पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पेरिस दौरे से लौटने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर रोके जाने को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बदले की भावना के तहत उन्हें एयरपोर्ट पर दो घंटे से ज्यादा समय तक रोका गया और उनके साथ जानबूझकर ऐसा सलूक किया गया.
भगवंत मान ने बताया कि उन्हें पहले इस दौरे की अनुमति नहीं दी जा रही थी, लेकिन हाईकोर्ट के दखल के बाद वो वहां जा सके. लेकिन जब वो पेरिस से वापस लौटे, तो दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें रोक लिया गया.
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम के हेड (मनीष कुमार) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सगे भाई हैं. उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने मौका पाकर उनसे बदला लिया और उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की.
हालांकि, इस दावे और प्रशासनिक रिश्तों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. इस दौरान भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप भी लगाया.
इससे पहले अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी आरोप लगाया था कि तय सीमा से ज्यादा सामान या पैसे के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी को एयरपोर्ट पर रोका गया था.
'लोकतंत्र के चारों पिल्लर जंजीरों में जकड़े'
सीएम मान ने कहा कि पंजाब पहले दिन से ही बगावती और जुल्म के खिलाफ खड़ा होने वाला प्रदेश रहा है. पंजाब की 'आप' सरकार हमेशा जनता के हक की आवाज उठाती है. उन्होंने मतदाता सूचियों से 14 करोड़ वोट काटे जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ये लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है कि अब सरकारें खुद तय करने लगी हैं कि कौन वोट डालेगा और कौन नहीं.
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मान ने तंस कसते हुए कहा कि आज लोकतंत्र के चारों पिल्लर तानाशाही की जंजीरों में जकड़े जा रहे हैं, जिससे लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था से भरोसा उठता जा रहा है. उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावों के समय ही ईडी और सीबीआई के मामले सामने आते हैं और चुनाव खत्म होते ही वो सभी मामले बंद हो जाते हैं. उन्होंने एक नया शब्द गढ़ा और कहा कि देश में अब 'डेमोकेटर' यानी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए तानाशाहों का दौर आ गया है.