स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) भारत के चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची (voter list) को अपडेट और शुद्ध करना होता है. “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” यह शब्द ना सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि इसका सीधा असर मतदाताओं पर पड़ता है.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) एक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को अपडेट करता है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि वोटिंग के दिन सही और अपडेटेड जानकारी के साथ वोटर लिस्ट तैयार हो.
NVSP पोर्टल पर जाकर वोटर लिस्ट में अपना नाम ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. “Voter Helpline” ऐप से भी पता लगाया जा सकता है. स्थानीय BLO (Booth Level Officer) से संपर्क कर सकते हैं. साथ ही, सुधार/नामांकन के लिए Form-6, 7, 8 का उपयोग किया जा सकता है.
ओडिशा में भीषण बाढ़ के कारण चुनाव आयोग ने SIR की समय-सीमा में बदलाव किया है. दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए दो हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया गया है, जिससे फाइनल वोटर लिस्ट 21 सितंबर को जारी होगी. 19 जिलों में बाढ़ से बिगड़े हालात के चलते राहत कार्य जारी हैं.
बेंगलुरु के देवरा जीवनहल्ली इलाके में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान सरकारी अधिकारियों से मारपीट का मामला सामने आया है. पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
मतदाता सूची में नाम हटने को लेकर फैली आशंकाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट की है. अदालत के अनुसार इसका असर केवल मतदान के अधिकार पर पड़ता है, न कि नागरिकता या सरकारी योजनाओं पर. इससे आम लोगों को राहत मिली है और भ्रम की स्थिति काफी हद तक दूर हुई है.
दिल्ली में एसआईआर का काम कर रही महिला शिक्षक के साथ चार लोगों ने गलत व्यवहार किया. शिकायत के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर उनको गिरफ्तार कर लिया है.
चुनाव आयोग (ECI) ने दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की टाइमलाइन में बदलाव कर दिया है. अब दिल्ली की फ़ाइनल इलेक्टोरल रोल 19 अक्टूबर को जारी की जाएगी. पहले इसे 7 अक्टूबर को प्रकाशित किया जाना था. इस बदलाव के साथ SIR प्रक्रिया के बाकी सभी चरण भी आगे खिसक गए हैं.
दिल्ली में SIR फॉर्म को लेकर सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन इस बात का है कि आखिर कौन-सा कॉलम किसे भरना है. अगर आपका नाम पुरानी SIR में था तो नियम अलग हैं, अगर नहीं था तो तरीका बदल जाता है. ऊपर से दस्तावेज, रिश्तेदार की डिटेल और फॉर्म जमा करने को लेकर भी कई सवाल हैं. इन्हीं उलझनों को दूर करने के लिए आजतक.इन ने नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के एक BLO और निगम पार्षद से बात की. उन्होंने आसान भाषा में पूरा प्रोसेस समझाया.
भारत में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हुआ है. चुनाव आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में नया प्रावधान जोड़ा है जिसमें आवेदकों को अपने या अपने माता-पिता के पिछले मतदाता सूची की डिटेल्स बतानी होगी. ऑनलाइन फॉर्म में ये नया सेक्शन अनिवार्य है, जबकि ऑफलाइन फॉर्म में ऐसी कोई शर्त नहीं है.
झारखंड के गढ़वा में SIR फॉर्म भरने के दौरान कथित तौर पर पैसे मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. ग्रामीणों ने BLO पर आरोप लगाए हैं, जबकि संबंधित BLO ने आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें साजिश बताया है. फिलहाल वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है.
शायद ही किसी ने सोचा हो कि बीजेपी भी कभी SIR प्रक्रिया के विरोध में खड़ी नजर आएगी. लेकिन, कर्नाटक में बिल्कुल ऐसा ही हुआ है. यहां तक कि चुनाव आयोग में शिकायत भी हो गई है. और, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी SIR के मुद्दे पर कर्नाटक के CM डीके शिवकुमार के रास्ते पर ही बढ़ रहे हैं.
INDIA ब्लॉक ने सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को एक चिट्ठी लिखकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब बीजेपी ने भी तीखा पलटवार किया है, जिससे सियासी पारा चढ़ गया है.
दिल्ली समेत महाराष्ट्र, कर्नाटक, मेघालय और झारखंड में चुनाव आयोग का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान शुरू हो गया है. इस अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर वोटर लिस्ट का सत्यापन करेंगे. इस वीडियो में जानिए SIR क्या है, BLO घर आए तो क्या करना होगा, फॉर्म कैसे भरें, कौन-कौन से दस्तावेज़ मान्य हैं, ऑनलाइन वेरिफिकेशन कैसे करें, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट कब आएगी और अगर नाम गलत हो जाए तो शिकायत कैसे करें. अगर आप वोटर हैं या पहली बार वोट डालने वाले हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है.
पंजाब सरकार ने 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, और शैक्षणिक प्रमाण पत्र सहित कई सरकारी दस्तावेजों पर लगने वाले सभी शुल्क माफ करने का फैसला किया है.
केंद्रीय मंत्री एच.डी कुमारस्वामी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया है. उन्होंने रामनगर में गड़बड़ी के वीडियो सबूत दिखाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. कुमारस्वामी ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वोटर बनाने का भी आरोप लगाया है.
दिल्ली में वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन सर्वे चल रहा है. बुधवार तक करीब 10 लाख फॉर्म बांटे जा चुके हैं और 32 हजार से ज्यादा फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं. यह दिल्ली के कुल वोटरों का करीब 7 प्रतिशत है. सबसे ज्यादा फॉर्म नॉर्थ ईस्ट जिले में बांटे गए जबकि डिजिटल करने में साउथ वेस्ट जिला आगे रहा. पुरानी दिल्ली में सबसे कम काम हुआ.
दिल्ली में चुनाव आयोग का Special Intensive Revision (SIR) अभियान शुरू हो गया है. अब वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन के लिए BLO घर-घर जाएंगे, लेकिन आप चाहें तो अपना SIR Enumeration Form ऑनलाइन भी भर सकते हैं. इस वीडियो में जानिए, SIR Form ऑनलाइन कैसे भरें? EPIC नंबर क्या होता है?
हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने की सोशल मीडिया अफवाहों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है. उन्होंने बताया कि नाम कटने की प्रक्रिया सिर्फ तय परिस्थितियों में और स्थानीय जांच के बाद ही होगी. मतदाता 21 अगस्त से 20 सितंबर तक आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं.
SIR पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का स्टैंड कांग्रेस लीडरशिप से थोड़ा अलग होना हैरान करने वाला है. डीके शिवकुमार के बयान से तो लग रहा है, जैसे वो राहुल गांधी की तरह एसआईआर के विरोध की जगह सपोर्ट कर रहे हों - डीके विपक्ष के पहले मुख्यमंत्री हैं जो SIR की कर्नाटक में सिफारिश कर रहे हैं.
तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा के कई गांवों में ग्रामीणों ने लंबित जमीन विवाद के समाधान तक SIR अभियान का बहिष्कार करने का ऐलान किया है.
भारत के 23 विपक्षी राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. इन दलों ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र भेजा है. विपक्ष ने SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
भारत का नागरिक कौन है? हम सब जो भी अपने आपको नागरिक मान रहे हैं, हमारे पास सबूत क्या है? सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले दस्तावेजों में से कोई भी नागरिकता का सर्टिफिकेट नहीं होता. वो सिर्फ एक दिलासा होता है. सभी दस्तावेजों का एक सुखद निचोड़.
जिन राज्यों में SIR का काम बाकी है वहां अगर इलेक्शन कमीशन अभी से इस प्रक्रिया में लग जाए तो चुनाव के समय शोर कम होगा, साथ ही राजनीतिक पार्टियों को भी आरोप लगाने के मौके कम मिलेंगे. यही नहीं प्रभावित व्यक्ति समय से अपील कर सकेंगे और अपना नाम जुड़वा सकेंगे. तब ये पूरी प्रक्रिया स्वस्थ रूप से मुकम्मल हो सकेगी.