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'राष्ट्रविरोधी, दिमागी नक्सल, टुकड़े-टुकड़े गैंग...', नेहा बोरा बोलीं- इन तमगों ने ही हमें एकजुट किया

AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि भाजपा द्वारा दिए गए 'दिमागी नक्सल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे लेबलों ने ही आम जनता, छात्रों और विपक्ष को एकजुट किया है. उन्होंने चेतावनी दी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के हटने और एसआईआर प्रक्रिया रुकने तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.

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नेहा बोरा ने कहा कि यह लड़ाई लोकतंत्र और वोट के अधिकार की है. (Photo-PTI)
नेहा बोरा ने कहा कि यह लड़ाई लोकतंत्र और वोट के अधिकार की है. (Photo-PTI)

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बीजेपी पर निशाना साधा है. 

नेहा बोरा ने कहा, "जब मैं कहती हूं 'हम भारत के लोग बनाम बीजेपी', तो इस एकजुटता को असल में बीजेपी ने ही मजबूत किया है. कभी 'आंदोलनजीवी', कभी 'खान मार्केट गैंग' तो कभी 'दिमागी नक्सल' बीजेपी ने आम लोगों को समय-समय पर जो लेबल दिए हैं, हम सभी उन्हीं के कारण एक हुए हैं. एक तरह से हम बीजेपी की वजह से ही एकजुट हैं."

इंडिया टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में बोरा ने कहा कि जब वह 'हम भारत के लोग बनाम भाजपा' की बात करती हैं, तो इस एकजुटता के पीछे भी भाजपा की ओर से आलोचकों को दिए गए ऐसे ही लेबल की भूमिका है. उनके अनुसार, SIR को लेकर उठी चिंताओं ने छात्रों, विपक्षी दलों और आम नागरिकों को एक मंच पर आने का मौका दिया है. यह लड़ाई लोकतंत्र और नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ी है.

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नेहा बोरा ने कहा कि हालिया रैली और प्रेस कॉन्फ्रेंस से स्पष्ट है कि अलग-अलग संगठनों के प्रयास एक साझा आंदोलन का हिस्सा हैं. उन्होंने इस संघर्ष को लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा बताते हुए कहा कि इसका मकसद सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक की भागीदारी को सुरक्षित रखना है.

Neha Bora said the protests will continue until CEC Gyanesh Kumar is ousted.

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चुनाव आयोग के फैसलों पर भी उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की राजनीतिक भूमिका को केवल इस आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए कि वे किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं या नहीं. बोरा के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का असर हर नागरिक के मताधिकार पर पड़ सकता है.

बोरा ने चुनाव आयुक्तों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारियों को कथित तौर पर भेजे गए ईमेल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग में कुछ फैसले एकतरफा लिए जा रहे हैं, जबकि कुछ निर्णयों को टाला जा रहा है.

उन्होंने कहा कि 'वोट चोरी' के आरोपों और देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में चुनाव आयुक्तों के बयानों और संवाद को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए. बोरा ने तर्क दिया कि यदि विपक्षी दलों या छात्र कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जा रही है, तो कम से कम उन चुनाव आयुक्तों की बात सुनी जानी चाहिए जिन्हें मौजूदा सरकार ने नियुक्त किया था. हालांकि, चुनाव आयोग के कामकाज और कथित ईमेल से जुड़े उनके आरोपों पर आयोग का कोई बयान नहीं आया है.

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प्रदर्शन के विस्तार पर बात करते हुए AISA अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस कार्रवाई के कथित वीडियो सामने आने के बावजूद प्रदर्शनकारियों की भागीदारी जारी रहना बताता है कि आंदोलन का असर छात्र संगठनों से आगे भी पहुंच रहा है. उन्होंने कहा कि जब दमन का सामना जनाक्रोश और लोगों की लामबंदी से होता है, तो सरकार को स्थिति की गंभीरता समझनी चाहिए. बोरा ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जैसे मुद्दों से हुई थी, लेकिन अब यह मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों तक पहुंच गया है. उनके मुताबिक, यह मुद्दा केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के व्यापक वर्गों के बीच भी चर्चा का विषय बन रहा है.

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कांग्रेस में शामिल होने के सवाल नेहा का जवाब

प्रदर्शनों के दौरान मिली पहचान और किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की संभावना पर सवाल पूछे जाने पर बोरा ने कहा कि वह CPI(ML) लिबरेशन से जुड़ी रहेंगी. उन्होंने इस धारणा को खारिज किया कि राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव डालने का रास्ता केवल स्थापित बड़ी पार्टियों से होकर गुजरता है.

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बोरा ने कहा कि छात्र नेताओं और आम नागरिकों के नेतृत्व वाले आंदोलन भी राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श को आकार दे सकते हैं. उनके शब्दों में, किसी संगठन का काम केवल पक्ष बदलना नहीं, बल्कि जिस विचार और पक्ष के साथ वह खड़ा है, उसे मजबूत करना होना चाहिए.

AISA और कॉकरोच जनता पार्टी  के संबंधों पर भी उन्होंने कहा कि लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग संगठनों के साथ काम करने की गुंजाइश बनी रहनी चाहिए. उनके अनुसार, अधिक संगठन और लोगों की भागीदारी आंदोलन को व्यापक बना सकती है.

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'ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR रोकने तक जारी रहेगा आंदोलन'

आंदोलन के अंतिम लक्ष्य पर नेहा बोरा ने स्पष्ट कहा कि यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह रोकने तक जारी रहेगा. उन्होंने दावा किया कि आंदोलन मौजूदा शासन में सत्ता के कथित केंद्रीकरण के खिलाफ भी एक बड़ा राजनीतिक संदेश देगा. प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों से बाहर जुटने के सवाल पर बोरा ने कहा कि संविधान नागरिकों को विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध के लिए उपलब्ध जगह को सीमित कर रही है.

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