scorecardresearch
 

'डरिए मत, भागिए मत, शाह को सुनने का साहस दिखाएं...', संसद में 2 दिन के 'फाइनल राउंड' से पहले बोली BJP

मॉनसून सत्र में अब मात्र केवल दो दिन बचे हैं. बीजेपी अब कह रही है कि विपक्ष सदन में अमित शाह को सुनने का साहस दिखाए, वहीं राहुल गांधी का कहना है कि PM नरेंद्र मोदी जबतक माफी नहीं मांगते हैं विपक्ष का विरोध जारी रहेगा.

Advertisement
X
अमित शाह छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर व्यापक चर्चा के लिए तैयार हैं. (Photo: ITG)
अमित शाह छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर व्यापक चर्चा के लिए तैयार हैं. (Photo: ITG)

संसद का मॉनसून सत्र आखिरी फेज में पहुंच गया है. मॉनसून सत्र में अब केवल दो कामकाजी दिन बचे हैं, क्योंकि आखिरी दिन आमतौर पर दोपहर के आसपास सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया जाता है. 

कई मायनों में यह पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ा रहा. हालांकि सरकार फिर भी कई महत्वपूर्ण बिल पास कराने में सफल रही. अगर संसदीय बहस की  पर नजर डालें तो सरकार द्वारा लाए गए 'एंटी-पेपर लीक बिल' पर ही सार्थक चर्चा हुई; किसी अन्य बड़े कानून पर कोई खास बहस नहीं हुई. 

पूरे सत्र के दौरान विपक्ष सरकार की कड़ी आलोचना करता रहा. पहले हफ़्ते में विपक्ष ने छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाने पर लिया. जंतर-मंतर पर छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शन और विपक्षी दलों के लगातार दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने सत्र के पहले हफ़्ते के आखिर तक शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

शाह के आदेश पर हुई छात्रों के खिलाफ कार्रवाई: राहुल

प्रधान के इस्तीफ़े के बाद विपक्ष ने अपना ध्यान गृह मंत्री अमित शाह की ओर केंद्रित किया. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शाह के कहने पर की गई थी; सरकार ने इस आरोप को बार-बार और साफ़ तौर पर खारिज किया. 

Advertisement

इस राजनीतिक टकराव और बार-बार हो रहे हंगामे के बीच FCRA (Foreign Contribution Regulation Amendment) बिल पर चर्चा शुरू हुई. इस बिल पर शुरुआत में कुछ समूहों ने आपत्तियां जताईं, जिसके बाद अमित शाह ने संसद के अंदर ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की. उन्होंने कहा कि सरकार सभी संबंधित पक्षों की बात सुनने के बाद ही आगे बढ़ेगी. इन आश्वासनों के बावजूद FCRA बिल को लेकर अनिश्चितता बनी रही. 

सेशन में केवल दो दिन बचे हैं. सदन के आखिरी दिन में कामकाज कम ही होता है. ऐसे में राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह मामला फिर से उठा. कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने मांग की कि FCRA बिल को वापस लिया जाए, जबकि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाना चाहिए. सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार इस बिल को JPC के पास भेजने पर विचार कर रही है. 

इस सत्र के दौरान परिसीमन (डिलिमिटेशन) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. सरकार ने परिसीमन विधेयक को फिर से आगे बढ़ाने के लिए ज़ोरदार कोशिश की. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले पर राहुल गांधी के साथ तीन दौर की बातचीत की. हर बार राहुल गांधी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए. हालांकि, रिजिजू का रुख यह था कि अगर कांग्रेस विधेयक का समर्थन करने को तैयार हो, तो सरकार तुरंत ऐसी बैठक बुला सकती है; लेकिन अगर पार्टी ने पहले ही इसका विरोध करने का फ़ैसला कर लिया हो, तो बैठक बुलाने का कोई खास मतलब नहीं था.

Advertisement

अमित शाह का बयान सुनने का साहस दिखाएं

लगातार बने गतिरोध के बीच सरकार ने विपक्ष के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा.

सरकार ने कहा कि वह न केवल संसद में अमित शाह का बयान दिलवाने को तैयार है, बल्कि छात्र आंदोलन पर विस्तृत चर्चा करने के लिए भी तैयार है. हालांकि विपक्ष इससे सहमत नहीं हुआ और बार-बार हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित होती रही. 

BJP नेता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि आप सभी ने देखा है कि वे सत्र के दौरान सदन से भाग जाते हैं और सत्र के बाद विदेश चले जाते हैं. लेकिन विदेश जाने से पहले, थोड़ी हिम्मत जुटाएं और जाने से पहले गृह मंत्री अमित शाह का बयान सुनने का साहस दिखाएं."

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, "डरिए मत. भागिए मत. हम बिल्कुल स्पष्ट करना चाहते हैं. सदन से भागिए मत... हम आपको ऐसा न करने की चुनौती देते हैं." "भागिए मत, सुनिए. आपको सदन में बात सुननी चाहिए और फिर रांची जाना चाहिए. लेकिन आप न तो रांची जा रहे हैं और न ही सदन में बात सुन रहे हैं."

सरकारी सूत्रों के अनुसार, "सिर्फ़ बयान जारी करना एक औपचारिकता होगी; हम चाहते हैं कि इस पर ठीक से चर्चा हो, न कि सिर्फ़ बयान दिया जाए। गृह मंत्री अमित शाह न सिर्फ़ 20 जुलाई के मार्च को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देने के लिए तैयार हैं, बल्कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े सभी मुद्दों पर भी बात करने को तैयार हैं."

Advertisement

PM के माफी मांगने तक विरोध जारी रहेगा

कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया कि संसद में उनका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के लिए माफी नहीं मांगते.

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश को संसद में "सामान्य विषयों" पर शाह की राय में कोई दिलचस्पी नहीं है और वे यह जानना चाहते हैं कि क्या उन्होंने विरोध कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था."

सरकारी सूत्रों का कहना है कि सत्र के आखिरी दो दिनों में छात्रों से जुड़े मुद्दे पर विस्तार से बहस कराने की कोशिश की जाएगी, ताकि विपक्ष के नेताओं, सत्ताधारी पार्टी के सांसदों और गृह मंत्री अमित शाह को सदन के सामने अपना पक्ष विस्तार से रखने का मौका मिल सके. 

अब मुख्य सवाल यह है कि मॉनसून सत्र के बचे हुए दिन कैसे बीतेंगे और क्या सत्र खत्म होने से पहले संसद किसी सार्थक बहस को अंजाम दे पाएगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement