स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) भारत के चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची (voter list) को अपडेट और शुद्ध करना होता है. “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” यह शब्द ना सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि इसका सीधा असर मतदाताओं पर पड़ता है.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) एक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को अपडेट करता है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि वोटिंग के दिन सही और अपडेटेड जानकारी के साथ वोटर लिस्ट तैयार हो.
NVSP पोर्टल पर जाकर वोटर लिस्ट में अपना नाम ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. “Voter Helpline” ऐप से भी पता लगाया जा सकता है. स्थानीय BLO (Booth Level Officer) से संपर्क कर सकते हैं. साथ ही, सुधार/नामांकन के लिए Form-6, 7, 8 का उपयोग किया जा सकता है.
भारत का नागरिक कौन है? हम सब जो भी अपने आपको नागरिक मान रहे हैं, हमारे पास सबूत क्या है? सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले दस्तावेजों में से कोई भी नागरिकता का सर्टिफिकेट नहीं होता. वो सिर्फ एक दिलासा होता है. सभी दस्तावेजों का एक सुखद निचोड़.
जिन राज्यों में SIR का काम बाकी है वहां अगर इलेक्शन कमीशन अभी से इस प्रक्रिया में लग जाए तो चुनाव के समय शोर कम होगा, साथ ही राजनीतिक पार्टियों को भी आरोप लगाने के मौके कम मिलेंगे. यही नहीं प्रभावित व्यक्ति समय से अपील कर सकेंगे और अपना नाम जुड़वा सकेंगे. तब ये पूरी प्रक्रिया स्वस्थ रूप से मुकम्मल हो सकेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर तमाम सवालों को एक झटके में खत्म कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि एसआईआऱ की प्रक्रिया वैध और संवैधानिक है और चुनाव आयोग को इसे कराने का पूरा अधिकार है. अब इस फैसले पर सियासत उबल रही है.
आज सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग को SIR करने का संवैधानिक हक भी है और वैधानिक यानी कानूनी अधिकार भी है. कोर्ट ने कहा है कि देश का मतदाता कौन होगा ये चुनाव आयोग ही डिसाइड करेगा और इसके लिए वो नागरिकता का भी फैसला कर सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को संवैधानिक मान्यता दी है और चुनाव आयोग को मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का अधिकार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट से नाम हटना नागरिकता खत्म होने का प्रमाण नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अधिकार को बरकरार रखा है, जो निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक दायित्व को मजबूत करता है. कोर्ट ने बिहार के प्राचीन वैशाली और वज्जि गणराज्यों की लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लेख किया.
एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का फुल एंड फाइनल फैसला आ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर तमाम सवालों को एक झटके में खत्म कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि एसआईआऱ की प्रक्रिया वैध और संवैधानिक है और चुनाव आयोग को इसे कराने का पूरा अधिकार है.
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को संवैधानिक और वैध करार दिया है. अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची को निष्पक्ष और शुद्ध बनाने का अधिकार है.
Supreme court on SIR: सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है और यह मनमाना नहीं है. कोर्ट ने कहा है कि ये असंवैधानिक नहीं बल्कि कानूनी तौर पर सही है. कोर्ट ने क्या-क्या कहा? वकील से सुनिए.
सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है और यह मनमाना नहीं ह. कोर्ट ने कहा है कि ये असंवैधानिक नहीं बल्कि कानूनी तौर पर सही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करने का अधिकार है.
SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि SIR करवाना चुनाव आयोग का अधिकार है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग की शक्तियां बरकरार रहेगी. कोर्ट ने अपने फैसले में SIR की प्रक्रिया को वैध बताया है और साथ ही ये भी कहा कि निर्वाचन आयोग ने पूरी तरह से इस फैसले का पालन किया है.
SIR पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला देगी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अगुवाई वाली बैंच इस पर फैसला सुनाएगी. अदालत तय करेगी कि चुनाव आय़ोग को संविधान और जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत SIR करवाने का अधिकार है या नही. वहीं ईद से पहले धामी सरकार ने नया फैसला लेते हुए नैनीताल खेल के मैदान में ईद की नमाज की रद्द.
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के दौरान किसी भी योग्य मतदाता का वोट नहीं हटने दिया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि फर्जी वोट बनाने या वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की कोशिशों पर ‘आप’ कार्यकर्ता हर बूथ पर नजर रखेंगे. सीएम ने चुनाव आयोग से पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ प्रक्रिया पूरी करने की मांग की.
पश्चिम बंगाल और बिहार के बाद अब पंजाब में SIR की बारी है. 15 जून से पंजाब में SIR का काम शुरू हो जाएगा. पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने चुनाव से पहले SIR कराए जाने पर सवाल उठाए हैं. पंजाब में अगले साल चुनाव होने वाले हैं, और अरविंद केजरीवाल के लिए यह नई चुनौती है.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तीसरे चरण का शेड्यूल आ गया है. इसमें दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है. तीसरा फेज पूरा होते ही हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़ बाकी पूरा देश SIR के दायरे में आ जाएगा.
बंगाल चुनाव खत्म हो गया, लेकिन SIR पर सियासी और कानूनी संग्राम जारी है. टीएमसी इसे वोटरों की ‘सफाई’ नहीं, लोकतंत्र की ‘छंटनी’ बता रही है, जबकि चुनाव आयोग नियमों का हवाला दे रहा है. ये लड़ाई जीतना टीएमसी के लिए सिर्फ नैरेटिव ही नहीं, अस्तित्व की खातिर भी जरूरी है.
पश्चिम बंगाल में नई बीजेपी सरकार बनने के बाद मनोज अग्रवाल को राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है. 1990 बैच के IAS अधिकारी मनोज अग्रवाल IIT कानपुर से पढ़े हैं और उन्होंने खाद्य, वन, अग्नि और आपातकालीन सेवाओं जैसे विभागों में काम किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर वोटर लिस्ट से नाम हटने का असर किसी सीट के नतीजों पर पड़ा है तो संबंधित पक्ष नई याचिका दायर कर सकते हैं. सुनवाई में TMC ने कई सीटों पर असर का दावा किया.
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की 207 में से 95 सीटों और टीएमसी की 80 में से 44 सीटों पर SIR के तहत हटाए गए वोटर, जीत के अंतर से ज्यादा रहे.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले लगभग 10 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिसका टीएमसी ने विरोध जताया था. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए, वहां टीएमसी का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि कम कटौती वाले क्षेत्रों में टीएमसी को ज्यादा नुकसान हुआ.
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुल इलाकों में जमकर मतदान हुआ है. मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना जिलों में मतदान में 10% से लेकर 20% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.