चित्तौड़गढ़ के व्यापारी से 2 करोड़ 45 लाख रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार कुख्यात तस्कर सुमता विश्नोई को पकड़ना पुलिस के लिए आसान नहीं था. पुलिस को जब उसके घर में छिपे होने की सूचना मिली तो टीम मौके पर पहुंची, लेकिन बाहर से सब कुछ सामान्य नजर आया. घर के बाहर कुत्ते छोड़े गए थे और अंदर से कोई हलचल दिखाई नहीं दे रही थी. पुलिस को शक हुआ कि सुमता घर के अंदर ही हो सकती है. इसके बाद पुलिस ने सुथार को बुलाया और लकड़ी का दरवाजा तुड़वाया. दरवाजा टूटते ही पुलिस के सामने कमरे में सुमता विश्नोई अपने एक बेटे के साथ मौजूद मिली. जैसे ही उसने एसीपी नरेंद्र कुमार पारीक को सामने देखा, उसने कहा-जय हिंद साहब.
पुलिस ने दूसरे बेटे तक पहुंचने के लिए कमरे के दरवाजे तोड़ने की तैयारी की तो सुमता ने पुलिस से कहा कि दरवाजा मत तोड़िए, मैं उसे बाहर निकालती हूं. इसके बाद पुलिस ने सुमता विश्नोई और उसके दोनों बेटों विनोद विश्नोई और मनीष विश्नोई को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया. अब तीनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है.
पुलिस पहुंची तो घर के बाहर थे कुत्ते
सुमता विश्नोई की गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं रहा. पुलिस को शनिवार को सूचना मिली कि सुमता अपने घर पर मौजूद है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम उसके घर पहुंची. लेकिन पुलिस के पहुंचने के बाद भी सुमता बाहर नहीं आई. घर के बाहर कुत्ते छोड़े गए थे. पुलिस ने आसपास से स्थिति को समझने की कोशिश की, लेकिन जब कोई दिखाई नहीं दिया तो टीम को शक हुआ कि आरोपी घर के अंदर ही छिपी हो सकती है. पुलिस ने घर के अंदर जाने का रास्ता तलाशा. लकड़ी का दरवाजा रास्ते में बाधा बन रहा था. इसके बाद सुथार को बुलाया गया और दरवाजा तुड़वाने की कार्रवाई शुरू हुई.
दरवाजा टूटा तो सामने दिखी सुमता
लकड़ी का दरवाजा टूटने के बाद पुलिस टीम अंदर पहुंची. एक कमरे में सुमता अपने एक बेटे के साथ मिली. पुलिस के सामने आते ही उसने एसीपी नरेंद्र कुमार पारीक को देखकर जय हिंद साहब कहा. पुलिस ने इसके बाद उसके दूसरे बेटे को बाहर निकालने के लिए दूसरे कमरे का दरवाजा तोड़ने की तैयारी की. तभी सुमता ने पुलिस से कहा कि दरवाजा तोड़ने की जरूरत नहीं है, वह खुद अपने बेटे को बाहर निकालती है. इसके बाद दोनों बेटों को भी बाहर लाया गया और तीनों को पुलिस थाने ले जाया गया. पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई चित्तौड़गढ़ के निम्बाहेड़ा के व्यापारी से हुई 2 करोड़ 45 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले में की गई.
पूरे मामले की शुरुआत चित्तौड़गढ़ के निम्बाहेड़ा निवासी व्यापारी पर्वत सिंह राजपुरोहित की शिकायत से हुई. पुलिस को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, सुमता विश्नोई व्यापारी के सामने अपनी पहचान और कथित प्रभाव का हवाला देती थी. वह दावा करती थी कि उसके पुलिस, कोर्ट और दूसरे प्रभावशाली लोगों से संपर्क हैं और वह कई तरह के काम करवा सकती है. इसी प्रभाव के भरोसे व्यापारी को दो बड़े काम कराने का भरोसा दिया गया.
प्रसाद के ठेके के नाम पर लिए 1.05 करोड़
व्यापारी की शिकायत के अनुसार, सुमता ने सांवलियाजी मंदिर ट्रस्ट में प्रसाद का ठेका दिलाने के नाम पर उससे 1 करोड़ 5 लाख रुपये लिए. व्यापारी को भरोसा दिया गया कि उसके संपर्कों के जरिए यह काम कराया जा सकता है. लेकिन आरोप है कि बाद में न तो ठेका मिला और न ही रकम वापस की गई. यहीं से व्यापारी को शक हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है. दूसरा मामला एक व्यक्ति की हाईकोर्ट से जमानत करवाने से जुड़ा बताया गया है. शिकायत के अनुसार, जमानत करवाने के नाम पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये लिए गए. व्यापारी के मुताबिक, इस काम का भी दावा पूरा नहीं हुआ और रकम वापस नहीं की गई. दोनों रकम को जोड़ने पर कुल राशि 2 करोड़ 45 लाख रुपये होती है. इसी रकम की कथित ठगी को लेकर सुमता विश्नोई के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की.
बेटों पर भी लेन-देन में शामिल होने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, व्यापारी ने अपनी शिकायत में सुमता के दोनों बेटों के साथ भी लेन-देन का आरोप लगाया था. इसी आधार पर पुलिस ने उसके दोनों बेटों विनोद विश्नोई और मनीष विश्नोई को भी गिरफ्तार किया है. अब पुलिस रिमांड के दौरान तीनों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि व्यापारी से ली गई रकम का क्या हुआ और कथित तौर पर रकम के लेन-देन में किस-किस की भूमिका थी.
16 मुकदमों वाली लेडी डाॅन
पुलिस के अनुसार, सुमता विश्नोई के खिलाफ जोधपुर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं. इन मामलों में मादक पदार्थों की तस्करी और लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले शामिल बताए गए हैं. पुलिस का कहना है कि सुमता कई मामलों में न्यायिक अभिरक्षा में भी रह चुकी है. उसके खिलाफ खास तौर पर मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामले ज्यादा बताए गए हैं. यानी इस बार जिस मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई है, वह उसके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों से अलग कथित धोखाधड़ी का मामला है. सुमता विश्नोई का नाम सिर्फ धोखाधड़ी के मामलों में ही नहीं, बल्कि मादक पदार्थों की तस्करी से भी जोड़ा जाता रहा है. पुलिस के मुताबिक, वह कुख्यात तस्कर प्रदीप ईरम की साथी रही है. आरोप है कि दोनों लंबे समय तक मिलकर तस्करी करते थे. पुलिस के अनुसार, मध्य प्रदेश से आने वाली डोडा-पोस्त की खेप को सुमता खुद एस्कॉर्ट करके लाती थी. बताया गया है कि तस्करी के दौरान उसके पास हथियार भी रहते थे.
पुलिस की वर्दी पहनकर भी तस्करी का आरोप
सुमता और प्रदीप ईरम से जुड़े पुराने तस्करी के नेटवर्क को लेकर पुलिस के पास कई गंभीर आरोप बताए गए हैं. पुलिस के मुताबिक, कुछ मौकों पर प्रदीप और उसके साथी पुलिस की वर्दी में भी तस्करी करते थे. इस तरह पुलिस की पहचान और वर्दी का इस्तेमाल कथित तौर पर तस्करी के लिए किए जाने की बात सामने आई है. हालांकि, इन पुराने मामलों से जुड़े आरोपों की विस्तृत स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है. तस्करी के दौरान सुमता की भूमिका को लेकर पुलिस के मुताबिक एक और बात सामने आई है. वह लंबी दूरी की यात्राओं में खुद वाहन चलाती थी और पूरी रात ड्राइव करने की क्षमता रखती थी. मध्य प्रदेश से आने वाली डोडा-पोस्त की खेप को एस्कॉर्ट करने की बात भी पुलिस रिकॉर्ड में सामने आई है. यानी पुलिस के मुताबिक, सुमता का कथित नेटवर्क सिर्फ किसी एक स्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि अलग-अलग राज्यों और जिलों तक फैला हुआ था.
पुराने तस्करी नेटवर्क और नई ठगी की जांच साथ-साथ
सुमता विश्नोई का मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पुलिस के मुताबिक उसके खिलाफ पहले से ही तस्करी और धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं. अब 2 करोड़ 45 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले में गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान मामले के बीच की कड़ियों को भी देख सकती है एक तरफ पुलिस व्यापारी से कथित ठगी की जांच कर रही है, दूसरी तरफ उसके पुराने तस्करी के मामलों का रिकॉर्ड भी सामने है. फिलहाल पुलिस की पूछताछ में यह साफ होना बाकी है कि व्यापारी से ली गई रकम का क्या हुआ और इस कथित ठगी में कौन-कौन लोग शामिल थे.