महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित 'आजतक धर्म संसद' के दौरान देश के प्रमुख संतों, विद्वानों और महाकाल मंदिर के पुजारियों ने धार्मिक आस्था, मंदिरों की पारदर्शिता और उज्जैन के पौराणिक महत्व पर खुलकर अपने विचार रखे.
अयोध्या के राम मंदिर में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के मुद्दों पर संतों ने गहरी चिंता व्यक्त की. स्वामी डॉ. अवधेश जी महाराज ने कहा, "हमारे 5 हजार साल के इतिहास और कई पीढ़ियों के संघर्ष और त्याग के बाद राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ है. देश के करोड़ों रामभक्तों ने अपनी अटूट श्रद्धा से इसके लिए चंदा दिया था, लेकिन ऐसी घटनाओं से श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुंचती है. किसी भी मंदिर या ज्योतिर्लिंग में ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए. मंदिरों में ऐसी व्यवस्था बने कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो और इसके ज़िम्मेदार लोगों को सख्त से सख्त सजा मिले.
पंडित शैलेंद्र व्यास ने इस मुद्दे पर कहा, "लंबी कानूनी लड़ाई के बाद भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है, जिन लोगों ने भी यह दुस्साहस किया है चाहे वे पर्दे के आगे हों या पीछे उन्हें कानून भी सजा देगा और भगवान भी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोषियों को सजा ज़रूर दिलाएंगे.

काल भैरव मंदिर के मुख्य पुजारी ओम प्रकाश चतुर्वेदी ने व्यवस्थात्मक पहलू पर बात करते हुए कहा, "चोरी में शामिल सभी दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. अक्सर विवादों में पुजारियों को निशाना बनाया जाता है, जबकि पुजारी का काम केवल पूजा-अर्चना करना है. मंदिर के प्रबंधन और वित्तीय रखरखाव के लिए ट्रस्टी और प्रशासन ज़िम्मेदार होते हैं.
महाकाल मंदिर की दान व्यवस्था और पारदर्शिता
मंदिरों में दान प्रबंधन के सवाल पर महाकाल मंदिर के पुजारी ने उज्जैन महाकाल मंदिर की पारदर्शी व्यवस्था की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मंदिर की सामान्य दानपेटी में आने वाले धन का उपयोग मंदिर के विकास, रख-रखाव और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए किया जाता है.
भगवान महाकाल के ठीक सामने रखी विशेष दानपेटी की राशि का 35 प्रतिशत हिस्सा पारंपरिक रूप से पुजारी परिवारों को जाता है. दानपेटियों की गिनती पूरी पारदर्शिता के साथ सीसीटीवी कैमरों की सीधी निगरानी में होती है. सारा पैसा विधिवत मंदिर समिति के आधिकारिक बैंक खातों में जमा कराया जाता है.
उज्जैन और महाकाल की अनोखी महिमा
अन्य ज्योतिर्लिंगों से उज्जैन की भिन्नता और विशेषता पर प्रकाश डालते हुए पंडित रमन त्रिवेदी ने बताया कि समय और काल की गणना की शुरुआत इसी पावन भूमि से होती है, इसलिए भगवान शिव को यहां 'महाकाल' कहा जाता है. 12 ज्योतिर्लिंगों में महाकाल का स्थान अत्यंत विशिष्ट है. यह देवताओं की नगरी है, जहां दर्शन मात्र से अकाल मृत्यु का भय टल जाता है. सावन के महीने में महाकाल की शाही सवारी के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं महाकाल के अनन्य भक्त हैं और उनके नेतृत्व में इस क्षेत्र का अभूतपूर्व विकास हो रहा है.

भस्म आरती का आध्यात्मिक संदेश
महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष ने विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के गूढ़ रहस्य को समझाते हुए कहा- सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल उज्जैन ही वह स्थान है जहां भगवान शिव भस्म धारण करते हैं यह भस्म विशेष रूप से उपलों की राख से तैयार की जाती है, जिसका वजन लगभग ढाई किलोग्राम होता है. यह एक गहरा आध्यात्मिक संदेश है. मानव जन्म के समय बच्चे का औसत वजन भी लगभग ढाई किलो होता है और मृत्यु के बाद शरीर की राख भी उतनी ही बचती है. भस्म आरती जीवन के आरंभ और अंत का प्रतीक है. शिव ने भस्म धारण कर संसार को यह संदेश दिया है कि अंततः सब कुछ निराकार और साकार के इसी चक्र में समाहित होना है."
काल भैरव में मदिरा अर्पण का धार्मिक रहस्य
काल भैरव मंदिर के मुख्य पुजारी ओम प्रकाश चतुर्वेदी ने मंदिर की परंपराओं पर बात की. काल भैरव को मदिरा अर्पित करने की परंपरा के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि मदिरा को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. काल भैरव के चरणों में मदिरा अर्पित करने का अर्थ अपनी भीतर की तमाम नकारात्मक ऊर्जा, विकारों और बुराइयों को भगवान को सौंप देना है, जिससे भक्त के जीवन में सकारात्मकता का संचार हो सके.