, जिसमें मतदाताओं की संख्या बढ़कर 13.39 करोड़ हो गई है. ड्राफ्ट सूची के मुकाबले 84 लाख से अधिक मतदाता बढ़े हैं. प्रयागराज और गाजियाबाद जैसे जिलों में सर्वाधिक वृद्धि हुई है.
उत्तर प्रदेश में आज अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी जिसमें लगभग 7 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं. ड्राफ्ट सूची में 12.55 करोड़ मतदाता थे, जबकि फाइनल सूची में 13.35 करोड़ मतदाताओं की उम्मीद है.
पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद NIA ने 12 FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. टीम मौके पर पहुंच चुकी है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है.
पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में अब भी लगभग 30 लाख संदिग्ध नाम सूची में शामिल हैं. इनमें मृतक, डुप्लिकेट और विदेशी घुसपैठिए भी शामिल हैं. ये नाम चुनाव आयोग की प्रक्रिया में अड़चनें और राजनीतिक दबाव चुनावी पारदर्शिता को प्रभावित कर सकते हैं
नंदीग्राम में 2026 के चुनावों से पहले मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर मामला गरमा गया है. सबर इंस्टीट्यूट के मुताबिक, हटाए गए नामों में 95.5% मुस्लिम मतदाता हैं. ये चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है.
एसआईआर को लेकर कल बुधवार को टीएमसी का एक दल दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा. टीएमसी के 4 सदस्य सुबह 10 बजे चुनाव आयोग से मिलने जाएंगे, जिसमें कटे हुए वोटरों के मुद्दे पर बात करेंगे. डेरेक ओ ब्रायन, सागरिका घोष, साकेत गोखले और मानेगा गुरूस्वामी चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. देखें वीडियो.
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच चुनाव आयोग ने फिर वोटर्स की छटनी की है. आयोग की नई लिस्ट से करीब 90 लाख 66 हज़ार वोटर्स हटा दिए हैं. इस बार इलेक्शन कमीशन ने जिला वार मतदाताओं की लिस्ट जारी की है जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नामांकन से ठीक पहले एक उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट से एसआईआर को लेकर तत्काल सुनवाई की अपील की है. याचिकाकर्ता का नाम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से कट गया है. देखें वीडियो.
बंगाल में वोटर लिस्ट शुद्धिकरण के तहत 90 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं. चुनाव आयोग ने डेटा में गड़बड़ियों और सत्यापन के आधार पर यह कदम उठाया है. विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया है. जानें SIR प्रक्रिया, चुनाव अपडेट और 2026 विधानसभा चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा.
पश्चिम बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई. इस दौरान टीएमसी ने अदालत से मांग की- जिनका वोटर लिस्ट में नाम नहीं हैं, उन्हें मतदान करने दिया जाए. ऐसे कई लोगों का केस ट्रिब्यूनल में पेंडिंग है, जिसकी सुनवाई अभी तक शुरू नहीं हुई है. देखें वीडियो.
Supreme Court hearing on Bengal first-phase voter list: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट अपडेट के लिए 24 घंटे की समयसीमा तय की है. चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि लंबित दावों पर फैसला कर जल्द अंतिम सूची जारी करे. कोर्ट ने कहा है कि डिजिटल सिग्नेचर पूरे न हो तब भी लिस्ट जारी करें.
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सुप्रबुद्ध सेन और उनकी पत्नी का नाम मतदाता सूची से गायब पाया गया. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मामले को जल्द सुलझाने और बुजुर्ग दंपती की हर संभव मदद करने का निर्देश दिया है.