5 अगस्त 1914 को जर्मन सेना ने बेल्जियम के लीज शहर पर हमला किया था. इस बेवजह हमले से बेल्जियम को न चाहते हुए युद्ध शुरू करना पड़ा. इस तरह पहले विश्व युद्ध की पहली लड़ाई शुरू हुई. 4 अगस्त तक, जर्मन सेना की पहली, दूसरी और तीसरी टुकड़ियां, जिसमें लगभग 34 डिवीजनों थी, जर्मन मोर्चे के दाहिने हिस्से पर तैनात हो चुकी थीं. ये सैनिक बेल्जियम में घुसने के लिए तैयार थे. कुल मिलाकर 15 लाख जर्मन सैनिक बेल्जियम और फ्रांस की सीमा जमा हो चुके थे. पूर्व जर्मन चीफ ऑफ स्टाफ अल्फ्रेड वॉन ने एक प्लान बनाया था, जिसका नाम श्लीफेन योजना था. इसके तहत बेल्जियम से होते हुए फ्रांस में बड़े पर हमला करने की योजना थी. फील्ड मार्शल कार्ल वॉन बुलो के नेतृत्व वाली दूसरी सेना को लीज शहर पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था. लीज जर्मनी से बेल्जियम में जाने का एंट्री प्वाइंट था.
दरअसल, उस वक्त लीज शहर यूरोप का सबसे मजबूत सुरक्षा घेरे वाला एक सुरक्षित किलेबंद स्थान माना जाता था. लीज की बनावट और बसावट ऐसी थी जो इसे अभेद्य बनाता था. मीयूज नदी से ऊपर की ओर उठने वाली लगभग 500 फुट की खड़ी ढलान पर बने, लगभग 200 गज चौड़ी दीवार और भारी हथियारों से लैस 12 किलों की घेराबंदी थी. लीज को कई लोग यूरोप में सबसे अधिक किलेबंद स्थान मानते थे.
बुलो के 320,000 सैनिक ने 5 अगस्त को लीज और उसके किलों पर तैनात 35,000 सैनिकों पर हमला शुरू किया. जनरल ओटो वॉन एमिच की अगुआई में छह ब्रिगेडों को दूसरी सेना से अलग करके एक विशेष "मीयूज सेना" बनाई गई, जो लीज के रास्ते बाकी सैनिकों के लिए रास्ता बनती.
एमिच के सैनिकों को बेल्जियम पर आसान जीत की उम्मीद थी. जर्मन अधिकारियों का मानना था कि जब तक बाकी जर्मन सैनिक इकट्ठा हो रहे थे, वे लीज पर तब तक कब्जा कर लेंगे. वास्तव में, बेल्जियमवासियों ने शुरुआत से ही बहादुरी दिखाई. यह लड़ाई उनके सम्राट, राजा अल्बर्ट की अगुआई में लड़ी गई. उन्होंने पहले ही अपनी जनता से अपनी तटस्थता और स्वतंत्रता के लिए इस खतरे से हर कीमत पर लड़ने का रिक्वेस्ट किया था. 5 अगस्त के अंत तक, लीज के सभी 12 किले बेल्जियम के कब्जे में रहे.
आखिरकार, 15 अगस्त को लीज जर्मनों के हाथ में आ गया. लेकिन तब तक वे अपने सबसे शक्तिशाली जमीनी हथियार, विशाल तोपों का इस्तेमाल कर चुके थे. ऑस्ट्रियाई गोला-बारूद निर्माता कंपनी स्कोडा की बनाई एक प्रकार की तोप का बैरल 12 इंच (305 मिमी) का था. दूसरी तरफ जर्मनी के एसेन में क्रुप्स की बनाई तोप उससे भी कहीं अधिक विशाल थी. उसकासका बैरल 16.5 इंच (420 मिमी) का था. उस समय तक, सबसे बड़ी तोपों का आकार 13.5 इंच था और उनका इस्तेमाल ब्रिटिश नौसेना करती थी.
जमीन पर सबसे बड़ी तोपों का आकार केवल 11 इंच था. लीज पर भारी गोलाबारी 12 अगस्त को शुरू हुई. 15 अगस्त को, लीज के 12 किलों में से 11 पर जर्मनी का कब्जा हो गया . 12वें किले, फोर्ट लोंसिन की दीवारों को एक गोले से उड़ाने के बाद, एमिच और उनके साथी एरिक लुडेनडॉर्फ लोंसिन में दाखिल हुए, जहां उन्होंने लीज के कमांडर, जनरल जेरार्ड मैथ्यू लेमन को जीवित लेकिन बेहोश पाया. जर्मनों द्वारा बंदी बनाए जाने के बाद, उन्होंने जर्मनी से राजा अल्बर्ट को लिखा - मैं खुशी-खुशी अपनी जान दे देता, लेकिन मौत ने मुझे स्वीकार नहीं किया.
लीज पर कब्जा करने के लिए एमिच और लुडेनडॉर्फ को जर्मनी का सर्वोच्च सैन्य पदक, पोर ला मेरिट क्रॉस से सम्मानित किया गया. तीन दिन बाद, 18 अगस्त को बेल्जियम से होते हुए फ्रांस की ओर जर्मन सेना का बड़ा हमला शुरू हुआ. जर्मन सैनिकों के खिलाफ बेल्जियम के नागरिकों ने भी हथियार उठा लिये. लोग पेड़ों और झाड़ियों में छिपी जगहों से जर्मन सैनिकों पर गोली चलाने लगें. इनमें पेशेवर वाले स्नाइपर (फ्रैंक-टायरर्स) भी थे. इनके डर से , जर्मन सैनिकों ने बेल्जियम में पहले दिन से ही स्थानीय आबादी के खिलाफ कठोर रुख अपनाया. 5 अगस्त को ही जर्मनों ने न केवल आम नागरिकों पर गोली चलाना शुरू कर दिया था, बल्कि बेल्जियम के पादरियों की जानबूझकर हत्या भी कर दी थी. उनके बारे में जर्मन प्रचार में जोर देकर कहा गया था कि वे फ्रैंक-टायरर्स की गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे.
5 अगस्त को जर्मन चीफ ऑफ स्टाफ हेल्मुथ वॉन मोल्टके ने अपने ऑस्ट्रियाई समकक्ष कॉनराड वॉन होट्ज़ेंडॉर्फ को लिखा - बेल्जियम में हमारा आक्रमण निश्चित रूप से क्रूर है. लेकिन हम अपनी जान बचाने के लिए लड़ रहे हैं और जो भी हमारे रास्ते में आएगा उसे परिणाम भुगतने होंगे. कुल मिलाकर, जर्मन सैनिकों ने बेल्जियम में 5,521 और फ्रांस में 896 नागरिकों को मार डाला. इससे जर्मनी को बेल्जियम की घृणा का सामना करना पड़ा और कई विदेशी पर्यवेक्षकों की नजरों में उसकी छवि खराब हो गई. वहीं दूसरी ओर, लीज और अन्य जगहों पर जर्मन सेना की बढ़त के दौरान बेल्जियम के मजबूत प्रतिरोध ने इस छोटे से देश और उसके वीर राजा को दुनिया भर का सम्मान दिलाया. इस तरह इस लड़ाई ने यूरोप के सबसे विनाशकारी युद्ध यानि फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में प्रवेश करने वाले अन्य मित्र देशों के लिए एक शानदार उदाहरण और एक नेक उद्देश्य प्रस्तुत किया.