राजस्थान के जयपुर में नवरात्रि के साथ दशहरे की तैयारियां तेज हो गई हैं. शहर की रावण मंडी में छोटे से लेकर विशालकाय रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं. यहां एक फीट से लेकर 40 फीट तक के रावण मिल रहे हैं. अब तक करीब 1500 से 2000 पुतले बनकर तैयार हो चुके हैं. कई पुतले ग्राहकों तक पहुंचाए जा चुके हैं, जबकि कारीगर बाकी ऑर्डर पूरे करने में जुटे हैं.
दशहरे पर रामलीला के आखिरी दिन रावण दहन किया जाता है. यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. अब शहर के बड़े मैदानों के साथ कॉलोनियों और सोसायटियों में भी रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. ऐसे में जयपुर की रावण मंडी में इन दिनों काफी रौनक है.
1 फीट से 40 फीट तक के रावण
जयपुर की रावण मंडी में अलग-अलग आकार के पुतले तैयार किए जा रहे हैं. यहां एक फीट के छोटे रावण से लेकर 40 फीट तक के विशाल पुतले उपलब्ध हैं. रंग-बिरंगे कागजों और चमकदार सजावट से इन्हें आकर्षक बनाया जा रहा है.
कारीगरों का कहना है कि अब तक करीब 1500 से 2000 पुतले तैयार हो चुके हैं. कुछ पुतले ऑर्डर के अनुसार भेजे जा चुके हैं. बाकी पुतलों पर काम जारी है, ताकि दशहरे से पहले ग्राहकों को उनकी डिलीवरी दी जा सके. इस बीच मौसम में बदलाव और बारिश ने कारीगरों की परेशानी बढ़ा दी है. तैयार पुतलों को कई जगह ढककर रखा गया है. कुछ पुतले बारिश में भीगने से प्रभावित भी हुए हैं. इसके बावजूद कारीगर समय पर ऑर्डर पूरे करने में जुटे हैं.
कारीगरों के मुताबिक, रावण बनाने का काम करीब ढाई से तीन महीने पहले शुरू हो जाता है. पुतले तैयार करने के लिए बांस, अखबार, रंगीन कागज, मैदे की लेई और ग्लू का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें कई दिनों की मेहनत लगती है.
300 रुपये से 35 हजार रुपये तक कीमत
रावण के पुतले बनाना कई परिवारों की आमदनी का जरिया है. दशहरे के मौसम में कारीगरों को बड़ी संख्या में ऑर्डर मिलते हैं. छोटे से छोटे एक फीट के रावण की कीमत करीब 300 रुपये से शुरू होती है. वहीं, बड़े पुतलों की कीमत 30 से 35 हजार रुपये तक पहुंच जाती है.
यह भी पढ़ें: दिल्ली की रामलीला में रावण के साथ जलेगा 30 फीट का कॉकरोच, आयोजकों ने बताया- स्वच्छता का संदेश देने की पहल
पुतले तैयार होने के बाद ग्राहकों को सौंप दिए जाते हैं. उनमें आतिशबाजी भरने का काम आयोजनकर्ता अपनी जरूरत के मुताबिक खुद करते हैं. जयपुर की रावण मंडी के अलावा शहर के अलग-अलग इलाकों में भी रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार किए जा रहे हैं.