भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने सचिन तेंदुलकर को भारत का सर्वकालिक महान क्रिकेटर चुना है. ईएसपीएन क्रिकइन्फो के साथ एक मजेदार ब्रैकेट गेम में अश्विन को अलग-अलग दौर और फॉर्मेट के भारतीय दिग्गजों में से किसी एक को चुनते हुए आगे बढ़ना था. इस दौरान अश्विन ने कई ऐसे कड़े फैसले लिए, जिन्होंने क्रिकेट फैन्स का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया.
अश्विन का सबसे मुश्किल और चौंकाने वाला फैसला क्वार्टर फाइनल राउंड में आया. यहां अश्विन का सामना विराट कोहली बनाम जसप्रीत बुमराह के विकल्प से हुआ. अश्विन ने माना कि तीनों फॉर्मेट में विराट का रिकॉर्ड और टेस्ट करियर शानदार है, लेकिन उन्होंने बुमराह को चुना.
अश्विन ने हंसते हुए कहा कि विराट एक पक्के लेजेंड हैं, लेकिन मैं जसप्रीत बुमराह के साथ जाऊंगा. शायद एक गेंदबाज होने के नाते मेरे अंदर बुमराह के लिए थोड़ी सी तरफदारी आ गई है. जब बात एमएस धोनी और रवींद्र जडेजा के बीच चुनने की आई तो अश्विन थोड़ा उलझ गए.
उन्होंने माना कि जडेजा को चुनना काफी लुभावना था, लेकिन धोनी की कप्तानी, टेस्ट और वनडे रिकॉर्ड को देखते हुए उन्होंने माही का साथ दिया. हालांकि, धोनी का सफर भी ज्यादा आगे नहीं गया. क्वार्टर फाइनल में जब धोनी का मुकाबला वीरेंद्र सहवाग से हुआ तो अश्विन ने बेझिझक सहवाग को चुन लिया.
रोहित-कोहली में कौन आगे?
इससे पहले राउंड में सहवाग ने सुनील गावस्कर को पछाड़ा था, जिसे अश्विन ने गावस्कर के साथ थोड़ी नाइंसाफी भी बताया था. इस गेम में एक मौका ऐसा भी आया जब खुद अश्विन का नाम पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के साथ रखा गया. यहां अश्विन ने बड़ी ही समझदारी से खुद को किनारे कर लिया और कहा कि हे भगवान! मैं सुरक्षित खेलते हुए सौरव गांगुली को चुनूंगा. इसके अलावा शुरुआती राउंड्स में उन्होंने विजय हजारे के ऊपर सचिन, रोहित शर्मा के ऊपर कोहली और अनिल कुंबले के ऊपर बुमराह को चुना था.
कपिल देव ने रोका बुमराह का विजय रथ
सेमीफाइनल तक पहुंचते-पहुंचते मुकाबला और कड़ा हो गया. पहले सेमीफाइनल में सचिन तेंदुलकर ने सहवाग को हराया. जबकि दूसरे सेमीफाइनल में कपिल देव ने जसप्रीत बुमराह को बाहर का रास्ता दिखा दिया. अश्विन का मानना था कि कपिल देव का 1983 वर्ल्ड कप जीतना और उनका बेहतरीन ऑलराउंडर होना बुमराह के शानदार प्रदर्शन पर भारी पड़ गया.
फाइनल में सचिन और कपिल की टक्कर
आखिरी और खिताबी मुकाबला भारत के दो सबसे बड़े लेजेंड्स- सचिन तेंदुलकर और कपिल देव के बीच था. दोनों ने अपने-अपने दौर में भारतीय क्रिकेट की दिशा और दशा बदली है. लेकिन फाइनल फैसला लेते वक्त अश्विन के लिए यह शायद सबसे आसान चुनाव था. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि किसी न किसी मोड़ पर आपकी अपनी व्यक्तिगत पसंद मायने रखती है. मैं सचिन तेंदुलकर के साथ जाऊंगा.