रूस के डिप्टी प्रधानमंत्री ने भारत से रूस तक रेल सेवा शुरू करने के विचार पर बात की है. मरात खुसनुलिन ने कहा है कि रूस को हिंद महासागर तक रेलवे मार्ग बनाने की संभावनाएं तलाशनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे होर्मुज स्ट्रेट और बोस्फोरस स्ट्रेट जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील समुद्री रास्तों पर रूस की निर्भरता कम की जा सकेगी.
खुसनुलिन का यह बयान वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के बीच आया है, जिसने होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली जहाजों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है. सामान्य स्थिति में दुनिया की करीब पांचवीं ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है.
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS से गुरुवार को बातचीत में खुसनुलिन ने कहा कि हिंद महासागर तक रेल संपर्क की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के कारण वैकल्पिक रास्तों की जरूरत पड़ सकती है. उन्होंने तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर गुजरने वाले रास्तों का जिक्र किया. खुसनुलिन ने कहा कि भारत तक पहुंच देने वाला कोई भी विकल्प स्वीकार्य है.
पाकिस्तान से होकर गुजरेगा मार्ग
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है, जबकि बोस्फोरस स्ट्रेट काला सागर को मरमारा सागर से जोड़ता है. बोस्फोरस पर तुर्की का नियंत्रण है. बढ़ती चिंताओं के बीच तुर्की ने कहा है कि यह रास्ता खुला है. यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब रूस को अपने एनर्जी निर्यात को लेकर पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिकी सीनेट ने 29 जुलाई को ऐसे कानून को आगे बढ़ाया था, जिसके तहत भारत समेत उन देशों पर भारी शुल्क लगाया जा सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं.
रूस के इस प्रस्ताव के व्यापक भू-राजनीतिक असर भी हो सकते हैं. संभावित रेलवे मार्ग ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर गुजर सकता है और रूस को हिंद महासागर तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक जमीनी संपर्क मिल सकता है.