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लोकसभा चुनावों से पहले BJP की दक्षिण से आस क्यों बढ़ गई है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने दो दिन के दौरे पर पहुंचे हैं आंध्रप्रदेश और केरल. लोकसभा चुनाव के साल में प्रधानमंत्री का ये दौरा कितना अहम है, नीति आयोग की ग़रीबी पर रिपोर्ट क्या कहती है और अमेरिका में इस बरस राष्ट्रपति चुनाव हैं. ट्रम्प पर क्रिमिनल केसेस चल रहे हैं, दो राज्यों में चुनाव लड़ने पर रोक लग चुकी है. इसके बावजूद नतीजो में बाकी दावेदारों से क्यों बहुत आगे हैं ट्रम्प? सुनिए ‘दिन भर’ में.

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अयोध्या में प्राणप्रतिष्ठा से ठीक 6 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के आंध्र प्रदेश-केरल दौरे पर हैं. पीएम आज आंध्र प्रदेश में पहुंच चुके हैं. उन्होंने लेपाक्षी में वीरभद्र मंदिर में पूजा-अर्चना भी की. उसके बाद वह तेलुगु भाषा में रंगनाथ रामायण के छंद भी सुने. आंध्र प्रदेश के बाद वो केरल दौरे पर भी जाएंगे. इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी 4,000 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे.
इसके बाद, पीएम मोदी सत्यसाई जिले के पलासमुद्रम पहुंचे. जहां उन्होंने नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम, इनडायरेक्ट टैक्स एंड नार्कोटिक्स (NACIN) इंस्टीट्यूट का इनॉगरेशन किया. यहां मोदी ने कहा कि आज पूरा देश राममय है. खुद महात्मा गांधी भी देश में राम राज्य की बात करते थे.

दक्षिण में BJP की उम्मीद पूरी होगी?


आंध्रप्रदेश के बाद कल सुबह केरल के गुरुवयूर मंदिर में पूजा और दर्शन करेंगे, साथ ही कल शाम केरल के कोच्चि में रोड शो भी करेंग.
लोक सभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी इस बार दक्षिण भारत पर खासतौर से ध्यान दे रही है. दरअसल विपक्ष की मौजूदगी उत्तर की बजाय दक्षिण भारत में ज्यादा है. इसी की काट निकालने के लिए प्रधानमंत्री मोदी साउथ इंडिया के दौरे पर हैं. इससे पहले 13 जनवरी को ही पीएम ने केंद्रीय मंत्री मुरुगल के यहां पोंगल त्योहार मनाया था, जबकि 25 दिसंबर को केरल के लोगों के बीच क्रिसमस भी मनाया था. पीएम के दौरे से आंध्र प्रदेश और खासकर केरल में क्या सियासी संदेश छुपे हैं,क्या मोदी के इस दौरे बीजेपी के कैडर का उत्साह बढ़ेगा? दोनों राज्यों में मुद्दे क्या हैं, जिसे बीजेपी अपने पक्ष में भुनाना चाहती है, सुनिए ‘दिन भर’ की पहली ख़बर में

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गरीबी के नए पैमाने क्या?


नीति आयोग ने देश में गरीबी को एक रिपोर्ट जारी किया है. 2022-23 के लिए जारी नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा कि पिछले 9 साल में 24.82 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी रेखा यानी Multidimensional Poverty से बाहर निकले हैं. NITI आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में बहुआयामी गरीबी 2013-14 में 29.17 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में मात्र 11.28 प्रतिशत रह गई है. इस अवधि के दौरान लगभग 24.82 करोड़ लोग इस ब्रैकेट से बाहर निकल गए.
नीति आयोग के मुताबिक बहुआयामी गरीबी में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में बदलावों के आधार पर गरीबों का आकलन किया जाता है. इन्हें विकास के 12 अलग-अलग इंडेक्स पर मापा जाता है. इनमें पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूलों में उपस्थिति, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते शामिल हैं.
अगर हम राज्यों की बात करें तो यूपी में पिछले 9 सालों में सबसे ज्यादा 5.94 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं. दूसरे नंबर पर बिहार है, जहां 3.77 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं, जबकि मध्य प्रदेश में 2.30 करोड़ और राजस्थान में 1.87 करोड़ लोग गरीबी रेखा से निकले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक गरीब राज्यों में बेहद तेज रफ्तार के साथ गरीबी घटी है जिससे आर्थिक असामनता में कमी आई है.

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नीति आयोग ने जो मानक तय किये हैं. वो गरीबी मापने के क्या सही तरीका है, बाकी और कौन से देश इस मानक को यूज करते हैं, सुनिए ‘दिन भर’ की दूसरी ख़बर में.

 

मुश्किलों के बावजूद सबसे आगे ट्रंप

अमेरिका में इसी बरस राष्ट्रपति चुनने के लिए चुनाव होना है.अभी वहां अपने कैंडिडेट चुनने के लिए पार्टियों में इंटर्नल चुनाव हो रहे हैं.


भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने के मजबूत दावेदार बताए जा रहे थे,आज उन्होंने खुद ही इसकी घोषणा की. उनका ये ऐलान अमेरिका के एक राज्य आयोवा मे उनकी हार के बाद आया. ट्रम्प इस चुनाव के परिणामों में टॉप पर रहे.

4 क्रिमिनल केसेस और 2 अमेरिकी राज्यों में उम्मीदवारी की रेस से बाहर होने के बाद भी डोनाल्ड ट्रम्प की ये पहली जीत है. और इस जीत के साथ रिपब्लिकन पार्टी में ट्रम्प सबसे मजबूत दावेदार बन चुके हैं.

जियोग्राफिकली छोटे से इस अमेरिकी राज्य आयोवा में आए परिणाम अमेरिका की राजनीति के बारे में क्या बताते हैं? ट्रम्प पर क्रिमिनल केसेस चल रहे हैं, दो राज्यों में चुनाव लड़ने पर ही रोक लग चुकी है. इसके बावजूद नतीजो में बाकी दावेदारों से बहुत आगे हैं ट्रम्प? उनकी इस मजबूती के क्या फैक्टर्स हैं, सुनिए दिन भर की आखिरी ख़बर में.

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