
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर के कुंभी में स्थापित हो रही बायो पॉलीमर प्लांट की मशीन फिलहाल वाराणसी पहुंच चुकी है. वाराणसी के राजातालाब रिंग रोड से होते हुए 'महाबली' ट्रक पर रखी हुई मशीन लखीमपुर के लिए रवाना होगी. इस भारी भरकम ट्रक और इस पर रखी विशाल मशीन को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है. हर कोई यह जानना चाहता है कि इतनी विशालकाय मशीन कहां से कहां और क्यों जा रही है? आज हम आपको इस विशालकाय मशीन और इसके यूरोप से उत्तर प्रदेश तक पहुंचाने की अनकही कहानी बताने जा रहे हैं. हम आपको यह बताएंगे कि भारी भरकम ट्रक पर रखकर इस विशालकाय मशीन को आगे किस रूट से लखीमपुर के कुंभी तक पहुंचाया जाएगा. साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि इस भारी भरकम मशीन को कौन सी कंपनी लखीमपुर तक पहुंचाने का जिम्मा संभाल रही है और कौन है वह शख्स जिसकी अगुवाई में यह पूरा ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
दरअसल, प्रदेश के लखीमपुर खीरी के कुंभी में बलरामपुर शुगर मिल में एक बायोपॉलीमर प्लांट स्थापित किया जा रहा है. जानकारी के अनुसार यह देश का पहला और सबसे बड़ा बायो पॉलीमर प्लांट है जहां बड़े पैमाने पर बायोप्लास्टिक का निर्माण किया जाएगा. इस प्लांट को स्थापित करने के लिए ही सायक्लाजेसन रिएक्टर नाम की यह मशीन बेल्जियम से भारत लाई जा रही है.

बेल्जियम से समुद्री मार्ग से चलते हुए यह मशीन ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर पहुंची थी. जहां से सड़क मार्ग से झारखंड बिहार होते हुए इसे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर लाया जा रहा है. फिलहाल , यह मशीन वाराणसी जिले में प्रवेश कर चुकी है.
लखीमपुर तक के इसके रूट की अगर हम बात करें तो वाराणसी के राजातालाब रिंग रोड से होकर इस सैकड़ों पहिए वाले ट्रक को गाजीपुर, गोरखपुर, बस्ती और बलरामपुर होते हुए लखीमपुर के कुंभी ले जाया जाएगा. इस भारी भरकम मशीन को यूरोप से भारत लाने की जिम्मेदारी निभा रही कंपनी का नाम जे.एम बक्शी हैवी कंपनी है.

बताया जा रहा है कि यह भारत की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक कंपनियों में एक है और इसी कंपनी के कर्मचारी इस भारी भरकम मशीन को लेकर चल रहे हैं. ओडिशा के पारादीप से इस मशीन को लेकर निकले हुए ट्रक को अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए तकरीबन 62 से ज्यादा कर्मचारियों की टीम साथ-साथ चल रही है. इस मल्टी एक्सल ट्रक को खींचने के लिए तीन एक्स्ट्रा इंजन भी साथ-साथ चल रहे हैं. समतल इलाकों में तो एक ही इंजन इसे खींच रहा है लेकिन अगर ऊंचाई पर चढ़ता है तो एक से अधिक इंजन का भी सहारा लिया जा रहा है.
इस विशालकाय मशीन को यूरोप से ओडिशा होते हुए लखीमपुर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाले जे.एम बक्शी हैवी लॉजिस्टिक कंपनी के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर अनेक भारती बताते हैं कि मशीन को बेल्जियम से यूपी तक लाने में अब तक कुल 6 महीने का वक्त लग चुका है. जिसमें तकरीबन 4 महीने का वक्त तो ओडिशा के बंदरगाह से यहां तक पहुंचने में लगा है. 6 महीने के इस वक्त में वह समय भी शामिल है जिसमें तमाम तरह की कागजी कार्यवाहियां और परमीशन आदि लेने में वक्त लगा.

अनेक भारती ने आगे बताया कि सीनियर लेवल के अधिकारियों को अगर छोड़ दिया जाए तो इस टीम के साथ चल रहे कंपनी के अधिकांश कर्मचारियों का पिछले कई महीनो से अस्थाई घर यह विशालकाय ट्रक ही बना हुआ है. अनेक भारती के अनुसार इस मशीन को पारादीप बंदरगाह से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर तक पहुंचाने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने पहले ही रास्ता और उसमें आने वाली बाधाओं को चिन्हित कर लिया था. उन्होंने बताया कि अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा अगले दो से तीन सप्ताह में हम लोग लखीमपुर तक पहुंच जाएंगे.