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सरिया

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सरिया या रीबार को Reinforcement Bar या Reinforcing Bar कहा जाता है. निर्माण के क्षेत्र में इसका इस्तेमाल कंक्रीट की संरचनाओं में किया जाता है. सरिया आमतौर पर स्टील की बनी छड़ होती है, जिसे कंक्रीट के अंदर लगाया जाता है. कंक्रीट दबाव को सहन करने में मजबूत होता है, लेकिन खिंचाव को सहन करने की क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है. सरिया इसी कारण कंक्रीट के साथ मिलकर इस्तेमाल किया जाता है.

सरिया की सतह पूरी तरह चिकनी नहीं होती है. इसकी सतह पर उभरी हुई धारियां, निशान या रिब्स बनाए जाते हैं. इन रिब्स की वजह से स्टील की छड़ और कंक्रीट के बीच पकड़ बनी रहती है. इससे निर्माण के दौरान सरिया के अपनी जगह से खिसकने की संभावना कम होती है.

भारत में सरिया के ग्रेड और आकार से जुड़े मानक BIS द्वारा निर्धारित किए जाते हैं. IS 1786 के तहत FE 415, FE 415D, FE 415S, FE 500, FE 500D, FE 500S, FE 550, FE 550D और FE 600 जैसे ग्रेड उपलब्ध हैं. सरिया के ग्रेड के आधार पर उसकी निर्धारित विशेषताएं अलग हो सकती हैं.

भारत में सरिया अलग-अलग व्यास में मिलता है. BIS के अनुसार 10, 12, 16, 20, 25, 28, 32, 36, 40 और 50 मिलीमीटर जैसे आकार उपलब्ध हैं. तटीय क्षेत्रों में जंग से बचाव के लिए गैल्वनाइज्ड रीबार का भी इस्तेमाल किया जाता है. भारत में कई सरिया कंपनी हैं जिनमें टाटा टिस्कॉन (Tata Tiscon), जेएसडब्ल्यू नियो स्टील, सेल (SAIL - Steel Authority of India), जिंदल पैंथर (Jindal Panther)और कामधेनु टीएमटी (Kamdhenu TMT) शामिल हैं.

सरिया बनाने के दौरान स्टील को अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है. कुछ सरिया में पानी के दबाव से क्वेंचिंग की प्रक्रिया की जाती है, जिसमें बाहरी सतह को कठोर किया जाता है और अंदर का हिस्सा अपेक्षाकृत नरम रहता है.

सबसे सामान्य सरिया कार्बन स्टील से बनाया जाता है. इसे आमतौर पर हॉट-रोल्ड प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. जरूरत के अनुसार सरिया के दूसरे प्रकार भी उपलब्ध होते हैं. इनमें स्टेनलेस स्टील सरिया और ग्लास फाइबर, कार्बन फाइबर या बेसाल्ट फाइबर से बने कंपोजिट बार शामिल हैं. कुछ स्टील सरिया पर जिंक या एपॉक्सी कोटिंग भी की जाती है. इसका इस्तेमाल खासतौर पर ऐसे वातावरण में किया जाता है जहां जंग लगने की संभावना अधिक होती है.
 

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