क्रिकेट के पन्नों में शायद ही कभी ऐसा लिखा गया हो कि जो हाथ वर्ल्ड कप की ट्रॉफी चूम रहे हों, उन्हें अचानक टीम से ही बेदखल कर दिया जाए. लेकिन सूर्यकुमार यादव के साथ किस्मत ने कुछ ऐसा ही खेल खेला.
एक वर्ल्ड चैंपियन के साथ ऐसा बर्ताव... आखिर कैसे? तो इसका सीधा जवाब सूर्यकुमार यादव का फॉर्म है. टीम से बाहर होने के बाद सूर्यकुमार यादव ने हाल ही में एक ऐसा खुलासा किया है, जो उनके फैन्स को हैरान कर देगा.
साल 2025 का एशिया कप और 2026 का टी20 वर्ल्ड कप जिताने वाले इस चैंपियन कप्तान को जब अचानक कप्तानी से हटाकर टीम से ड्रॉप कर दिया गया तो वह अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे. अजित अगरकर की अगुवाई वाली सिलेक्शन कमिटी ने सूर्या की जगह श्रेयस अय्यर को टी20 का नया कप्तान बना दिया था. इस फैसले से सूर्या इतने बड़े सदमे में थे कि उन्होंने क्रिकेट से संन्यास तक लेने का मन बना लिया था.
टीम से बाहर होने पर टूट गए थे सूर्या
पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा को दिए एक इंटरव्यू में सूर्या ने अपना दर्द बयां किया. उन्होंने बताया कि टीम से बाहर होने के बाद करीब 40-50 दिनों तक वह घर पर बिल्कुल खाली बैठे रहे. उनके दिमाग में उथल-पुथल मची थी कि अब आगे क्या करना है. सूर्या ने कहा कि आगे का रास्ता बिल्कुल धुंधला नजर आ रहा था. कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मैं आगे खेलूं या नहीं.
पत्नी देविशा ने याद दिलाया पुराना 'सूर्या'
इस मुश्किल और डिप्रेशन वाले दौर में उनकी पत्नी देविशा शेट्टी उनके लिए सबसे बड़ी ढाल बनीं. सूर्या ने बताया कि एक दिन देविशा ने उनसे कहा कि जरा सोचो कि 20 साल पहले जब तुम 13-15 साल के थे, तब तुमने बैट क्यों उठाया था? क्योंकि तुम्हारे अंदर इस खेल के लिए एक पागलपन और जुनून था.
जब सूर्या भविष्य को लेकर परेशान थे, तब देविशा ने उन्हें पीछे मुड़कर देखने को कहा. उन्होंने सूर्या को उनके पिछले 5 सालों के जादुई सफर की याद दिलाई. 5 वर्ल्ड कप खेलना, दो बार ICC टी20 प्लेयर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड जीतना, नंबर 1 रैंकिंग हासिल करना, साल 2024 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल का वो कैच और 2026 में कप्तान के तौर पर वर्ल्ड कप उठाना. देविशा ने उन्हें समझाया कि जो मुकाम लोग 20-25 सालों की मेहनत के बाद भी हासिल नहीं कर पाते, वो सूर्या ने सिर्फ 5 साल में कर दिखाया है.
अब बेटी के लिए खेलेंगे सूर्या
पत्नी की इन बातों का सूर्या पर जादू सा असर हुआ. उन्होंने धीरे-धीरे वापसी की तैयारी शुरू की. दोबारा जिम जाना शुरू किया, दोस्तों के साथ वक्त बिताया और अपना पुराना प्यार यानी टेनिस और रबर बॉल क्रिकेट फिर से खेला. सूर्या ने बताया कि पिछले दो-तीन हफ्तों से मेरे अंदर वो पुराना जुनून वापस आ गया है. अब मैं रोज अपनी बेटी को देखता हूं तो अंदर से आवाज आती है कि अब मुझे उसके लिए खेलना है.
35 साल के हो चुके सूर्यकुमार का कहना है कि उनके अंदर क्रिकेट के लिए प्यार, फोकस और अनुशासन पूरी तरह वापस आ चुका है और वह सही ट्रैक पर लौट आए हैं. वह 38-39 की उम्र तक यानी अपने बचे हुए 3-4 साल उसी जोश और पागलपन के साथ खेलना चाहते हैं.