दुनिया के दो छोर पर महीनों से चल रही दो बड़ी लड़ाइयां अब और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी हैं. एक तरफ रूस-यूक्रेन का टकराव सीमा लांघकर पूरे यूरोप में तनाव बढ़ा रहा है. दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच थमा हुआ संघर्ष अचानक दोबारा भड़क उठा है. दोनों मोर्चों पर जिस तेजी से हालात बिगड़े हैं, उसने तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है.
शांति की तमाम कोशिशों के बीच बारूद की चिंगारी अब शोला बनती दिख रही है. एक तरफ यूक्रेन रूसी इलाकों के भीतर ड्रोन हमलों का दायरा बढ़ाने पर तुला है. दूसरी तरफ जर्मनी ने लीपजिग एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की साजिश का ठीकरा सीधे रूस पर फोड़ा है. पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच मिसाइलों से जवाबी प्रहार तेज हो चुके हैं. 31 अगस्त को SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत में कहा था कि दुनिया को अब 'अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत' की तरफ बढ़ना होगा. मगर जमीनी हालात इसके उलट दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं.
यूक्रेन का रूसी आसमान पर अलर्ट
यूक्रेन में जंग अब सिर्फ सीमाई मोर्चों तक सीमित नहीं रह गई है. 1 सितंबर को कीव के एक रेलवे डिपो पर रूसी बैलिस्टिक मिसाइल गिरने से छह रेलकर्मियों की जान चली गई. इसके बाद युक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस, यात्रियों और बीमा कंपनियों को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि यूक्रेन रूसी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले करने जा रहा है. ऐसे में रूसी एयरस्पेस (हवाई सीमा) में उड़ान भरना अब जोखिम से खाली नहीं है.
इस चेतावनी पर पुतिन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे सीधे 'सरकारी आतंकवाद का ऐलान' बताया. रूस 26 अगस्त से यूक्रेन के अहम बुनियादी ढांचे (बिजली, पानी और परिवहन नेटवर्क) पर लगातार हमले कर रहा है. यानी अब दोनों देश एक-दूसरे के सीमाई इलाकों से आगे बढ़कर अंदरूनी हिस्सों को भी निशाना बना रहे हैं.
जर्मनी में एयरपोर्ट पर ड्रोन साजिश
यूरोप का तापमान तब चढ़ा जब जर्मनी ने लीपजिग एयरपोर्ट पर खड़े यूक्रेनी मालवाहक विमान को निशाना बनाने की साजिश में मॉस्को का हाथ बताया. जांच में संकेत मिले कि रूसी तंत्र ने जमीनी जासूसों को नो-हाउ (तकनीकी हुनर) के साथ उपकरण मुहैया कराए थे. जवाब में बर्लिन ने बॉन स्थित रूसी वाणिज्य दूतावास को बंद करने, रूसी सांस्कृतिक केंद्र को खाली कराने का फैसला लिया है.
इस विवाद में नाटो जर्मनी की ढाल बनकर खड़ा हो गया है. नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने साफ किया कि पूरा गठबंधन बर्लिन के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है. सदस्य देशों को डराने की रूसी रणनीति कभी सफल नहीं होगी. यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने भी नए यूरोपीय प्रतिबंधों की तैयारी शुरू कर दी है. इस टकराव ने नाटो-रूस के बीच सीधी भिड़ंत का अंदेशा बढ़ा दिया है.
खाड़ी में मिसाइल वार: अमेरिका और ईरान आमने-सामने
पश्चिम एशिया में महीने भर का युद्ध-विराम टूट चुका है. 1 सितंबर को अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी कार्रवाई में ईरानी रडार सिस्टम पूरी तरह बर्बाद हो गए. इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, जॉर्डन में बने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागी हैं.
ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में रिहायशी इलाके, एक नागरिक हवाई अड्डा, शादी का घर तबाह हुए हैं. तेहरान ने बेहद विनाशकारी पलटवार की धमकी दी है. वहीं अमेरिका ने भी चेताया है कि किसी भी नई हिमाकत का जवाब इससे भी बड़े सैन्य प्रहार से दिया जाएगा.
दो मोर्चे, एक जैसी चिंता
रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान का तनाव अभी औपचारिक रूप से महाशक्तियों के सीधे महायुद्ध में तब्दील नहीं हुआ है. मगर दोनों ही मोर्चों पर संयम बरतने की गुंजाइश लगातार खत्म हो रही है. एक भी भटकी हुई मिसाइल, अनियंत्रित ड्रोन या गलत निशाना पूरे हालात को बेकाबू कर सकता है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस आग को सीमा के भीतर बुझाया जा सकेगा, या ये चिंगारियां पूरी दुनिया को अपनी लपेट में ले लेंगी.