scorecardresearch
 

इधर अल-नीनो एक्टिव, उधर बंगाल की खाड़ी में साइक्लोन अर्नब का खतरा... क्या होगा मौसम पर असर?

बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर डीप डिप्रेशन या चक्रवात अर्नब बन सकता है. ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश में भारी बारिश का खतरा. साथ में अल-नीनो भी एक्टिव, जिससे सूखे की आशंका बढ़ी है.

Advertisement
X
बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर एरिया बना है जो साइक्लोन बन सकता है. (Photo: IMD)
बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर एरिया बना है जो साइक्लोन बन सकता है. (Photo: IMD)

भारत इस समय दो बड़े मौसमी खतरों का सामना कर रहा है. एक ओर प्रशांत महासागर में अल-नीनो मजबूत हो रहा है तो दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान की संभावना बन रही है. मौसम विभाग के अनुसार अगर बंगाल की खाड़ी का लो प्रेशर सिस्टम और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन या चक्रवात में बदल जाता है तो उसका नाम अर्नब रखा जाएगा. यह सिस्टम 20 से 25 सितंबर के बीच सक्रिय हो सकता है. 

इससे ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश सहित कई तटीय राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बढ़ गया है. अल-नीनो के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में सूखा और कम बारिश की आशंका पहले से बनी हुई है. दोनों खतरों के एक साथ आने से भारत के मौसम पर गंभीर असर पड़ सकता है.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अंडमान सागर में बना लो-प्रेशर एरिया अगले दो दिनों में और मजबूत होगा. 21 सितंबर को यह डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में तब्दील हो सकता है. 23 सितंबर तक यह आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट के पास पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने की संभावना है.

यह भी पढ़ें: भारत में अगले कुछ महीनों में आएगा 'प्रलय' जैसा मौसम, 180 वैज्ञानिकों की चेतावनी

Advertisement

अगर यह और तीव्र हुआ तो चक्रवात अर्नब बन सकता है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय मौसम की स्थितियां ऐसी हैं कि सिस्टम तेजी से विकसित हो सकता है. इसलिए तटीय क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी है.

ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने दक्षिण ओडिशा और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है. 23 और 24 सितंबर को इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. दक्षिण छत्तीसगढ़ में भी 24 सितंबर को अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना है. छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में 23 से 25 सितंबर तथा विदर्भ में 24 और 25 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. 

ओडिशा में 23-24 सितंबर को 50-60 KM/HR की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंकों में 70 KM/HR तक पहुंचने की आशंका है. 23 सितंबर को दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों के पास 55-65 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं चल सकती हैं. दक्षिण आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के तटों पर भी 23-24 सितंबर के दौरान तेज हवाएं चलने की संभावना है.

Cyclone Arnab El-nino

पूर्वी भारत में भी बारिश का असर देखने को मिलेगा. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और गंगीय पश्चिम बंगाल में 20 से 26 सितंबर के बीच भारी बारिश हो सकती है. झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम में 22 से 26 सितंबर के दौरान बारिश बढ़ सकती है. 

Advertisement

बिहार में 24-26 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 25 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है. इन क्षेत्रों में बाढ़, जलभराव और फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ सकता है.

अल-नीनो और चक्रवात का दोहरा प्रभाव

प्रशांत महासागर में अल-नीनो के मजबूत होने से देश के कई हिस्सों में सूखे और अकाल जैसे हालात बनने की आशंका है. अल-नीनो आमतौर पर मानसून को कमजोर करता है. गर्मी बढ़ाता है. वहीं बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती सिस्टम तटीय राज्यों में भारी बारिश ला सकता है. 

यह भी पढ़ें: लो फ्लाइंग जेट, तड़के 4 बजे एयरस्ट्राइक... अफगानिस्तान में पाकिस्तान का बम तो गिरा लेकिन खाली घर पर!

दोनों स्थितियों के एक साथ सक्रिय होने से मौसम का पैटर्न और जटिल हो गया है. एक तरफ कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी बढ़ सकती है तो दूसरी तरफ तटीय इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है. यह दोहरी आफत कृषि, मछली पालन और तटीय आबादी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है.

मौसम विभाग लगातार इस सिस्टम पर नजर रखे हुए है. अगले 5-6 दिनों तक कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है. तटीय राज्यों के प्रशासन को पहले से तैयारी करने की सलाह दी जा रही है. मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी जा सकती है. भारी बारिश वाले क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहना चाहिए. जल निकासी व्यवस्था ठीक रखने और फसलों की सुरक्षा के उपाय करने की जरूरत है.

Advertisement

आगे की सतर्कता और तैयारी जरूरी

चक्रवात अर्नब अगर विकसित होता है तो इसका असर सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं रहेगा. तेज हवाएं पेड़ों को उखाड़ सकती हैं, बिजली के खंभे गिरा सकती हैं और परिवहन व्यवस्था बाधित कर सकती हैं. तटीय इलाकों में समुद्री लहरें भी ऊंची उठ सकती हैं. 

यह भी पढ़ें: हिमालय के ग्लेशियर 65% तेजी से पिघल रहे हैं, करोड़ों लोगों की जान आफत में

इसलिए स्थानीय प्रशासन को राहत सामग्री, मेडिकल टीम और बचाव दल तैयार रखने चाहिए. आम लोगों को मौसम विभाग के अपडेट्स पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए. अल-नीनो के लंबे प्रभाव को देखते हुए पानी के संरक्षण और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों पर भी ध्यान देने की जरूरत है.

कुल मिलाकर यह समय मौसम की दोहरी चुनौती का है. बंगाल की खाड़ी का सिस्टम और प्रशांत महासागर का अल-नीनो दोनों मिलकर भारत के कई हिस्सों में असामान्य मौसम की स्थिति पैदा कर सकते हैं. समय रहते सतर्कता और तैयारी से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. मौसम विभाग के अलर्ट्स का पालन करना और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement