विराट कोहली अब सिर्फ शतक नहीं बना रहे, बल्कि खुलकर बल्लेबाजी कर रहे हैं. वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 गेंदों में नाबाद 139 रन, 9 छक्के और 50 गेंद बाकी रहते भारत को जीत दिलाने वाली पारी को सिर्फ उनके 55वें वनडे शतक के आंकड़े में समेटना नाइंसाफी होगी. यह पारी उस विराट की वापसी का संकेत है, जो मौका मिलते ही गेंदबाजों पर टूट पड़ता था और बड़े शॉट खेलने से कभी नहीं घबराता था.
37 साल की उम्र में विराट ने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उसमें अनुभव तो था ही, लेकिन उससे ज्यादा बेफिक्री थी. हर गेंद को सम्मान देने वाला विराट नहीं, मौका मिलते ही गेंद को स्टैंड में पहुंचाने वाला विराट नजर आया. 9 छक्के इसका सबसे बड़ा सबूत हैं. उनके वनडे करियर में एक पारी में इससे ज्यादा छक्के पहले कभी नहीं आए थे.
और शायद यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है.
टेस्ट गया, तो विराट का ‘डिफेंस’ भी गया!
टेस्ट क्रिकेट से विदाई के बाद विराट के पास अब भारत के लिए सिर्फ वनडे क्रिकेट बचा है. इसका असर उनकी बल्लेबाजी में साफ दिख रहा है. वह अब शुरुआत में ही जोखिम लेने से नहीं घबरा रहे.
2025 से पहले वनडे में अपनी पारी की पहली 10 गेंदों पर विराट का स्ट्राइक रेट 72 के आसपास था. अब यह 100 के पार पहुंच चुका है. यानी शुरुआती गेंदों में विराट का रवैया ही बदल गया है.
पहले वह पारी को पढ़ते थे, फिर गेंदबाज को पढ़ते थे और उसके बाद हमला करते थे. अब लगता है कि गेंदबाज को पढ़ने का इंतजार कम है, हमला पहले है.
The bat raise, the roar, the milestone 👏👏
— BCCI (@BCCI) September 27, 2026
A Virat Kohli show in Thiruvananthapuram 🍿
Updates ▶️ https://t.co/O2cs86p4gq#TeamIndia | #INDvWI | @mflone_ | @imVkohli pic.twitter.com/7pW58tYKeJ
विराट अब पारी बनाने नहीं, पारी पर हमला करने निकल रहे हैं.
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में इस बदले हुए अंदाज की पहली झलक मिली थी. वेस्टइंडीज के खिलाफ यह पूरी तस्वीर बनकर सामने आ गई. 88 गेंद में 139 रन सिर्फ तेजी का आंकड़ा नहीं है. यह मानसिक बदलाव का आंकड़ा भी है.
100 शतक की चर्चा फिर क्यों?
विराट का कुल अंतरराष्ट्रीय शतक अब 86 हो गया है. 100 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए 14 शतक और चाहिए. वह अब सिर्फ वनडे खेल रहे हैं और मौजूदा कार्यक्रम को देखें तो उनके पास सीमित मौके हैं.
यहीं से 100 शतकों की चर्चा शुरू होती है.
अजिंक्य रहाणे ने क्रिकबज से बातचीत में कहा कि अगर विराट कोहली ने 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों का लक्ष्य अपने दिमाग में बैठा लिया, तो वह इस मुकाम तक पहुंच सकते हैं. रहाणे की बात में विराट के क्रिकेट की एक पुरानी तस्वीर भी छिपी है. विराट पर सबसे ज्यादा दबाव किसी और का नहीं, खुद विराट का होता है और यही दबाव अक्सर उनके अंदर के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज को बाहर निकालता है. 100 शतकों का आंकड़ा अगर उनके दिमाग में है, तो यह दबाव उनके लिए बोझ से ज्यादा ईंधन बन सकता है.
रहाणे ने यह भी कहा कि किसी खिलाड़ी का माइलस्टोन के बारे में सोचना अपने आप में स्वार्थी होना नहीं है. विराट के मामले में तो उनके आदर्श ही सचिन तेंदुलकर रहे हैं, जिन्होंने 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों का वह आंकड़ा छुआ है, जहां आज तक कोई और नहीं पहुंचा.
तो क्या विराट 100 के बारे में सोच रहे होंगे?
संभव है. लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विराट अब 100 शतकों के लिए खेल रहे हैं? रविवार की पारी देखकर जवाब कुछ और नजर आता है.
रिकॉर्ड पीछे है, विराट आगे
विराट ने खुद कई बार कहा है कि वह व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिए नहीं खेलते. यह बात उनके आलोचकों को विरोधाभास लग सकती है. लेकिन क्रिकेट में माइलस्टोन और लक्ष्य के बीच फर्क होता है.
आप 100 शतक का सपना देख सकते हैं, लेकिन हर पारी में 100वें शतक के बारे में सोचकर बल्लेबाजी नहीं कर सकते. विराट की सबसे बड़ी ताकत यही रही है कि जब वह मैदान पर उतरते हैं तो सामने मौजूद गेंद और परिस्थिति उनके लिए सबसे बड़ा लक्ष्य बन जाती है.
यही वजह है कि 100 शतकों की चर्चा के बीच रविवार की पारी में कहीं ऐसा नहीं लगा कि विराट किसी आंकड़े के पीछे भाग रहे हैं.
वह गेंद के पीछे भाग रहे थे. फर्क समझिए. अगर 100 शतक उनका लक्ष्य है तो यह लक्ष्य उन्हें रोकना नहीं...और ज्यादा आक्रामक बना सकता है. क्योंकि विराट के क्रिकेट करियर में खुद पर दबाव डालना कोई नई बात नहीं है. उन्होंने अपनी महानता का बड़ा हिस्सा इसी आत्म-दबाव से बनाया है.
सचिन का रिकॉर्ड, विराट की अपनी कहानी
100 अंतरराष्ट्रीय शतक का आंकड़ा इसलिए भी विराट के लिए खास है क्योंकि उसके सामने सचिन तेंदुलकर खड़े हैं. सचिन उनके आदर्श रहे हैं और अब वही आंकड़ा विराट के सामने है. लेकिन यहां तुलना का एक बड़ा फर्क है.
सचिन ने टेस्ट और वनडे दोनों में मिलाकर 100 शतक बनाए. विराट अब टेस्ट क्रिकेट छोड़ चुके हैं. यानी उनका रास्ता ज्यादा छोटा और मुश्किल है.
14 शतक बाकी हैं और समय सीमित है.
इसलिए विराट की अगली कहानी शतकों की संख्या से ज्यादा उनकी फिटनेस, फॉर्म और वनडे कार्यक्रम की कहानी होगी. उन्हें हर सीरीज में बड़ी पारियां खेलनी होंगी. हर पारी शतक में बदलना जरूरी नहीं, लेकिन जिस तरह की शुरुआत उन्होंने अब करनी शुरू की है, उससे उनके पास बड़े स्कोर तक पहुंचने के मौके जरूर बढ़ते हैं.
Moment for the history books 📖
— BCCI (@BCCI) September 27, 2026
The magical feeling of scaling Mt. 1⃣5⃣0⃣0⃣0⃣ ODI runs, ft. Virat Kohli 🏔️
Updates ▶️ https://t.co/O2cs86p4gq#TeamIndia | #INDvWI | @mflone_ | @imVkohli pic.twitter.com/sbqA6KtBsr
असली बदलाव स्कोरबोर्ड पर नहीं, दिमाग में है
विराट की बल्लेबाजी का सबसे बड़ा बदलाव शायद 9 छक्के नहीं हैं. बदलाव यह है कि अब वह शुरुआत में खुद को रोकते हुए नजर नहीं आते.
एक समय विराट की बल्लेबाजी में जोखिम का मतलब विकेट गंवाने का खतरा था. अब शायद वह जोखिम को रन बनाने का रास्ता मान रहे हैं.
और यही वजह है कि 37 साल की उम्र में भी विराट की बल्लेबाजी पुरानी कहानी दोहराने की बजाय नई कहानी लिखती दिख रही है.
पहले विराट रिकॉर्ड बनाते थे और रिकॉर्ड उनके पीछे भागते थे. अब विराट रिकॉर्ड के पीछे भागेंगे या नहीं, यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना साफ है कि उनका बल्ला फिर से गेंदबाजों के पीछे दौड़ रहा है.
100 शतक अभी 14 कदम दूर है. करीब 30 वनडे का अनुमानित रास्ता सामने है. मंजिल कितनी दूर है, यह भविष्य बताएगा. लेकिन रविवार की रात विराट ने एक बात जरूर बता दी- 100 शतक की भूख हो या न हो, विराट के बल्ले की भूख अभी बाकी है.