जब स्मार्टफोन हाथ से गिरकर टूट जाता है या सॉफ्टवेयर अपडेट की वजह से उसमें कोई खराबी आ जाती है, तो उसे ठीक कराना जरूरी हो जाता है. ऐसे में लोगों के पास दो ऑप्शन होते हैं. पहला, कंपनी का ऑफिशियल सर्विस सेंटर और दूसरा, लोकल रिपेयरिंग शॉप. लेकिन ज्यादातर लोग पैसे बचाने के चक्कर में लोकल रिपेयरिंग शॉप पर चले जाते हैं.
उन्हें लगता है कि यहां कम पैसे में काम हो जाएगा. लेकिन कई बार यही छोटी सी बचत भारी पड़ सकती है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि लोकल रिपेयरिंग शॉप पर लोगों के साथ कैसे धोखाधड़ी हो सकती है और ऑफिशियल सर्विस सेंटर जाना क्यों बेहतर हो सकता है.
जानिए कैसे लगता है चूना
लोकल रिपेयरिंग शॉप पर फोन ठीक कराने के नाम पर कई बार कस्टमर से ज्यादा पैसे ले लिए जाते हैं. यहां हर काम का रेट फिक्स नहीं होता. दुकानदार अपनी मर्जी से कीमत बता सकते हैं और कस्टमर को कई बार पता भी नहीं चलता कि उससे सही पैसे लिए जा रहे हैं या नहीं.
कई लोगों के स्मार्टफोन का डिस्प्ले टूट जाता है या उसमें कोई दूसरी खराबी आ जाती है. ऐसे में वे लोकल रिपेयरिंग शॉप पर पहुंच जाते हैं. यहां दुकानदार उन्हें दो ऑप्शन देते हैं. पहला ओरिजिनल पार्ट और दूसरा कंपैटिबल पार्ट. ओरिजिनल पार्ट को महंगा बताया जाता है, जबकि कंपैटिबल पार्ट कम कीमत में लगाने की बात कही जाती है.
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लेकिन परेशानी तब होती है, जब कस्टमर को यह पता ही नहीं चलता कि उसके फोन में कौन सा पार्ट लगाया जा रहा है. कई अनऑथराइज्ड दुकानों पर कंपनी के ओरिजिनल पार्ट्स आसानी से नहीं मिलते. ऐसे में दुकानदार कई बार दूसरे पार्ट्स को ओरिजिनल बताकर लगा सकते हैं. कस्टमर को लगता है कि उसके फोन में असली पार्ट लगा है, लेकिन हकीकत कुछ और हो सकती है. इसके लिए उससे हजारों रुपये भी वसूले जा सकते हैं.
कुछ दिन बाद पार्ट हो जाता है खराब
अगर फोन में कम क्वालिटी वाला पार्ट लगाया गया है, तो वह ज्यादा दिन तक नहीं चल पाता और जल्दी खराब हो सकता है. इसके बाद जब कस्टमर दोबारा उसी दुकान पर जाता है, तो कई बार दुकानदार जिम्मेदारी लेने से मना कर देते हैं.
ऐसे में पैसे बचाने के चक्कर में कस्टमर को दोबारा पैसे खर्च करने पड़ते हैं. यानी पहले रिपेयरिंग का खर्च और फिर दोबारा फोन ठीक कराने का खर्च. इस तरह आपकी छोटी सी बचत भी नुकसान में बदल सकती है.
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ऑफिशियल सर्विस सेंटर जाने का क्या फायदा?
वहीं, अगर आप कंपनी के ऑफिशियल सर्विस सेंटर पर जाते हैं, तो आपको रिपेयरिंग के लिए तय प्रक्रिया और पार्ट्स की जानकारी मिल सकती है. यहां कंपनी के असली पार्ट्स उपलब्ध होने पर उनका इस्तेमाल किया जाता है. रिपेयरिंग का खर्च भी आपको बताया जाता है और काम के बाद बिल मिलता है.
इसके अलावा, अगर आपका स्मार्टफोन वारंटी में है, तो सर्विस सेंटर पर उसकी वारंटी और रिपेयरिंग की शर्तों के हिसाब से मदद मिल सकती है. हालांकि, फोन टूटने या किसी तरह की डैमेज होने पर वारंटी लागू होगी या नहीं, यह कंपनी की शर्तों पर निर्भर करता है. इसलिए फोन ठीक कराने से पहले रिपेयरिंग का खर्च जरूर पूछें और बिल लेना न भूलें.
अगर आपके स्मार्टफोन में भी कोई खराबी आ जाती है, तो बिना जानकारी के किसी भी दुकान पर फोन ठीक कराने से बचें. रिपेयरिंग के लिए कंपनी के ऑफिशियल सर्विस सेंटर को प्राथमिकता दें. इससे आपको सही जानकारी मिलेगी, पार्ट्स के बारे में पता रहेगा और धोखाधड़ी का खतरा भी कम हो सकता है.