सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन और जातिगत आरक्षण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने यह साफ कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति दूसरे धर्म में धर्मांतरण करता है, तो उसे हिंदू जाति व्यवस्था के आधार पर मिलने वाले आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा. अदालत के अनुसार, हिंदू सामाजिक व्यवस्था के तहत मिलने वाला सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन धर्म परिवर्तन के बाद नए धर्म की सामाजिक व्यवस्था में अपने आप लागू नहीं हो सकता. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें तमिलनाडु सरकार द्वारा धर्मांतरित मुसलमानों को आरक्षण देने के आदेश को रद्द कर दिया गया था.