आईपीएल में गेंदबाजों के लिए खौफ का दूसरा नाम बन चुके वैभव सूर्यवंशी इन दिनों न तो बड़े-बड़े छक्के लगाने की तैयारी कर रहे हैं और न ही टी20 शॉट्स की. राजस्थान रॉयल्स के हाई परफॉर्मेंस सेंटर में उनका पूरा फोकस लाल गेंद और लंबी पारियां खेलने पर है. लेकिन इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात सिर्फ रेड-बॉल प्रैक्टिस नहीं, बल्कि वह तरीका है जिससे उनकी तैयारी कराई जा रही है.
एक जैसी नहीं, हर दिन अलग पिच
आमतौर पर खिलाड़ी नेट्स पर एक जैसी पिचों पर अभ्यास करते हैं. लेकिन तालेगांव स्थित राजस्थान रॉयल्स के सेंटर में वैभव को अलग-अलग तरह की मिट्टी से बनी पिचों पर बल्लेबाजी कराई जा रही है.
When the groundsman said 𝘈𝘵𝘪 𝘚𝘶𝘯𝘥𝘢𝘳! 💗🥹
🎙️Welcome to Royals Overheard ft. Vaibhav Sooryavanshi 👌 pic.twitter.com/bINmFHDnvr— Rajasthan Royals (@rajasthanroyals) July 27, 2026
यानी एक दिन तेज उछाल वाली सतह, दूसरे दिन धीमी पिच, कहीं गेंद ज्यादा टर्न करेगी तो कहीं सीम मूवमेंट मिलेगी. इन पिचों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे भारत के अलग-अलग घरेलू मैदानों जैसी परिस्थितियों का अहसास कराएं.
इसका सीधा मतलब है कि वैभव को सिर्फ शॉट खेलने नहीं, बल्कि हर तरह की विकेट पर खुद को ढालना सिखाया जा रहा है.
क्यों जरूरी है यह तैयारी?
23 अगस्त से बेंगलुरु में दलीप ट्रॉफी शुरू हो रही है. वैभव ईस्ट जोन के उपकप्तान हैं. दलीप ट्रॉफी भारतीय घरेलू क्रिकेट का सबसे प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट माना जाता है, जहां हर मैच की पिच अलग चुनौती पेश करती है.
अगर कोई बल्लेबाज हर तरह की सतह पर रन बना सकता है, तभी उसे लंबे फॉर्मेट का भरोसेमंद खिलाड़ी माना जाता है. यही वजह है कि राजस्थान रॉयल्स ने अभ्यास का पूरा मॉडल ही मैच जैसी परिस्थितियों पर आधारित बनाया है.
सिर्फ नेट प्रैक्टिस नहीं...
राजस्थान रॉयल्स के इस 10 दिन के कैंप में खिलाड़ियों को सिर्फ नेट्स में बल्लेबाजी नहीं कराई जा रही. हर खिलाड़ी के लिए अलग ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार किया गया है, ताकि उसकी जरूरत के हिसाब से खेल को निखारा जा सके.
- तकनीकी सुधार (Technical Skill Development): बल्लेबाजी की तकनीक, फुटवर्क, डिफेंस और शॉट चयन पर काम किया जा रहा है, ताकि खिलाड़ी अलग-अलग तरह की पिचों पर खुद को ढाल सके.
- स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग (Strength & Conditioning): ताकत, फिटनेस, स्टैमिना और शरीर की क्षमता बढ़ाने पर जोर है, जिससे खिलाड़ी लंबे घरेलू सीजन और लगातार मैचों का दबाव झेल सके.
- वर्कलोड मैनेजमेंट (Workload Management): खिलाड़ी कितनी देर अभ्यास करेगा, कितनी गेंदें खेलेगा, कितना दौड़ेगा और शरीर पर कितना भार पड़ेगा- इन सबकी वैज्ञानिक तरीके से निगरानी की जा रही है, ताकि ओवरलोड की वजह से चोट का खतरा न बढ़े.
- रिकवरी (Recovery): कड़ी ट्रेनिंग के बाद शरीर को जल्दी रिकवर कराने के लिए विशेष कार्यक्रम बनाए गए हैं. इसमें आराम, स्ट्रेचिंग, फिजियोथेरेपी और रिकवरी सेशन शामिल हैं.
- परफॉर्मेंस एनालिसिस (Performance Analysis): हर सेशन के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया जाता है. उनकी तकनीक, कमजोरियों और सुधार के क्षेत्रों की समीक्षा कर अगला ट्रेनिंग प्लान तैयार किया जाता है.
यह सिर्फ प्रैक्टिस कैंप नहीं, बल्कि एक हाई-परफॉर्मेंस प्रोग्राम है, जहां वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी को लंबे करियर और तीनों फॉर्मेट की क्रिकेट के लिए वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जा रहा है.
The CUTEST episode of Royals Overheard ft. Vaibhav Sooryavanshi and our junior commentary panel! 😂😂💗 pic.twitter.com/wPT8tWqZGf
— Rajasthan Royals (@rajasthanroyals) August 7, 2026
यानी खिलाड़ी कितनी गेंद खेल रहा है, कितना दौड़ रहा है, कितना आराम कर रहा है और उसका शरीर कितना लोड झेल रहा है- हर चीज की निगरानी की जा रही है.
सबसे बड़ा रोल विक्रम राठौड़ का
पूर्व भारतीय बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़ इस कैंप की अगुआई कर रहे हैं. राठौड़ ने टेस्ट क्रिकेट में वर्षों तक भारतीय बल्लेबाजों के साथ काम किया है. अब वही अनुभव वैभव जैसे युवा खिलाड़ी तक पहुंचाया जा रहा है.
मतलब सिर्फ तकनीक नहीं सुधर रही, बल्कि यह भी सिखाया जा रहा है कि पांच दिन तक बल्लेबाजी करने के लिए मानसिक और शारीरिक तैयारी कैसी होनी चाहिए.
राजस्थान रॉयल्स का बदलता मॉडल
पहले आईपीएल फ्रेंचाइजी का काम सिर्फ दो महीने की लीग तक सीमित माना जाता था. लेकिन अब राजस्थान रॉयल्स खिलाड़ियों के पूरे साल के विकास पर निवेश कर रही है.
फ्रेंचाइजी ने साफ कहा है कि उसका मकसद खिलाड़ियों को सिर्फ आईपीएल के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि पूरे घरेलू सीजन और लंबे करियर के लिए विकसित करना है.
यानी अब फ्रेंचाइजी खुद भारतीय क्रिकेट की 'डेवलपमेंट लैब' बनने की कोशिश कर रही हैं.
वैभव के लिए इसका क्या मतलब?
15 साल की उम्र में वैभव पहले ही टी20 क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके हैं. लेकिन उनका अगला लक्ष्य अलग है.
अगर उन्हें भविष्य में भारत के लिए तीनों फॉर्मेट खेलना है, तो उन्हें सिर्फ बड़े शॉट्स नहीं, बल्कि—
राजस्थान रॉयल्स का यह कैंप उसी दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा सकता है.
सबसे अहम बात -
सिर्फ इतना नहीं है कि वैभव रेड-बॉल की प्रैक्टिस कर रहे हैं. उन्हें अलग-अलग पिचों, वैज्ञानिक ट्रेनिंग, वर्कलोड मैनेजमेंट और टेस्ट क्रिकेट की मानसिकता के साथ तैयार किया जा रहा है.यानी राजस्थान रॉयल्स सिर्फ अगले आईपीएल के लिए नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के अगले ऑल-फॉर्मेट स्टार को गढ़ने की कोशिश में जुटी है.