scorecardresearch
 

मुलायम से योगी तक... 32 साल में 5 बार बदला भदोही का नाम, जानें जिले की सियासी कहानी

उत्तर प्रदेश की सियासत में जिलों के नाम बदलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन भदोही की कहानी कुछ अलग है, कालीन के लिए दुनिया भर में पहचान रखने वाला यह जिला पिछले तीन दशक में कई बार अपनी प्रशासनिक पहचान बदल चुका है.

Advertisement
X
भदोही की नाम वाली सियासत (Photo-ITG)
भदोही की नाम वाली सियासत (Photo-ITG)

कालीन नगरी भदोही की पहचान एक बार फिर बदल गई है, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को ऐलान किया कि अब भदोही जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा. खास बात यह है कि पिछले करीब 32 साल में जिले का नाम पांचवीं बार बदला है. ऐसे में भदोही का नाम सिर्फ नक्शे पर बदलती पहचान नहीं, बल्कि यूपी की बदलती सियासत का भी आईना रहा है.

काशी नगरी से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर बसे भदोही को पहली बार 1994 में नया जिला बनाया गया था, उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश को एक नए जिले की सौगात दी थी. करीब 3 सालों तक भदोही के नाम से पहचान बनाने वाले इस जिले को मायावती ने अपने कार्यकाल में नया नाम दे दिया. 1997 में मायावती ने इसका नाम बदलकर संत रविदास नगर रखा. 1999 में जब बीजेपी की सरकार बनी, तब उस वक्त के मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता ने दोनों नामों को जोड़ते हुए इसे ‘संत रविदास नगर-भदोही’ कर दिया.

भदोही के नामकरण का सिलसिला बदलती सरकारों के साथ जारी रहा. 2014 में समाजवादी पार्टी की सरकार में अखिलेश यादव ने संत रविदास नगर हटाकर इसे फिर से भदोही कर दिया और पिछले एक दशक से ज्यादा वक्त से ये जिला इसी नाम के साथ जाना जाता रहा है, लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 2026 में एक बार फिर इसका नाम बदल दिया गया है.

Advertisement

कालीन से लेकर संत रविदास तक पहचान

भदोही को दुनिया भर में कालीन नगरी के तौर पर पहचान मिली है, यहां का हस्तनिर्मित कालीन उद्योग सदियों पुराना है और जिला भारत के सबसे बड़े कालीन निर्माण केंद्रों में शामिल है. भदोही के कालीन देश-विदेश में निर्यात होते हैं और बड़ी संख्या में ग्रामीण कारीगर इस उद्योग से जुड़े हैं.

एक तरफ भदोही की पहचान ‘कालीन’ से है, तो दूसरी तरफ अब इसके नाम में संत रविदास की विरासत को प्रमुखता दी गई है, मुख्यमंत्री ने भी नाम की घोषणा करते हुए संत रविदास के सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का उल्लेख किया.

तीन विधानसभा सीटें और दिलचस्प सियासी समीकरण

भदोही जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं- भदोही, ज्ञानपुर और औराई, 2022 के विधानसभा चुनाव में तीनों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिले, भदोही सीट से समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग जीते, ज्ञानपुर से भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के विपुल दुबे विजयी हुए और औराई सुरक्षित सीट से भाजपा के दीनानाथ भास्कर ने जीत दर्ज की, यानी जिले की तीनों सीटों पर एक ही पार्टी का कब्जा नहीं रहा.

भदोही की राजनीति में ब्राह्मण, बिंद, यादव, दलित, मुस्लिम, क्षत्रिय, पाल और मौर्य जैसे सामाजिक समूहों की महत्वपूर्ण मौजूदगी बताई जाती है, जबकि दलित और मुस्लिम मतदाता भी कई सीटों पर महत्वपूर्ण भूमिका में रहे हैं. 

Advertisement

किस पार्टी का रहा दबदबा?

भदोही की राजनीति को किसी एक पार्टी का स्थायी गढ़ कहना आसान नहीं है, विधानसभा चुनावों में यहां भाजपा, सपा और निषाद पार्टी अलग-अलग समय पर प्रभावी रही हैं. भदोही विधानसभा सीट पर 2017 में भाजपा के रवींद्रनाथ त्रिपाठी जीते थे, जबकि 2022 में सपा के जाहिद बेग ने उन्हें हराया, ज्ञानपुर में लंबे समय तक विजय मिश्र का प्रभाव रहा, लेकिन 2022 में निषाद पार्टी के विपुल दुबे ने उन्हें हराया, औराई में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है,

अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जिले के नाम में फिर संत रविदास की वापसी ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री की घोषणा ऐसे समय हुई है जब यूपी में चुनावी तैयारियां तेज हो रही हैं. इस फैसले को लेकर राजनीतिक दल और विश्लेषक अलग-अलग नजरिए रख सकते हैं, लेकिन इतना तय है कि भदोही में नाम बदला है, मगर नाम के साथ जुड़ी सियासत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement