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पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर हंगामा, विपक्ष बोला- उनपर 'मास्टर अब्यूजर' की डिग्री

प्रधानमंत्री मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान और महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष ने निशाना साधा. कांग्रेस समेत कई दलों ने इसे राजनीति और असहमति जताने वालों को निशाना बनाने की कोशिश बताया, जबकि बीजेपी ने प्रधानमंत्री के संबोधन को विकसित और आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप बताया.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन पर विपक्ष और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज. (Photo- PTI)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन पर विपक्ष और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज. (Photo- PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 80वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी और महिला आरक्षण को लेकर विपक्षी दलों ने शनिवार को निशाना साधा. विपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्वतंत्रता दिवस के मंच का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं करना चाहिए था. वहीं, बीजेपी नेताओं ने प्रधानमंत्री के संबोधन को विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने का रोडमैप बताया.

प्रधानमंत्री ने अपने लगातार 13वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में राजनीतिक दलों से मतभेदों से ऊपर उठकर विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की अपील की. उन्होंने युवाओं से विकसित भारत बनाने में आगे आने का आह्वान किया और ‘दिमागी नक्सल’ के बहकावे में न आने की चेतावनी दी.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री पर कांग्रेस के कामों का श्रेय लेने का आरोप लगाया. वहीं, जयराम रमेश ने X पर लिखा, 'पहले वह अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहते थे. अब उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं. यह उनकी हताशा का साफ संकेत है. अलग बात है कि वह आखिर में वही करते हैं, जिसकी ये तथाकथित ‘अर्बन नक्सल’ या अब ‘दिमागी नक्सल’ मांग करते हैं या वकालत करते हैं. यूं ही नहीं प्रधानमंत्री के पास ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ में ‘मास्टर एब्यूजर’ की MA डिग्री है.'

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महिला आरक्षण पर कांग्रेस का बयान

जयराम रमेश ने महिला आरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री की अपील को भी ‘बेईमान’ बताया. उन्होंने कहा कि सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम सर्वसम्मति से पारित हुआ था, लेकिन बीजेपी सरकार की वजह से इसे 2024 के चुनाव से लागू नहीं किया गया.

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि लाल किले से झूठ नहीं बोलना चाहिए और केंद्र से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने की मांग की. CPI(M) महासचिव एम ए बेबी ने ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को गंभीर आरोप बताया और कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के बजाय मौजूदा सीटों पर लागू किया जाना चाहिए.

CPI महासचिव डी राजा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर भी असहमति जताने वालों को निशाना बनाया. वहीं, TMC नेता साकेत गोखले ने भी प्रधानमंत्री पर स्वतंत्रता दिवस के मंच से अपने आलोचकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया.

बीजेपी ने क्या कहा 

महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है. विपक्षी दल इसे परिसीमन का इंतजार किए बिना लागू करने की मांग कर रहे हैं. दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं ने प्रधानमंत्री के संबोधन को देश के विकास, आत्मनिर्भरता और युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में स्पष्ट संदेश बताया.

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