नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर टूटने और फ्लैश फ्लड की घटना पर्यावरण की नाजुकता की भयावह याद दिलाती है. संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने रविवार को कहा कि खासतौर पर हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के कारण बड़े खतरे में है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और स्थानीय समुदाय वर्षों से चेतावनी देते रहे हैं कि हिंदू कुश हिमालय जलवायु परिवर्तन के कारण भारी जोखिम में है.
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के कार्यकारी सचिव स्टील ने कहा कि इंसानों द्वारा भारी मात्रा में कोयला, तेल और गैस जलाने से जलवायु गर्म हो रही है. इससे इस तरह की त्रासदियां और दुनिया भर में होने वाली कई अन्य घटनाएं अधिक संभावित, लगातार और गंभीर हो रही हैं. उन्होंने कहा कि इनका सबसे ज्यादा असर अक्सर कमजोर समुदायों पर पड़ता है.
उन्होंने कहा कि वैश्विक तापमान बढ़ने की समस्या के समाधान भी स्पष्ट हैं. इनमें फॉसिल फ्यूल से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना और जलवायु से निपटने की क्षमता में अधिक निवेश करना शामिल है.
नेपाल में भारी तबाही
चीन की सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में पानी और मलबे का तेज बहाव पहुंचा. रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लैश फ्लड से नेपाल में कम से कम 788 लोगों की मौत हुई है, जबकि 2,500 लोग अब भी लापता हैं. बाढ़ की वजह से घर, सड़कें और पुल बह गए और कई जिलों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा.
इस आपदा के बाद नेपाल से नीचे की ओर आने वाले भारतीय इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश में नारायणी-गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की आशंका वाले गांवों को अलर्ट पर रखा गया है. महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक नदी से कई शव भी बरामद हुए हैं, जो नेपाल से बहकर नीचे आए थे.