बांग्लादेश ने एक बार फिर तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा उठाया है. बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शहीदुद्दीन चौधरी ने कहा है कि ढाका नहीं चाहता कि नई दिल्ली के रिश्ते खराब हों, लेकिन भारत को बांग्लादेश के हितों को भी समझना होगा. उन्होंने कहा कि एक दोस्त को दूसरे दोस्त के हित का भी ध्यान रखना चाहिए.
ढाका में एक सेमिनार के दौरान मंत्री ने कहा कि भारत की अपनी जरूरतें हैं, लेकिन बांग्लादेश की भी अपनी जरूरतें हैं.उन्होंने साफ किया कि बांग्लादेश तीस्ता विवाद के कारण दोनों देशों के संबंध में किसी तरह की खटास नहीं चाहता. तीस्ता नदी भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश पहुंचती है.
बांग्लादेश के उत्तरी इलाकों में खेती और लोगों की रोजी-रोटी के लिए यह नदी बेहद जरूरी है. वहीं, पश्चिम बंगाल में भी सिंचाई और दूसरी जरूरतों के लिए तीस्ता के पानी की अहम भूमिका है. इसी बीच बांग्लादेश चीन के सहयोग से तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहा है.
इस परियोजना का मकसद बाढ़, नदी के कटाव और सूखे के मौसम में पानी की कमी जैसी समस्याओं से निपटना है. शहीदुद्दीन के मुताबिक, उत्तरी बांग्लादेश के पांच से छह जिलों के लोगों को इस परियोजना से काफी उम्मीदें हैं. तीस्ता पर बात करते हुए उन्होंने इस परियोजना को एक बड़ी चुनौती बताया.
उन्होंने कहा कि "पांच-छह उत्तरी जिलों के लोगों को इससे बहुत उम्मीदें हैं, क्योंकि वे सालों से नदी कटाव और अन्य समस्याओं से परेशान हैं.अगर हम इसे लागू करने में असफल रहे, तो उन क्षेत्रों के परिवारों की समस्याएं और बढ़ती जाएंगी. हमें इस चुनौती को किसी भी तरह से पार करना ही होगा.”
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क्या है तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा?
तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों से चर्चा में है. 1983 में एक अंतरिम व्यवस्था के तहत भारत को 39 प्रतिशत और बांग्लादेश को 36 प्रतिशत पानी देने का प्रस्ताव था, जबकि 25 प्रतिशत पानी बिना बंटवारे के रखा गया था. 2011 में एक नए अंतरिम समझौते का मसौदा तैयार हुआ, लेकिन पश्चिम बंगाल की आपत्तियों के कारण यह आगे नहीं बढ़ सका.अब बांग्लादेश इस मुद्दे पर समझौते के साथ-साथ नदी के व्यापक विकास की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहता है.
जून में बीजिंग दौरे के दौरान प्रधानमंत्री तारीक रहमान ने चीन के नेतृत्व से इस परियोजना की तकनीक का अध्ययन तेज करने को लेकर बातचीत की थी. हालांकि भारत ने भी कहा है की तीस्ता से जुड़े सभी पहलुओं पर संबंधित पक्षों (पश्चिम बंगाल) से बातचीत जरूरी है.