Hindu Dharam: आज सावन का दूसरा सोमवार है और इस दिन लोग भगवान शिव का जलाभिषेक करके आशीर्वाद लेते हैं. पूरे भारत में भोले भंडारी यानी भगवान शिव के अनगिनत मंदिर हैं, जिनमें से कई के बारे में हम सभी जानते हैं. लेकिन आज हम आपको भगवान शिव के 5 ऐसे रहस्यमय मंदिरों के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में शायद ही आपने पहले सुना हो. इन मंदिरों से जुड़े रहस्य और मान्यताएं आपको हैरान कर देंगी. तो चलिए जानते हैं.
स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर
यह मंदिर गुजरात के कैंबे तट पर अरब सागर के बीच स्थित है. लगभग 150 साल पहले खोजे गए इस मंदिर का उल्लेख शिव पुराण के रुद्र संहिता में भी मिलता है. इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यह दिन में दो बार कुछ समय के लिए गायब हो जाता है और फिर वापस दिखाई देने लगता है. दरअसल, ज्वार-भाटा के कारण समुद्र का पानी शिवलिंग को पूरी तरह ढक लेता है, जिससे मंदिर जलमग्न हो जाता है. ज्वार उतरने के बाद मंदिर फिर से दिखाई देता है. श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए ज्वार-भाटा के समय का विशेष ध्यान रखते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षस तारकासुर के वध के बाद भगवान कार्तिकेय ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी.
निष्कलंक महादेव मंदिर
गुजरात के भावनगर जिले के कोलियाक तट से करीब 3 किलोमीटर अंदर समुद्र में स्थित यह मंदिर बेहद अनोखा है. यहां रोज समुद्र की लहरें शिवलिंग का जलाभिषेक करती हैं. ज्वार के समय यह मंदिर पूरी तरह पानी में डूब जाता है और सिर्फ एक ध्वज दिखाई देता है. श्रद्धालु ज्वार उतरने पर पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं. मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए यहां आए थे. भगवान कृष्ण के कहने पर उन्होंने यहां तपस्या की और शिवलिंग की स्थापना की. इसी कारण इसे “निष्कलंक” महादेव कहा जाता है.
अचलेश्वर महादेव मंदिर
राजस्थान के धौलपुर में चंबल के बीहड़ों के बीच स्थित यह मंदिर अपने अनोखे चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है. यहां का शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है- सुबह लाल, दोपहर में केसरिया और शाम होते-होते काला. इस रहस्य का कारण आज तक कोई नहीं जान पाया है. एक और खास बात यह है कि इस शिवलिंग की गहराई का भी आज तक पता नहीं चल पाया है. कहा जाता है कि इसे जानने के लिए खुदाई भी की गई, लेकिन अंत नहीं मिला.
लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर
मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान राम ने खर-दूषण के वध के बाद लक्ष्मण के कहने पर की थी. यहां स्थित शिवलिंग को “लक्ष्यलिंग” कहा जाता है, जिसमें हजारों छोटे-छोटे छिद्र हैं. इनमें से एक छिद्र पातालगामी माना जाता है, जिसमें डाला गया जल पूरी तरह समा जाता है, जबकि एक छिद्र में पानी हमेशा भरा रहता है, जिसे अक्षय कुंड कहा जाता है. कहा जाता है कि इस शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल मंदिर के पीछे स्थित कुंड में पहुंचता है, जो कभी सूखता नहीं.
बिजली महादेव मंदिर
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित यह मंदिर अपने अद्भुत चमत्कार के लिए जाना जाता है. यह मंदिर व्यास और पार्वती नदियों के संगम के पास एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है. यहां हर 12 साल में शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है, जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है. इसके बाद पुजारी मक्खन से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ देते हैं, और कुछ समय बाद वह फिर से एक ठोस रूप में बदल जाता है.
इन सभी मंदिरों की विशेषताएं और उनसे जुड़ी मान्यताएं उन्हें बेहद रहस्यमय बनाती हैं. यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इन मंदिरों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.