स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) भारत के चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची (voter list) को अपडेट और शुद्ध करना होता है. “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” यह शब्द ना सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि इसका सीधा असर मतदाताओं पर पड़ता है.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) एक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को अपडेट करता है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि वोटिंग के दिन सही और अपडेटेड जानकारी के साथ वोटर लिस्ट तैयार हो.
NVSP पोर्टल पर जाकर वोटर लिस्ट में अपना नाम ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. “Voter Helpline” ऐप से भी पता लगाया जा सकता है. स्थानीय BLO (Booth Level Officer) से संपर्क कर सकते हैं. साथ ही, सुधार/नामांकन के लिए Form-6, 7, 8 का उपयोग किया जा सकता है.
विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. विपक्ष ने दोनों सदनों में महाभियोग का नोटिस पेश करने के लिए जरूरी आंकड़ों को पार कर लिया है.
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग.विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में नोटिस सौंपा है. इस नोटिस पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. नियमों के मुताबिक लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है, जिसे विपक्ष ने पार कर लिया है.
CM ममता बनर्जी ने राज्य की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में कोलकाता के केंद्रीय हिस्से में धरना प्रदर्शन शुरू किया है. यह विरोध विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पहले टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच विवाद को और बढ़ावा दे रहा है. ममता ने राजनीतिक रूप से सड़क आंदोलन के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है.
बंगाल में करीब 80 लाख लोग अपनी नागरिकता और पहचान से जुड़े दावों और आपत्तियों का निपटारा कराने की कोशिश कर रहे हैं. 2002 की मतदाता सूची के साथ मिलान के दौरान विसंगतियां पाए जाने के बाद यह संकट खड़ा हुआ था.
लखनऊ के अकबर नगर में कुकरैल नदी के किनारे अवैध निर्माण हटाए जाने के बाद प्रभावित 91 लोगों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में शामिल होने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने कहा कि पते के अभाव में उन्हें प्रक्रिया से बाहर किया जा रहा है.
तमिलनाडु में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 23 फरवरी 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची में मसौदा सूची के मुकाबले 23.30 लाख मतदाता बढ़कर कुल संख्या 5.67 करोड़ हो गई. इसमें 2.77 करोड़ पुरुष, 2.89 करोड़ महिलाएं और 7,617 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. सूची में 18-19 आयु वर्ग के 12.51 लाख युवा, 4.63 लाख दिव्यांग और 3.99 लाख 85+ वरिष्ठ मतदाता दर्ज हैं.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1.70 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल सहित कई राज्यों में मतदाता आधार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
राजस्थान निर्वाचन विभाग ने 199 विधानसभा सीटों के लिए SIR पूरी कर फाइनल मतदाता सूची जारी की है. इसके बाद कुल 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, लेकिन कुल मतदाताओं की संख्या 5 करोड़ 15 लाख 19 हजार 929 हो गई, जो ड्राफ्ट सूची की तुलना में 10.48 लाख अधिक है. जोधपुर में 2 लाख से अधिक नाम हटाए गए.
निर्वाचन आयोग ने राजस्थान की पिछली मतदाता सूची के मुकाबले 2 लाख 42 हजार से ज्यादा नाम हटा दिए हैं. हाल ही में जारी हुए अंतिम मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 5 करोड़ 15 लाख 20 हजार पहुंच गई है. इस सूची में युवाओं, महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स की भागीदारी बढ़ी है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना के मामलों में सभी राज्यों में विवाद बढ़ रहा है. कई लोग सुप्रीम कोर्ट तक शिकायत लेकर जा चुके हैं. इस स्थिति ने कानूनी प्रक्रिया को जटिल बना दिया है. यह समस्या राज्यों के बीच मतभेद और आदेशों के अनुपालन में कमी को दर्शाती है. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के पालन को लेकर अब तेज़ी से कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि कानूनी आदेशों का सम्मान और लागू होना सुनिश्चित किया जा सके.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के SIR मामले में राज्य सरकार के सहयोग न करने पर कड़ी नाराजगी जताई है. मुख्य न्यायाधीश ने साफ कहा कि चुनाव के लिए साफ-सुथरी मतदाता सूची जरूरी है और इसमें देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
चुनाव आयोग ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मतदाता सूची के व्यापक संशोधन के लिए सर्प तैयारियों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं. यह प्रक्रिया अप्रैल से प्रारंभ होने की संभावना है. इस प्रक्रिया में नए मतदाताओं को सूची में जोड़ना, जिन मतदाताओं की मृत्यु हो गई है या जो स्थानांतरित हो चुके हैं उनके नाम हटाना और मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को सुधारना शामिल है. देखें वीडियो.
चुनाव आयोग ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मतदाता सूची के व्यापक संशोधन के लिए SIR की तैयारियां जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं. यह प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होने की संभावना है. SIR में नए मतदाताओं को जोड़ना, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और गलतियां सुधारना शामिल है.
अगर किसी का नाम काटना है तो फॉर्म सेवेन भरना होता है. लेकिन जब फॉर्म सेवेन भरा जाता है और नाम संबंधित व्यक्ति फिजिकल रूप से उपस्थित होता है तो फॉर्म खुद ही कट जाता है. इस प्रक्रिया में कोई चिल्लाहट या आरोप-प्रत्यारोप समझ में नहीं आता. साथ ही इस मामले में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट जैसी घटनाएं हो रही हैं जो उचित नहीं हैं.
इस वीडियो में बताया गया है कि कुल कितने नोटिस ओने आईटी ओने लोगों को मिले हैं और ये नोटिस किस बूथ पर आए हैं. यदि हम बूथ पर आए हुए नोटिसों को विस्तार से देखें तो पीडीए के लोगों को कुल नोटिसों का 76 फीसदी हिस्सा मिला है. इनमें लगभग 46 से 50 फीसदी लोग यादव और मुस्लिम समुदाय के हैं.
BJP नेता अजय आलोक ने एक बहस के दौरान SIR का अर्थ बताते हुए समाजवादी पार्टी पर हमला बोला. उन्होनें कहा कि SIR स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन नही बल्कि समाजवादी इंडी रोंदू है.
SIR पर यूपी में जंग जारी है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर फर्जी दस्तखत से वोट कटवाने के नए आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष के फर्जी दस्तखत से वोट काटे गए हैं. विधानसभा बामागंज में किसी नामदेव ने साइन किया जो फर्जी साबित हुए.
वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के नाम पर शुरू हुए SIR में अजब-गजब सियासत हो रही है. वो इसलिए कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव आरोप लगा रहे हैं कि फर्जी फॉर्म-7 भरवाकर बीजेपी उनके समर्थकों के नाम कटवा रही है और अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही. उधर बंगाल में चुनाव आयोग ने 7 अफसरों को निलंबित कर दिया है क्योंकि वहां बीजेपी ने ममता बनर्जी के अफसरों के खिलाफ गलत तरीके से नाम जोड़ने की शिकायत की है. सवाल है अखिलेश यादव के आरोप क्या सिर्फ चुनावी राजनीति का हिस्सा हैं? देखें दंगल.
यूपी में एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर नए आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नगर अध्यक्ष के फर्जी दस्तखतों के ज़रिए विधानसभा चुनाव में वोट काटे गए. बाबागंज विधानसभा क्षेत्र में एक व्यक्ति रामदेव के नाम से फर्जी साइन किए गए हैं. अखिलेश यादव के अनुसार कुल सात फर्जी दस्तखत हुए हैं. देखें वीडियो.
BJP सांसद संबित पात्रा ने SIR पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत जी ने स्पष्ट किया है कि सभी राज्यों को यह समझना चाहिए कि किसी भी कीमत पर SIR को रोकना संभव नहीं होगा. यदि SIR को लेकर किसी भी प्रकार की स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत होगी तो उसकी जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की होगी.
सूरत शहर में SIR को लेकर एक बार फिर संग्राम छिड़ गया है. कांग्रेस ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बीजेपी और BLOs पर मिली भगत का आरोप लगाया है. साथ ही बीजेपी पर गलत तरीके से 5 हजार से ज्यादा फॉर्म-7 भरने और सुनियोजित तरीके से मुसलिम समुदाय का वोट काटने का भी आरोप लगाया है.