उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद सोमवार को एक बार फिर सूबे की सियासी पिच पर उतरे, तो पहले के तरह आक्रामक तेवर में नजर आए. योगी सरकार पर निशाना साधने हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर भी तंज कसा, लेकिन आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद का नाम तक नहीं लिया.
यूपी में एक के बाद एक चुनाव में मिल रही हार और खिसकते जनाधार के बीच आगामी चुनाव में सफलता का स्वाद चखने के लिए मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को यूपी में उतार दिया है. आकाश आनंद ने हाथरस से सादाबाद से मिशन-2027 का आगाज किया और बसपा के एजेंडे को सेट करते नजर आए.
सपा-कांग्रेस पर तो निशाना साधा, लेकिन सबसे ज्यादा हमले केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर किए. पेपर लीक, आरक्षण से लेकर निर्माण योजनाओं में भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा तक पर हमला बोला. अखिलेश यादव और राहुल गांधी को अंकल बताकर आकाश आनंद ने दलितों के साथ Gen-Z का गठजोड़ बनाने की कवायद करते नजर आए.
आकाश आनंद ने यूपी में किया कमबैक
आकाश आनंद करीब सवा दो साल के बाद यूपी में जनसभा संबोधित करने सोमवार को नजर आए. 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के विरुद्ध उनके आक्रामक भाषण के बाद ही मायावती ने उन्हें चुनाव के प्रचार से हटा लिया था, लेकिन अब दोबारा से उनकी यूपी में एंट्री हुई है. बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद शुरुआती सियासी झटकों के बाद अब परिपक्व नजर आने लगे हैं, हालांकि, यूपी के सियासी पिस पर उतरते ही उनके तेवर पहले की तरह अभी भी बरकरार हैं.
आकाश आनंद के भाषण में पार्टी सुप्रीमो मायावती की नसीहतों का असर साफ दिखाई दिया तो दूसरी तरफ युवाओं के बीच उनका आकर्षण भी बरकरार नजर आया. इस तरह आकाश ने अपनी दोबारा लॉन्चिंग के जरिए लंबी सियासी पारी खेलने के संकेत दिए हैं. सोमवार को हाथरस में आयोजित पार्टी की जनसभा में आकाश आनंद से योगी सरकार पर तीखे हमले किए तो साथ में कांग्रेस और सपा पर निशाना साधकर साफ कर दिया है कि सियासी तरकश में कई तीर हैं.
आकाश के निशाने पर रही योगी सरकार
बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने अपनी पहली जनसभा में ये साफ कर दिया है कि 2027 में उनके निशाने पर कौन -कौन रहने वाला है. योगी सरकार पर निशाना साधते हुए 10 साल का हिसाब मांगने के साथ कहा कि इस बार चुनाव में हाथी के सामने वाला बटन दबाकर कमल को कीचड़ में फेंकने का काम करें. योगी सरकार के कानून व्यवस्था पर निशाना साधते हुए आकाश ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए तो यूपी पुलिस को भी कठघऱे में खड़े करते नजर आए.
आकाश आनंद ने कहा कि मुख्यमंत्री जी को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का तमगा बहुत पसंद है। लेकिन सच्चाई ये है कि पूरे यूपी में पुलिस की वर्दी की आड़ में गुंडाराज चल रहा है. उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. भाजपा सरकार में गरीब, दलित, पिछड़े और व्यापारी कोई सुरक्षित नहीं है.
योगी सरकार के बुलडोजर एक्शन पर भी सवाल उठाया तो यूपी में बंद हुए 25 हजार सरकारी स्कूलों का भी उल्लेख कर आकाश आनंद ने दलित समाज से जोड़ा. इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के भारत की सड़कों को अमेरिका जैसा बनाने के एक बयान उल्लेख कर कहा कि देश का सबसे महंगा और घटिया एक्सप्रेस वे यहां बना है. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर सवाल उठाए तो साथ ही एथनॉल के बहाने केंद्र सरकार पर जमकर हमले किए.
Gen-Z को साधते नजर आए आकाश
आकाश आनंद ने Gen-Z के आंदोलन का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर अंकल कहकर तंज किया और बहुजन समाज की अनदेखी का आरोप लगाया. दिल्ली के आंदोलन को सही ठहराते हुए आकाश आनंद ने कहा कि युवाओं ने सरकार को अपनी ताकत दिखाई. इस कारण शिक्षा मंत्री को त्याग पत्र देना पड़ा, लेकिन बदले में ऐसा मंत्री मिला जो काबिल नहीं है. उन्होंने युवाओं से कहा कि आंदोलन सड़कों पर नहीं, बल्कि मत का सही प्रयोग करके होना चाहिए.
Gen-Z के आंदोलन के बहाने आकाश ने खुद को युवा भी दर्शाने की भी कोशिश की, जिसके लिए उन्होंने अखिलेश अंकल का मैं पूरी इज्जत और सम्मान के साथ उनका नाम ले रहा हूं. उनकी उम्र हो गई है, अगर मैं 30 साल का लड़का 50 साल के आदमी को अंकल नहीं कहूंगा तो क्या कहूंगा आप ही बात दो. इससे पहले उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी अकंल कह कर संबोधित किया. इस तरह आकाश आनंद ने अपने आपको जेन-जी के साथ खड़े करने की कोशिश की तो राहुल गांधी और अखिलेश यादव को बुजुर्ग बताने की कवायद करते नजर आए.
बीजेपी के साथ सपा-कांग्रेस पर उठाए सवाल
हाथरस की अपनी पहली जनसभा में आकाश आनंद ने बीजेपी के साथ सपा और कांग्रेस पर भी जमकर हमले किए, उन्होंने कहा कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव है इसलिए सपा और कांग्रेस के लोग भी आपके बीच में घूमने का काम करेंगे. वो भी आपके बीच में आकर आपको लुभाने का काम करेंगे, लेकिन कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों ही एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. बहनजी आप लोगों को इन दोनों के बारे में आगाह करती आई हैं. आपके प्रदेश में जिन नीतियों पर बीजेपी काम कर रही है ठीक उसी तरह कांग्रेस शासित राज्यों में भी उसी तरह से सत्ता चल रही है.
राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा कि ये आपके सामने आकर लाल किताब का ढिंढोरा पिटेंगे, बोलेंगे हम संविधान के रक्षक हैं.वो किताब गलती से खुल जाए तो पता चले वो खाली पन्ने हैं. बस नाम का संविधान है. वो किताब भी उनकी तरह ही है अंदर से खाली. बाहर से ढ़ोंग करने के लिए बहुत अच्छी है. कांग्रेस के साथ आकाश आनंद ने अखिलेश यादव के पीडीए पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि हमारे अखिलेश अंकल को कुछ समझ में ही नहीं आता, वो अपनी पार्टी में पीडीए-पीडीए कहते हैं, कभी पीडीए का मतलब कुछ और हो जाता है और कभी कुछ और.
चंद्रशेखर पर आकाश आनंद क्यों चुप रहे
आकाश आनंद ने योगी सरकार से लेकर अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर जमकर हमले किए, लेकिन आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद पर चुप्पी साधे रखी. हाथरस की रैली के दौरान आकाश आनंद द्वारा चंद्रशेखर आजाद पर कुछ न बोलने के पीछे बसपा की सोची-समझी राजनीतिक रणनीति मानी जाती है.
राजनीतिक रैलियों में किसी नेता पर सीधा प्रहार करने से उस नेता को मीडिया में कवरेज और महत्व मिलता है. बीएसपी की यह रणनीति रही है कि वह बहुजन राजनीति के क्षेत्र में उभर रहे अन्य चेहरों पर सीधी टिप्पणी करने से बचती है, ताकि उन्हें बीएसपी के समकक्ष स्थान न मिले.
चंद्रशेखर आजाद पर सीधा हमला करने से दलित और युवा मतदाताओं के बीच एक नकारात्मक संदेश जा सकता था. किसी अन्य बहुजन नेता पर कटाक्ष करने के बजाय आकाश आनंद ने अपने समर्थकों को एकजुट रखने और पार्टी के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दी.
बीएसपी का शीर्ष नेतृत्व मायावती हमेशा से अपने नेताओं को पार्टी की मूल लाइन पर ही टिके रहने का निर्देश देती रही हैं. इसीलिए आकाश आनंद ने पार्टी की इसी औपचारिक नीति का पालन करते हुए केवल अपने सांगठनिक संदेश और चुनावी वादों पर ही ध्यान केंद्रित रखा.