Hariyali Amavasya 2026: आज हरियाली अमावस्या है. सावन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या कहा जाता है. हिंदू धर्म में यह दिन प्रकृति, पितरों और भगवान शिव को समर्पित माना गया है. इस दिन स्नान, दान, पौधे लगाने और पितृ तर्पण का विशेष धार्मिक महत्व है.
सावन का पूरा महीना प्रकृति के सौंदर्य और शिव भक्ति से भरा होता है. सावन के मध्य में आने वाली इस अमावस्या को पर्यावरण और मनुष्य के अटूट संबंध के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा-पाठ और प्रकृति की सेवा करने से देवी-देवताओं के साथ-साथ पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
हरियाली अमावस्या 2026 स्नान-दान शुभ मुहूर्त (Hariyali Amavasya 2026 Snan Daan Shubh Muhurat)
हरियाली अमावस्या की तिथि हरियाली अमावस्या का मुहूर्त 12 अगस्त को अर्धरात्रि में 1 बजकर 52 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन रात 11 बजकर 6 मिनट पर हो जाएगा.
स्नान-दान का मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 6 मिनट तक रहेगा
हरियाली अमावस्या का महत्व
हरियाली अमावस्या पर पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन पीपल, बरगद, नीम, आंवला, तुलसी या बेलपत्र का पौधा लगाने से देवताओं का वास और अक्षय पुण्य मिलता है. यह दिन पितरों की शांति के लिए विशेष माना गया है. पवित्र नदियों में स्नान के बाद तर्पण और पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
सावन की अमावस्या होने के कारण इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन किया जाता है. सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य और सुखी गृहस्थ जीवन के लिए भी इस दिन व्रत रखती हैं.
हरियाली अमावस्या की पूजा विधि (Hariyali Amavasya Pujan Vidhi)
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, सरोवर में स्नान करें या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें. फिर, सूर्य देव को अर्घ्य दें और अपने पितरों के निमित्त जल, तिल और फूल अर्पित कर तर्पण करें. भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करें तथा ऊं नमः शिवाय का जाप करें. पूजा के पश्चात अपनी पसंद या जरूरत के अनुसार कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और गरीबों को अन्न, वस्त्र या फल दान करें.