scorecardresearch
 

चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट क्रैश, नासा ने दिखाई 60 फीट के गड्ढे की पहली साफ तस्वीर

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं था.

Advertisement
X
इस कॉम्बो फोटो में बाएं तब की फोटो जब रॉकेट सतह से नहीं टकराया था. दाएं- रॉकेट टकराने के बाद बना गड्ढा. (Photo: AFP)
इस कॉम्बो फोटो में बाएं तब की फोटो जब रॉकेट सतह से नहीं टकराया था. दाएं- रॉकेट टकराने के बाद बना गड्ढा. (Photo: AFP)

नासा ने चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट के टकराने से बने गड्ढे की नई तस्वीरें जारी की हैं. ये तस्वीरें नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने 11 और 12 अगस्त को लीं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, 5 अगस्त को Falcon 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा चांद से टकराया था. इससे वहां करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा बन गया. इसकी गहराई 10 फीट से कम है.

यह रॉकेट 15 जनवरी 2025 को लॉन्च हुआ था. इसे फायरफ्लाय एरोस्पेस के ब्लू घोस्ट1 लूनर लैंडर को चांद तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया था. लैंडर को चांद पर उतारने के बाद रॉकेट का ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में ही रह गया. बाद में उसकी दिशा बदल गई और वह चांद की तरफ चला गया. 

यह भी पढ़ें: 144 घंटे तक नहीं थमेगी बारिश! MP-छत्तीसगढ़ से यूपी तक आफत की आशंका

5 अगस्त को वह चांद की सतह से टकरा गया. इस टक्कर से धरती पर किसी तरह का खतरा नहीं था. वैज्ञानिक अब इस घटना से चंद्रमा की सतह के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं.

टक्कर से चांद पर क्या हुआ?

नासा की तस्वीरों में गड्ढे के आसपास धूल और चट्टानों के निशान दिखाई दे रहे हैं. रॉकेट के टकराने से चंद्रमा की सतह की धूल और चट्टानें बाहर निकलकर आसपास फैल गईं.

Advertisement
 nasa spacex rocket moon crash crater photos
स्पेसएक्स का रॉकेट टकराने के बाद बना गड्ढा. (Photo: AFP)

गड्ढे के आसपास कुछ हिस्से गहरे रंग के दिखाई दे रहे हैं. नासा के मुताबिक, ये चांद की पुरानी धूल और चट्टानों से बने हैं. ये धूल और चट्टानें लंबे समय से सूरज की रोशनी, अंतरिक्ष से आने वाले कणों और छोटी चट्टानों की टक्कर का असर झेल रही थीं.

वहीं गड्ढे के किनारे कुछ हिस्से ज्यादा चमकीले हैं. ये चांद की सतह के नीचे मौजूद नई मिट्टी और चट्टानों के बाहर आने से बने हैं. टक्कर के दौरान करीब 1.5 फीट नीचे की सामग्री भी बाहर निकलकर फैल गई.

यह भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर का असली हीरो राफेल नहीं, कोई और फाइटर जेट था... जिससे डरता है पाकिस्तान

गड्ढे की फोटो लेना क्यों मुश्किल था?

LRO साल 2009 से चांद के चारों ओर घूम रहा है. यह करीब हर दो घंटे में चांद का एक चक्कर पूरा करता है. लेकिन क्रैश वाली जगह की साफ तस्वीर लेने के लिए सही समय का इंतजार करना पड़ा.

नासा के मुताबिक, LRO को इस जगह के ऊपर सही स्थिति में आने में करीब छह दिन लगे. जब LRO चांद से करीब 96 km ऊपर से गुजर रहा था, तब उसके कैमरे को गड्ढे की तरफ सही दिशा में करना पड़ा.

Advertisement

तस्वीर लेने में सिर्फ 10 सेकंड की गलती भी बड़ी हो सकती थी. अगर कैमरा 10 सेकंड पहले या बाद में तस्वीर लेता, तो गड्ढा तस्वीर के बीच से करीब 16 किलोमीटर दूर हो सकता था.

 nasa spacex rocket moon crash crater photos
बिना रॉकेट के टक्कर वाली तस्वीर. (Photo: AFP)

दक्षिण कोरिया के मिशन से भी मिली मदद

क्रैश के अगले दिन दक्षिण कोरिया के दानुरी मिशन ने भी इस जगह की तस्वीरें ली थीं. इन तस्वीरों से नासा को क्रैश वाली जगह का पता लगाने में मदद मिली.

नासा के सेंटर फॉर नीयर अर्थ ऑबजेक्ट्स स्टडीस् ने रॉकेट के रास्ते का हिसाब लगाकर टक्कर वाली जगह का अनुमान लगाया. यह जानकारी दक्षिण कोरिया की टीम के साथ साझा की गई. इसके बाद दानुरी से मिले डेटा की मदद से नासा ने LRO को सही जगह की तस्वीर लेने के लिए तैयार किया.

वैज्ञानिक इस घटना का इस्तेमाल चांद की सतह को बेहतर तरीके से समझने के लिए कर रहे हैं. ऐसी टक्करों से मिली जानकारी भविष्य में चांद पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों और वहां लगाए जाने वाले उपकरणों की सुरक्षा में भी काम आ सकती है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement