यूपी के मुरादाबाद में इन दिनों रात होते ही गांवों में सन्नाटा कुछ ज्यादा गहरा जाता है. वजह है तेंदुआ... खेतों और गांव के आसपास लगातार उसकी मौजूदगी से लोग डरे हुए हैं. अब ठाकुरद्वारा इलाके के बहापुर बलिया गांव से जो खबर आई है, उसने इस डर को और बढ़ा दिया है.
शुक्रवार की रात करीब 40 साल के किसान जगराज सिंह घर के बाहर सो रहे थे. रात में किसी वक्त एक तेंदुआ कथित तौर पर उन्हें उठा ले गया. परिवार और आसपास के लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी. सुबह जब ग्रामीण खेतों की तरफ पहुंचे तो वहां जगराज सिंह का शव पड़ा था.
शव की हालत देखकर लोगों के होश उड़ गए. ग्रामीणों के मुताबिक, शरीर पर तेंदुए के हमले के निशान थे और उसे बुरी तरह नोचा गया था. देखते ही देखते खबर पूरे गांव में फैल गई. मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और परिवार में चीख-पुकार मच गई.

जगराज सिंह की मौत कोई पहली घटना नहीं है. बहापुर बलिया गांव में तेंदुए के हमले से यह तीसरी मौत बताई जा रही है. इससे पहले भी इसी गांव में दो महिलाओं की जान जा चुकी है.
25 अगस्त को 52 साल की मिथलेश देवी खेत में काम कर रही थीं. इसी दौरान तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया. हमले में उनकी मौत हो गई. जिस रास्ते से लोग रोज गुजरते थे, वहां जाने से पहले भी अब कई बार सोच रहे हैं.
ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र की बात करें तो तेंदुए के हमलों में अब तक चार लोगों की मौत की बात सामने आई है. इनमें तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं.
हमलों की लगातार सामने आ रही खबरों ने आसपास के गांवों में भी डर पैदा कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि रात में अकेले घर से निकलना तो दूर, दिन में भी खेतों की तरफ जाने में डर लग रहा है. किसानों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि खेत का काम रोक नहीं सकते. पशुओं के लिए चारा भी लाना है और फसल की देखभाल भी करनी है. लेकिन हर बार खेत की तरफ जाते हुए यह डर बना रहता है कि कहीं तेंदुआ सामने न आ जाए.
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रात में गांवों की गलियों और खेतों के आसपास लोगों की आवाजाही भी कम हो गई है. कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं. लगातार हो रहे हमलों के बाद वन विभाग की टीमें इलाके में निगरानी कर रही हैं. तेंदुए को तलाशने और पकड़ने के लिए थर्मल ड्रोन, ट्रैप कैमरों और पिंजरों की मदद ली जा रही है.
पुलिस और वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को भी सावधानी बरतने के लिए कहा गया है. लोगों से अकेले खेतों की तरफ न जाने और सतर्क रहने की अपील की जा रही है. इलाके में पहले भी कई तेंदुओं को रेस्क्यू किया जा चुका है. लेकिन इसके बावजूद हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. यही वजह है कि ग्रामीणों का गुस्सा भी बढ़ रहा है. उनका कहना है कि जब लगातार लोगों की जान जा रही है तो तेंदुए को पकड़ने की कार्रवाई और तेज होनी चाहिए.
अब सवाल सिर्फ तेंदुए का नहीं, गांव की सुरक्षा का है
एक तरफ वन विभाग तेंदुए की तलाश में जुटा है, दूसरी तरफ ग्रामीण अपने रोजमर्रा के काम को लेकर परेशान हैं. खेत में जाना है तो डर, रात में बाहर निकलना है तो डर और घर के बाहर सोना तो अब लगभग खतरे से खाली नहीं माना जा रहा.
जगराज सिंह की मौत ने इस डर को और गहरा कर दिया है. क्योंकि इस बार हमला खेत में काम करते वक्त नहीं, बल्कि घर के बाहर सोते समय होने की बात सामने आई है. बहापुर बलिया और आसपास के गांवों के लोगों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है- आखिर इस तेंदुए को कब पकड़ा जाएगा और कब गांव के लोग बिना डर के अपने घरों और खेतों में लौट पाएंगे?