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क्या किसी वरदान से बनी थी बीयर? सबसे पहली बार किसने पी थी

बीयर से एक मजेदार किस्सा जुड़ा है. कहा जाता है कि एक देवी के वरदान से इंसानों ने बीयर बनाना सीखा था. उस देवी की प्रार्थना से जुड़े एक गीत में बीयर बनाने का पूरा प्रोसेस बताया गया है. चलिए जानते हैं क्या है पूरा किस्सा.

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सुमेरियन लोग बीयर को देवी का वरदान मानते थे (Photo - AI Generated)
सुमेरियन लोग बीयर को देवी का वरदान मानते थे (Photo - AI Generated)

बीयर की उत्पत्ति कब और कहां हुई? बीयर के आविष्कार को किसी विशेष संस्कृति या समय अवधि से जोड़ना मुश्किल है. फिर भी दुनिया का पहला फरमेंटेड ड्रिंक शायद 12,000 साल पहले अनाज की खेती के विकास के साथ ही अस्तित्व में आया होगा. वहीं अगर बीयर की बात करें तो यह करीब 4 या 5 हजार साल पहले इंसानों ने इसका स्वाद चखा होगा. 

सबसे पहले बीयर किसने बनाया और कब बना? इस सवाल का जवाब किसी समय आज के मिडिल ईस्ट में फली-फुली मेसोपेटामिया की सभ्यता के अवशेषों में मिले हैं. शायद सुमेरियन लोग ही वो पहले इंसान थे, जिन्होंने बीयर का स्वाद सबसे पहले चखा था. बीयर के इतिहास से जुड़ा एक फैक्ट आपको चौंका सकता है. दरअसल, सुमेरियन लोग बीयर को एक देवी का वरदान मानते थे और इसे महिलाएं ही तैयार करती थीं. सुमेरियन अवशेषों में मिट्टी के प्लेट पर खुदा ऐसा ही एक गीत मिला है, जिसमें बीयर बनाने की रेसिपी है और यह पूरा भजन या प्रार्थना - बीयर की देवी 'निनकासी' के लिए लिखी गई है.

पहली जौ से बनी बीयर का जन्म मिडिल ईस्ट में हुआ था. यहां बीयर बनाने के पुख्ता सबूत प्राचीन मेसोपोटामिया के सुमेरियन लोगों से लगभग 5,000 वर्ष पहले मिलते हैं. पुरातत्वविदों ने न केवल 3400 ईसा पूर्व के मिट्टी के बर्तन खोजे हैं जिन पर अभी भी बीयर के अवशेष चिपके हुए हैं. इसके साथ ही 'निनकासी की स्तुति' भी मिली है जो 1800 ईसा पूर्व में सुमेरियन बीयर की देवी को समर्पित एक प्रार्थना थी. उसमें महिला पुजारिनों द्वारा बनाई जाने वाली एक प्राचीन बीयर बनाने के प्रोसेस के बारे में बताया गया है. 

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देवी की प्रार्थना में लिखी थी बीयर बनाने की पूरी विधि 
'निनकासी की स्तुति ', जो प्राचीन सुमेरियन भाषा में कीलाकार लिपि के नाम से जानी जाने वाली प्राचीन लेखन पद्धति में मिट्टी की गोलियों पर लिखी गई थी. इसमें इतिहास की सबसे पुरानी बीयर रेसिपी मौजूद है.
सुमेरियन बीयर की देवी निनकासी को समर्पित इस कविता में बीयर बनाने का पूरा डिटेल दिया गया है. इसका इस्तेमाल आधुनिक शोधकर्ताओं ने सुमेरियन बीयर को फिर से बनाने के लिए भी किया.

आधुनिक शराब निर्माताओं ने निनकासी की कविता के अनुवादों का इस्तेमाल करके ऐसी बीयर बनाई, जिसके बारे में उनका दावा है कि यह मेसोपोटामिया के लोगों द्वारा चार हजार साल पहले पी जाने वाली बीयर के काफी करीब थी. पहली बार सुमेरियन बीयर बनाने की कोशिश सैन फ्रांसिस्को की बीयर बनाने वाली कंपनी एंकर ब्रूइंग में काम करने वाले फ्रिट्ज मेयटैग ने किया था. जब उन्होंने पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में एंथ्रोपोलॉजी के प्रोफेसर और  विशेषज्ञ सोलोमन काट्ज़ के एक लेख में निनकासी की कविता के बारे में पढ़ा.

आधुनिक समय में भी बनाई गई सुमेरियन बीयर
कैट्ज़ ने अपना लेख शिकागो विश्वविद्यालय के एंशिएंट कल्चरल स्टडी इंस्टीच्युट में सुमेरोलॉजी के प्रोफेसर मिगुएल सिविल द्वारा किए गए निनकासी के भजन के अनुवाद पर लिखा था. उन्होंने 1964 में इस भजन का अंग्रेजी अनुवाद किया था. मेयटैग ने कैट्ज़ से संपर्क किया, जो एंकर की सुमेरियन बियर को फिर से जिंदा करने के प्रोजेक्ट में मदद करने को तैयार हो गए. उन्होंने भजन में दिए गए प्रोसेस को फॉलो करते हुए सभी इनग्रिडिएंस का उपयोग करके निनकासी बियर के लिए एक नुस्खा तैयार किया.

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कैट्ज़ ने बाद में कहा कि आधुनिक शराब बनाने की तकनीकों के बारे में हमारी जानकारी के आधार पर, नुस्खे के कुछ पहलू गलत लग रहे थे. इसलिए, हमने मिगुएल सिविल को ढूंढा और निनकासी की कविता के एक हिस्से का फिर से अनुवाद कराया. इस तरह मेयटैग, कैट्ज़ और एंकर ब्रूअर्स ने काफी हद तक सुमेरियन बीयर तैयार कर ली. 

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इस बीयर में 3.5% अल्कोहल था. इस बीयर को 1989 में सैन फ्रांसिस्को में आयोजित माइक्रोब्रूअर्स सम्मेलन में बड़े-बड़े जारों में परोसा गया था. इसे पीने वाले स्ट्रॉ डुबोकर पीते थे, ठीक वैसे ही जैसे ऑर्कियोलॉजिस्ट द्वारा खोजी गई प्राचीन मुहरों में सुमेरियन लोगों को बीयर पीते हुए दिखाया गया है.

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