क्रिकेट जगत में कुछ बल्लेबाज ऐसे रहे हैं, जिनकी प्रतिभा उनके इंटरनेशनल आंकड़ों से कहीं ज्यादा बड़ी रही. इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर मार्क रामप्रकाश भी इसी सूची में आते हैं. काउंटी क्रिकेट में उन्होंने वर्षों तक रनों का अंबार लगाया, शतकों के रिकॉर्ड बनाए और दुनिया के सबसे भरोसेमंद घरेलू बल्लेबाजों में अपनी जगह बनाई. लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा. रामप्रकाश 5 सितंबर (शुक्रवार) को 57 साल के हो गए.
मार्क रामप्रकाश का जन्म इंग्लैंड में हुआ था, लेकिन उनका भारत से तगड़ा कनेक्शन है. रामप्रकाश के पिता देवनरेन रामप्रकाश इंडो-गयानी मूल के हैं. देवनरेन के पूर्वज भारत से जाकर गुयाना में बसे थे. रामप्रकाश ने महज 17 साल की उम्र में मिडिलसेक्स के लिए अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था. जल्द ही वह इंग्लैंड की अंडर-19 टीम की कप्तान बने. उनकी तकनीक बेहद मजबूत थी और बल्लेबाजी में वह ऐसी एकाग्रता दिखाते थे, जो उन्हें खास बनाती थी. इसके बावजूद रामप्रकाश इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी पहचाने बनाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे.
मार्क रामप्रकाश ने 1991 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया. शुरुआती सीरीज में उनके प्रदर्शन ने संकेत दिया कि इंग्लैंड को एक लंबे समय तक चलने वाला शानदार बल्लेबाज मिल सकता है. लेकिन इसके बाद उनका करियर उतार-चढ़ाव से भर गया. कभी वह टीम में स्थायी जगह बनाने के करीब पहुंचते, तो कभी चयनकर्ताओं का भरोसा खो देते. 1997-98 में ब्रिजटाउन में वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी 154 रनों की पारी को करियर का टर्निंग पॉइंट माना गया. लगा कि अब रामप्रकाश इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान मजबूत कर लेंगे, लेकिन यह उम्मीद भी ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी.
बस ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चमक सके
मार्क रामप्रकाश का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ प्रदर्शन हमेशा बेहतर रहा. उन्होंने कंगारुओं के खिलाफ 42.40 की औसत से टेस्ट क्रिकेट में रन बनाए. 2001 में द ओवल में उन्होंने 133 रनों की शानदार पारी खेली. यह इंग्लैंड की जमीन पर उनका पहला टेस्ट शतक था. लेकिन इसके बाद भारत और न्यूजीलैंड के दौरे पर उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और इंग्लिश टीम से उनकी छुट्टी हो गई. इस तरह ओवल का शतक उनके टेस्ट करियर की शानदार वापसी की शुरुआत बनने के बजाय लगभग विदाई पारी साबित हुआ.
टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष के ठीक उलट काउंटी क्रिकेट में मार्क रामप्रकाश का बल्ला लगातार बोलता रहा. उन्होंने मिडिलसेक्स और सरे के लिए हजारों रन बनाए और घरेलू क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई. 2006 और 2007 के सीजन में उनकी बल्लेबाजी औसत 100 से ऊपर रही. 2006 में सरे के लिए उन्होंने अकेले 2278 रन ठोक दिए. यह ऐसा प्रदर्शन था, जिसने दिखाया कि रामप्रकाश में कितनी जबरदस्त बैटिंग क्षमता थी.

2008 में उन्होंने अपने करियर की सबसे खास उपलब्धियों में से एक हासिल की. तब मार्क रामप्रकाश 100 फर्स्ट क्लास शतक पूरे करने वाले बल्लेबाजों के विशिष्ट क्लब में शामिल हुए थे. 99 शतकों पर रुकने के बाद जब उन्होंने आखिरकार 100वां शतक पूरा किया, तो उनके बल्ले ने फिर रफ्तार पकड़ ली.
ऐसा रहा रामप्रकाश का करियर
मार्क रामप्रकाश ने कुल मिलाकर इंग्लैंड के लिए 52 टेस्ट और 18 ओडीआई मुकाबले खेले. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 27.32 की औसत से 2350 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 12 अर्धशतक शामिल रहे. वहीं वनडे इंटरनेशनल में उनके नाम पर 26.85 के एवरेज से 376 रन दर्ज हैं.
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में मार्क रामप्रकाश ने 461 मुकाबले खेलकर 35659 रन बनाए. इस दौरान उनका औसत 53.14 रहा. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में रामप्रकाश ने 114 शतक और 147 अर्धशतक जड़े. लिस्ट-ए आंकड़े भी रामप्रकाश के काफी दमदार हैं, जहां उनके नाम पर 407 मैचों में 40.22 के एवरेज से 13273 रन दर्ज हैं. लिस्ट-ए क्रिकेट में रामप्रकाश ने 17 शतक और 85 अर्धशतक लगाए.
मार्क रामप्रकाश की कहानी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रही. 2006-07 में उन्होंने BBC के लोकप्रिय डांस शो स्ट्रिक्टली कम डांसिंग (Strictly Come Dancing) में हिस्सा लिया. क्रिकेट में दबाव के बीच अक्सर जूझते नजर आए रामप्रकाश ने डांस फ्लोर पर अपनी झिझक को पीछे छोड़ दिया. उन्होंने फाइनल में साल्सा पर शानदार प्रदर्शन किया और चारों जजों से 10/10 अंक हासिल किए. यह उनके व्यक्तित्व का दूसरा पहलू था, जहां उन्होंने बड़े मंच के दबाव का बेहतरीन तरीके से सामना किया.
मार्क रामप्रकाश ने 2012 के सीजन में अपने 25 साल लंबे फर्स्ट क्लास करियर पर विराम लगाया था. घरेलू क्रिकेट में वह रनों की मशीन थे, जबकि इंग्लैंड की टेस्ट टीम में उनकी जगह कभी पक्की नहीं हो सकी.