संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. प्रीलिम्स परीक्षा में पूछे गए 8 सवालों को 'गलत और त्रुटिपूर्ण' बताते हुए उम्मीदवारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) ने सोमवार को UPSC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
क्या है पूरा विवाद?
परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों का आरोप है कि जनरल स्टडीज (GS Paper-1, Set A) के 8 सवालों में गंभीर खामियां हैं.
गलत उत्तर और ऑप्शन गायब: कुछ सवालों के जवाब आयोग की प्रोविजनल आंसर-की (Answer Key) में सरकारी आंकड़ों से अलग हैं, तो कुछ सवालों में दिए गए चारों विकल्पों में से एक भी सही नहीं है.
आउट ऑफ सिलेबस सवाल: कुछ सवाल तय पाठ्यक्रम से बाहर के पूछे गए हैं.
कौन-कौन से सवाल हैं विवाद में? याचिकाकर्ताओं ने सेट-ए के सवाल नंबर 7, 11, 45, 60, 62, 82, 86 और 96 पर आपत्ति जताई है.
छात्रों की क्या है मांग?
उम्मीदवारों की तरफ से वकील शांतनु जुगतावत ने पक्ष रखा. छात्रों ने ट्रिब्यूनल से मांग की है कि आयोग यह सार्वजनिक करे कि छात्रों की आपत्तियों पर क्या फैसला लिया गया. अगर आपत्तियां खारिज हुईं, तो उसका सही कारण बताया जाए. इन विवादित 8 सवालों को या तो ठीक किया जाए या मूल्यांकन (Evaluation) से बाहर (Delete) किया जाए.
उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने मई में आंसर-की आने के बाद आधिकारिक पोर्टल और ईमेल के जरिए सबूतों के साथ आपत्तियां भेजी थीं. लेकिन आयोग ने बिना कोई जवाब दिए रिजल्ट घोषित कर दिया.
कटऑफ और मेन्स परीक्षा पर कितना पड़ेगा असर?
छात्रों का दावा है कि नेगेटिव मार्किंग को मिलाकर इन 8 सवालों का असर करीब 16 से अधिक नंबरों पर पड़ रहा है. कटऑफ के लिहाज से 16 नंबर बहुत बड़ा अंतर पैदा करते हैं, जिससे कई योग्य छात्र मेन्स परीक्षा की रेस से बाहर हो गए हैं. ट्रिब्यूनल ने फिलहाल इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 8 अक्टूबर 2026 तय की है. अब देखने वाली बात यह होगी कि UPSC ट्रिब्यूनल में अपना क्या जवाब दाखिल करता है.