रक्षाबंधन के मौके पर ग्वालियर की केंद्रीय जेल में भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला. अपने अपराधों की सजा काट रहे और अंडरट्रायल भाइयों को राखी बांधने के लिए दूर-दराज के इलाकों से हजारों बहनें जेल पहुंचीं. सुबह 7 बजे से ही जेल के बाहर बहनों की लंबी कतार लग गई.
जेल प्रबंधन के मुताबिक, दोपहर 1 बजे तक 7000 से ज्यादा बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांध चुकी थीं. जेल में इस समय करीब 3400 बंदी मौजूद हैं. बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके जल्द जेल से बाहर आने की कामना की.
जेल प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए. जेल रोड पर बैरिकेडिंग कर आवागमन प्रतिबंधित किया गया, जबकि मोबाइल और पर्स सुरक्षा कारणों से बाहर ही रखवाए गए. जेल के अंदर आने वाली बहनों के लिए मिठाई और अन्य व्यवस्थाएं भी की गईं.
जेल अधीक्षक राकेश कुमार के मुताबिक, मिलाई का समय शाम 4 बजे तक रखा गया है, लेकिन अगर कोई बहन रह जाती है तो उसे भी भाई से राखी बांधने का मौका दिया जाएगा.
रक्षाबंधन पर अपने अपराधों की सजा काट रहे जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांधने दूर दराज के क्षेत्रों से ग्वालियर की सेंट्रल जेल पहुंची हजारों बहनों ने अपने भाइयों की आजादी की कामना की है.
बता दें कि सेंट्रल जेल में इस समय लगभग साढ़े 3400 बंदी मौजूद हैं, जिसमें सजायाफ्ता और अंडर ट्रायल कैदी भी हैं. सुबह 7:00 बजे से जेल के बाहर बहनों का तांता लग गया था. देखें VIDEO:-
जेलर के मुताबिक, 1:00 बजे तक लगभग 7000 से ज्यादा बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांध चुकी हैं. जेल प्रबंधन की तरफ से सुरक्षा के समुचित इंतजाम किए गए हैं.
जेल अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि आने वाली बहनों के लिए जेल के अंदर ही मिठाई वगैरह का इंतजाम किया गया है. जेल रोड को बैरिकेडिंग कर पूरी तरह से आवागमन के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है. मोबाइल और पर्स सुरक्षा की दृष्टि से बाहर ही रखवाए जा रहे हैं.
वहीं, दूसरी ओर जब अपने भाइयों को राखी बांधने आईं बहनों से बात की तो उनका कहना था कि एक साल बाद जब भाई से मिलते हैं तो अच्छा लगता है. हमारी तो यही प्रार्थना है कि हमारे भाई पिता और चाचा जल्दी छूट जाए. जेल अधीक्षक का कहना है कि वैसे तो शाम 4:00 बजे तक मिलाई संपन्न हो जाती है, लेकिन कुछ बहनें यदि शेष रहती हैं उन्हें भी भाइयों से मिलवाया जाएगा.