ट्रेन से सफर करते हुए हमलोगों को IRCTC की वर्दी पहनकर चाय, कॉफी, पानी बेचते वेंडर दिख जाते हैं. ये वेंडर आईआरसीटीसी की लोगो वाली ड्रेस जरूर पहने रहते हैं, लेकिन इन्हें कंपनी से सैलरी नहीं मिलती है. पैसेंजर को ऐसा ही लगता है कि ये आईआरसीटीसी के ही स्टाफ हैं, जो ट्रेन में पानी, बिस्किट, चाय या खाने-पीने के और सामान बेचते रहते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. चलिए जानते हैं - अगर इन्हें IRCTC सैलरी नहीं देती तो फिर इनकी कमाई कैसे होती है?
दरअसल, ट्रेन में कैटरिंग का पूरा जिम्मा आईआरसीटीसी प्राइवेट ठेकेदारों को दे देती है. इन ठेकेदारों के अंदर वेंडर्स काम करते हैं. ऐसे में ठेकेदार और वेंडर्स के बीच कमाई का गणित पूरी तरह से कांट्रेक्टर द्वारा तय किए गए प्राइवेट कमीशन पर चलता है.
कैसे होती है ट्रेन में सामान बेचने वालों की कमाई
ट्रेन में पानी और चाय बेचने वाले एक वेंडर के मुताबिक, अधिकांश प्राइवेट ठेकेदार अपने वेंडर्स को सामान बेचने के लिए 10% से 25% तक का कमीशन देते हैं. अलग- अलग प्रोडक्ट के ऊपर अलग कमीशन अलग- अलग होता है.
IRCTC ट्रेनों में कैटरिंग सर्विस के लिए बड़े प्राइवेट वेंडर्स या एजेंसियों को टेंडर यानी लाइसेंस देती है. इसके बदले ठेकेदार IRCTC को करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लाइसेंस फीस चुकाते हैं. लाइसेंस मिलने के बाद, ट्रेन के अंदर सामान बेचने के लिए लड़कों (वेंडर्स) को काम पर रखना और उन्हें सैलरी या कमीशन देना पूरी तरह से उस ठेकेदार का निजी फैसला होता है.
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चूंकि, ट्रेन में बिना आईआरसीटीसी के परमिशन के समान बेचना मना है. इसलिए IRCTC से लाइसेंस प्राप्त ठेकेदार के वेंडर्स भी कंपनी की वर्दी पहनकर ही समान बेचते हैं. लेकिन, वे सीधे तौर पर आईआरसीटीसी से नहीं जुड़े होते हैं. एक तरह से ट्रेन में सामान बेचने वाले आईआरसीटीसी के थर्ड पार्टी वेंडर हैं.