स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) भारत के चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची (voter list) को अपडेट और शुद्ध करना होता है. “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” यह शब्द ना सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि इसका सीधा असर मतदाताओं पर पड़ता है.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) एक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को अपडेट करता है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि वोटिंग के दिन सही और अपडेटेड जानकारी के साथ वोटर लिस्ट तैयार हो.
NVSP पोर्टल पर जाकर वोटर लिस्ट में अपना नाम ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. “Voter Helpline” ऐप से भी पता लगाया जा सकता है. स्थानीय BLO (Booth Level Officer) से संपर्क कर सकते हैं. साथ ही, सुधार/नामांकन के लिए Form-6, 7, 8 का उपयोग किया जा सकता है.
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चांदनी चौक के कई बूथों पर SIR वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया है. पार्टी ने मतदाता सहायता केंद्र खोलने का ऐलान किया है ताकि प्रभावित लोगों की मदद की जा सके. कांग्रेस ने कहा है कि अगर इसके लिए जरूरत पड़ी तो पार्टी लोगों के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगी.
भारत रत्न प्रोफेसर सीएनआर राव को चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में नाम की स्पेलिंग गलती के चलते नोटिस भेजा गया है. पुरानी वोटर लिस्ट में उनका नाम प्रोफ सीएनआर राव था, लेकिन नई लिस्ट में गलती से Proff लिख दिया गया, जिसे सेल्फ नेम मिसमैच कहा गया है.
झारखंड से एसआईआर प्रक्रिया फिर सवालों में आ गई है. झारखंड की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में तीन अफगानी नागरिकों का नाम मिलने से खलबली मच गई. हैरान करने वाला ये मामला जमशेदपुर का है. पासपोर्ट और दस्तावेजों की जांच के दौरान उनके विदेशी होने की पुष्टि हुई. देखें वीडियो.
झारखंड में जारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान जमशेदपुर में तीन अफगान नागरिकों के नाम सामने आने से हड़कंप मच गया है. दस्तावेजों की जांच के दौरान तीनों की विदेशी नागरिकता सामने आई.
दिल्ली की वोटर लिस्ट में बीजेपी सांसद राघव चड्ढा के नाम को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच विवाद छिड़ गया है. आप ने चुनाव आयोग से इस मामले में जवाब मांगा है. हालांकि राघव चड्ढा का कहना है रि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया है. बीजेपी सांसद ने आप पर तंज कसते हुए कहा कि 'पार्टी ब्रेकअप के बाद एक्स पार्टनर की तरह बर्ताव कर रही है.'
मैंगलोर में चुनाव अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई, जहां पद्मश्री पुरस्कार विजेता हरेकला हजब्बा को नोटिस जारी कर दिया गया. अधिकारियों ने बाद में अपनी गलती मानते हुए हजब्बा से माफी मांगी और नोटिस वापस ले लिया.
पटियाला में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी का नाम लिस्ट से हट गया. हालांकि बाद में उनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ गया. लेकिन अब उनके परिवार के चार सदस्यों को नोटिस जारी किए गए हैं. जिनमें उनकी पत्नी, बेटा, बेटी और बहू शामिल हैं.
चुनाव आयोग के SIR अभियान के तहत पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम कट गया है. उनके नाम के आगे 'Permanently Shifted' लिखा गया है. अब राघव चड्ढा 12 सितंबर 2026 तक अपना नाम काटे जाने पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं और दोबारा नाम ऐड करवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम हटने पर सियासी विवाद बढ़ गया है. चड्ढा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि AAP ने आरोप खारिज कर SIR को चुनाव आयोग की प्रक्रिया बताया. 12 सितंबर तक नाम जोड़ने के लिए दावा-आपत्ति दर्ज की जा सकती है.
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी एसआईआर में वोटर लिस्ट ड्राफ्ट से काट दिया गया है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर किन वजहों से नाम काट दिया जाता है.
दिल्ली में SIR अभियान के तहत 31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई, जिसमें 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 33% के नाम बाहर पाए गए. दो दिनों में 5.34 लाख से ज्यादा लोगों ने नाम जोड़ने और सुधार के लिए दावे-आपत्तियां दर्ज कराई हैं. हालांकि 30 सितंबर तक ऑनलाइन या ऑफलाइन फॉर्म-6 के जरिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं.
दिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 47.58 लाख यानी 33 फीसदी नाम कट गए हैं. सबसे ज्यादा असर उन इलाकों पर पड़ा जहां 2025 के चुनाव में कम वोटिंग हुई थी, जिसकी मुख्य वजह अवैध निर्माण गिराया जाना और झुग्गियों का शिफ्ट होना बताई गई है. ओखला सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका रहा.
SIR के साथ दिल्ली में मतदान केंद्रों की संख्या में भी बड़ा बदलाव किया गया है. एक मतदान केंद्र पर अधिकतम मतदाताओं की संख्या 1500 से घटाकर 1200 किए जाने के बाद मतदान केंद्रों की संख्या 13,033 से बढ़कर 14,947 हो गई है.
महाराष्ट्र और दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत 31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट वोटर रोल जारी कर दिया गया है. सत्यापन और डिजिटाइजेशन से जुड़े कारणों की वजह से दोनों राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम फिलहाल ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए हैं.
महाराष्ट्र और दिल्ली में एसआईआर के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हो गई है, लेकिन बड़ी संख्या में नाम अभी शामिल नहीं हैं. जिन मतदाताओं का नाम नहीं दिख रहा, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक दावा या आपत्ति देकर 4 नवंबर 2026 से पहले रिकॉर्ड ठीक करा सकते हैं.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने SIR के जरिए वोटर लिस्ट की जांच पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले फिर से SIR कराया जा सकता है, जिससे सही मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है. अखिलेश यादव ने लोगों से अपनी वोटर लिस्ट की जांच और सुधार के लिए सतर्क रहने को कहा है.
पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने नागरिकता प्रमाणित करने में आ रही दिक्कतों को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने बताया कि वोटर आईडी और आधार कार्ड जमा करने के बाद भी उन्हें पुराने रिकॉर्ड से मेल न खाने की सूचना मिली. नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं.
उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के दफ्तर के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्होंने ज्ञापन सौंपने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोका. ऐसे में नेताओं ने दफ्तर के बाहर धरना दे दिया.
दिल्ली चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम की समय सीमा तीसरी बार बढ़ा दी है. अब ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को जारी होगी.
SIR का एन्यूमरेशन फॉर्म भरना सिर्फ जानकारी दर्ज करने भर का काम नहीं है. पुरानी SIR की डिटेल से लेकर विधानसभा नंबर और रिश्तेदार की जानकारी तक, छोटी सी गलती आपका फॉर्म अटका सकती है. सीलमपुर के BLO निजाम ने ऐसी ही पांच कॉमन गलतियां बताईं, जिन्हें समझकर आप फॉर्म भरते वक्त गड़बड़ी से बच सकते हैं.
अगर आपने अभी तक SIR फॉर्म नहीं भरा है तो आपके लिए राहत की खबर है. निर्वाचन आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा दूसरी बार बढ़ा दी है. अब फॉर्म जमा करने, सत्यापन, ड्राफ्ट और अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने की नई तारीखें लागू होंगी, जिससे मतदाताओं को अतिरिक्त समय मिल गया है.