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अब 3 शहरों में Gen-अल्फा का प्रदर्शन, दो जगह तुरंत मान ली गईं मांगें

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर, उत्तराखंड के खटीमा और राजस्थान के बांसवाड़ा में बच्चों ने अपनी समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की. कहीं सड़क के लिए तिरंगा यात्रा निकली, कहीं स्कूल की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ धरना हुआ और कहीं शिक्षकों की कमी पर तालाबंदी की गई. तीनों जगह बच्चों के विरोध के बाद प्रशासन को मौके पर पहुंचकर समाधान की पहल करनी पड़ी.

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हमीरपुर, खटीमा और बांसवाड़ा में छात्रों का प्रदर्शन. (Photo: Screengrab)
हमीरपुर, खटीमा और बांसवाड़ा में छात्रों का प्रदर्शन. (Photo: Screengrab)

नई पीढ़ी के बच्चे अब अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर आवाज उठा रहे हैं. उत्तर प्रदेश के हमीरपुर, उत्तराखंड के खटीमा और राजस्थान के बांसवाड़ा में स्कूली छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने इसका उदाहरण सामने रखा है. तीनों जगह छात्रों की समस्याएं अलग थीं, लेकिन अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने का तरीका मुखर रहा.

हमीरपुर में बच्चों ने स्कूल तक सड़क बनवाने की मांग को लेकर हाथों में तिरंगा लेकर पांच किलोमीटर लंबी यात्रा निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंच गए. खटीमा में आवासीय विद्यालय के छात्रों ने खराब खाना, गंदा पानी और गंदे शौचालय समेत कई समस्याओं के खिलाफ स्कूल परिसर में धरना शुरू कर दिया. वहीं बांसवाड़ा में छात्रों ने शिक्षकों के खाली पद भरने की मांग को लेकर स्कूल गेट पर तालाबंदी कर दी.

तीनों जगह छात्रों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने आवाज उठाई. हमीरपुर में सड़क निर्माण का आश्वासन मिला. खटीमा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तत्काल संज्ञान लेने के बाद स्कूल की प्रधानाचार्य को हटाने का आदेश दिया गया. बांसवाड़ा में छात्रों की मांग पर शिक्षा विभाग ने तत्काल छह शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी किया, जिसके बाद धरना समाप्त हो गया.

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हमीरपुर में तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में ग्राम पंचायत चंदूपुर के गंगवा का डेरा और बच्ची का डेरा क्षेत्र के ग्रामीण और स्कूली बच्चे लंबे समय से खराब सड़क की समस्या से परेशान हैं. स्कूल जाने के लिए बच्चों को कच्ची और उबड़-खाबड़ सड़क से होकर गुजरना पड़ता है. बारिश के दौरान रास्ते पर कीचड़ होने से परेशानी और बढ़ जाती है.

इसी समस्या को लेकर स्कूली बच्चे और ग्रामीण हाथों में तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे. बच्चों ने करीब पांच किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली. कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सड़क बनवाने की मांग को लेकर नारेबाजी की. बच्चों का कहना था कि उन्हें रोज कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ता है. उनकी मांग थी कि स्कूल तक जाने वाली सड़क को पक्का कराया जाए, ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी न हो.

डीएम गेट पर बैठ गए छात्र और ग्रामीण

प्रदर्शनकारी छात्र और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम गेट पर बैठ गए. उन्होंने सड़क का काम शुरू होने तक मौके पर बैठे रहने की बात कही. प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया. एसडीएम और सीओ सदर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली. ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी बच्चों की परेशानी प्रशासन के सामने रखी. उनका कहना था कि लंबे समय से स्कूल तक जाने वाला रास्ता खराब है और बच्चों को इसी रास्ते से होकर पढ़ने के लिए जाना पड़ता है.

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हमीरपुर के ADM राकेश कुमार ने बताया कि ग्राम चंदूपुर के छात्रों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर उबड़-खाबड़ और कच्ची सड़क को पक्का कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और ज्ञापन दिया. ADM के मुताबिक, सड़क निर्माण के लिए वन विभाग की NOC मिल गई है. अब जल्द ही सड़क का निर्माण शुरू कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस रास्ते के निर्माण पर करीब एक करोड़ 81 लाख रुपये की लागत आएगी.

खटीमा में स्कूल की व्यवस्थाओं पर भड़के छात्र

दूसरी घटना उत्तराखंड के खटीमा की है. यहां सरकारी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के छात्रों ने स्कूल की व्यवस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. सोमवार शाम छात्रों ने विद्यालय परिसर में धरना शुरू किया. छात्रों ने खराब गुणवत्ता का खाना परोसे जाने, दूषित पानी और शौचालयों में गंदगी समेत कई समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई. छात्रों ने इन समस्याओं की जांच और व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए नारेबाजी की. दोपहर से ही छात्र एक-एक करके स्कूल परिसर में जुटने लगे थे. बाद में अभिभावक भी उनके साथ धरने में शामिल हो गए.

मामले की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंची. मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया और विद्यालय की प्रधानाचार्य भारती यादव को हटाने का आदेश दिया. मुख्यमंत्री की तरफ से व्यवस्था में सुधार का आश्वासन मिलने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने अपना धरना खत्म कर दिया.

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400 छात्र पढ़ते हैं आवासीय विद्यालय में

खटीमा के इस एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में कक्षा छह से 12वीं तक के करीब 400 जनजातीय समुदाय के छात्र पढ़ते हैं. छात्रों का आरोप था कि स्कूल में लंबे समय से खराब गुणवत्ता का भोजन परोसा जा रहा था. इसके अलावा दूषित पानी की आपूर्ति और शौचालयों में गंदगी की शिकायत भी छात्रों ने की. छात्रों का कहना था कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद व्यवस्थाओं में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ. अभिभावकों ने प्रधानाचार्य पर अभद्र व्यवहार करने और शिकायत करने पर धमकाने के आरोप भी लगाए.

बांसवाड़ा में शिक्षकों की कमी पर छात्रों ने जड़ा ताला

तीसरी घटना राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की है. कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बियापाड़ा में छात्रों ने शिक्षकों के रिक्त पद भरने की मांग को लेकर स्कूल गेट पर तालाबंदी कर दी. छात्रों की मांग थी कि विद्यालय में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को जल्द भरा जाए, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो.

इस दौरान कांग्रेस के कार्यकर्ता भी छात्रों के धरना प्रदर्शन में शामिल हुए और छात्रों की मांग का समर्थन किया. प्रदर्शन के दौरान शिक्षा विभाग में किए गए ट्रांसफर और तबादलों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया. प्रदर्शनकारियों ने छात्रों के हित में शिक्षकों के खाली पद जल्द भरने की मांग रखी.

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अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निकाला रास्ता

छात्रों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे. उन्होंने मामले को लेकर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी से तत्काल वार्ता करवाई. बातचीत के बाद विद्यालय में डेप्युटेशन पर तुरंत छह शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का आदेश करवाया गया. छह शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का आदेश मिलने के बाद छात्रों ने अपना धरना और प्रदर्शन समाप्त कर दिया. इस तरह शिक्षकों की कमी को लेकर शुरू हुआ विरोध तत्काल समाधान के आश्वासन के बाद खत्म हो गया.

तीन जगह, तीन समस्याएं और छात्रों की आवाज

हमीरपुर, खटीमा और बांसवाड़ा की तीनों घटनाओं में छात्रों की समस्याएं अलग थीं. हमीरपुर में बच्चे स्कूल तक पक्की सड़क की मांग को लेकर तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे. खटीमा में छात्र खराब भोजन, दूषित पानी और गंदे शौचालय को लेकर अपने ही विद्यालय में धरने पर बैठ गए. बांसवाड़ा में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्रों ने स्कूल गेट पर तालाबंदी कर दी.

तीनों मामलों में छात्रों की आवाज प्रशासन तक पहुंची और उसके बाद कार्रवाई या समाधान का भरोसा मिला. हमीरपुर में वन विभाग की NOC मिलने के बाद करीब एक करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण शुरू कराने की बात कही गई. खटीमा में प्रधानाचार्य को हटाने के आदेश के बाद छात्रों ने धरना खत्म किया. बांसवाड़ा में छह शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी होने के बाद छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया.

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इन घटनाओं में एक बात समान रही. छात्रों ने अपनी रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी और समाधान की मांग की. कहीं तिरंगा लेकर यात्रा निकली, कहीं स्कूल परिसर में धरना दिया गया और कहीं स्कूल गेट पर तालाबंदी की गई. तीनों जगहों पर छात्रों की मांगों पर प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा.
 

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