भगवान शिव की नगरी काशी को लेकर मान्यता है कि सभी देवी-देवता यहां वास करते हैं. काशी में गौरी-केदारेश्वर मंदिर भी है. मान्यता है कि यहां दर्शन पूजन करने वाले लोगों को केदारनाथ के समान दर्शन करने का फल प्राप्त होता है. इतना ही नहीं, केदारनाथ में दर्शन करने वाले भक्तों 16 कलाओं में एक कला का दर्शन होता है. वहीं यहां 15 कलाओं के दर्शन होते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह स्वयंभू शिवलिंग खिचड़ी से बना हुआ है. जो दो भागों में बंटा हुआ है. एक भाग गौरी तो दूसरा केदारेश्वर है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन से सात देवी-देवताओं के सीधे दर्शन होते हैं.
काशी के केदारघाट स्थित केदारेश्वर खंड में स्थापित गौरी-केदारेश्वर आदि प्राचीन मंदिर है. यहां शंभू शिवलिंग स्थापित है. मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन करने से श्रद्धालुओं को केदारनाथ धाम के दर्शन के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है. मंदिर में न सिर्फ वाराणसी, बल्कि दक्षिण भारत और विदेशों से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं और बेलपत्र आदि चढ़ाकर जलाभिषेक करते हैं.
मंदिर स्थापना की कहानी
मंदिर समिति के लोगों ने बताया कि राजा मांधाता भगवान केदारनाथ को नियमित खिचड़ी का भोग लगाते थे. एक दिन राजा मांधाता खिचड़ी बनाकर भगवान का दर्शन करने में असमर्थ हो गए तो उन्होंने भगवान से प्रार्थना की प्रभु आज मैं दर्शन करने में असमर्थ हूं. आपको यह भोग अर्पित करता हूं. राजा मांधाता की बात सुनकर भगवान प्रकट हुए और खिचड़ी में ही शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए.
तभी यह शिवलिंग यहां स्थापित है. खिचड़ी के रूप में स्थापित इस शिवलिंग के दो हिस्से हैं. एक को गौरी दूसरे को केदारेश्वर कहा जाता है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को खिचड़ी के रूप में अन्नपूर्णा माता, माता गौरा, भगवान भोले, मंदिर से मां गंगा, सूर्य भगवान, विष्णु एवं लक्ष्मी माता के दर्शन होते है.
केदारेश्वर महादेव मंदिर की पूजा परंपरा भी इसे विशेष बनाती है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव को बेलपत्र, दूध और गंगाजल अर्पित करने के साथ खिचड़ी का भोग लगाया जाता है. स्थानीय धार्मिक विश्वास है कि भगवान शिव स्वयं इस भोग को ग्रहण करने आते हैं.