नेहा बोरा (Neha Bora) एक छात्र कार्यकर्ता हैं. वह ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर काम कर रही है. नेहा मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं. उनके पिता भारतीय सेना में थे. नेहा थिएटर आर्टिस्ट भी हैं.
उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने अंबेडकर यूनिवर्सिटी से एमए किया. फिलहाल वह जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी जेएनयू के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स से पीएचडी कर रही हैं. उनकी पीएचडी असिस्टेंट प्रोफेसर ब्रह्म प्रकाश के मार्गदर्शन में चल रही है.
नेहा बोरा साल 2026 में दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आईं. इन प्रदर्शनों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी. यह मांग पेपर लीक और नीट परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर उठाई गई थी.
नेहा ने सोनम वांगचुक के साथ दिल्ली में 23 दिन तक भूख हड़ताल की.
AISA चीफ नेहा बोरा के मंदिरों और पुजारियों को लेकर दिए गए विवादित बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. बीजेपी ने उनके बयान को हिंदू धर्म का अपमान बताया है और कांग्रेस पर निशाना साधा है.
नेहा बोरा ने चौथी बार पीस बॉन्ड भरने और उस पर दस्तखत करने से इनकार किया, जिसके बाद एसईएम कोर्ट ने उन्हें 20 नवंबर 2026 को फिर पेश होने का आदेश दिया. उनके वकील और संगठन का कहना है कि यह बॉन्ड शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने के अधिकार पर रोक लगाने का जरिया है.
नेहा बोरा के खिलाफ दिल्ली पुलिस कार्रवाई कर सकती है. स्पेशल एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होकर नेहा बोरा को एक साल के लिए शांति बनाए रखने वाला पीस बॉन्ड भरना था. हालांकि, नेहा बोरा ने इस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है. उनका मानना है कि यह पीस बॉन्ड नागरिकों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का एक तरीका है.
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद 10 हजार रुपये के पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि ऐसे बॉन्ड का इस्तेमाल लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए किया जा सकता है.
नेहा बोरा ने कहा कि वे पीस बॉन्ड पर साइन नहीं करेंगी. उन्होंने कहा कि इस बॉन्ड पर साइन करना यह भी दर्शाता है कि इस देश में किसी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए 'पीस बॉन्ड' इन्वोक किया जा सकता है.
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली. कोर्ट ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के 10 हजार रुपये के बॉन्ड और शांति बनाए रखने से जुड़े नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी.
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने पर्सनल बॉन्ड से जुड़े नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी. साथ ही, मजिस्ट्रेट को आगे की प्रक्रिया के संबंध में अहम निर्देश दिए हैं.
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने 10 हजार रुपये के बॉन्ड से जुड़े नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. कोर्ट ने उनकी याचिका पर क्या फैसला सुनाया और आगे की प्रक्रिया को लेकर क्या कहा, जानिए.
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 23 अक्टूबर को पीपल अगेंस्ट SIR गठबंधन का देशव्यापी प्रदर्शन होगा. पराकला प्रभाकर समेत कई चेहरे शामिल हो सकते हैं. वहीं, बीजेपी SIR पर विपक्ष को जवाब देने के लिए देशभर में पदयात्राएं निकालेगी.
दिल्ली हाई कोर्ट ने नेहा बोरा के निजी मुचलके वाले नोटिस पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रखा है और कल आदेश सुनाएगा. सुनवाई में कथित सत्ता परिवर्तन वाली बैठक, छह एफआईआर और 12 उल्लंघनों के सरकारी दावे के बीच कोर्ट ने बैड बॉय की छवि और अनुच्छेद 21 से जुड़े सवाल उठाए.
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा के पर्सनल बॉन्ड मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. कल इस मामले में फैसला सुनाया जाएगा. नेहा ने SEM के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उनसे 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने को कहा गया है.
दिल्ली उच्च न्यायालय आज नेहा बोरा द्वारा दायर याचिका पर एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई करने जा रहा है. नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस द्वारा दिए गए नोटिस और स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एससीएम) कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. पुलिस ने 17 अक्टूबर को प्रिवेंटिव कस्टडी से रिहा करते समय नेहा बोरा को 10,000 रुपये के बॉन्ड के साथ मामले की जांच पूरी होने तक शांति बनाए रखने का निर्देश दिया था.
दिल्ली हाईकोर्ट में आज आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई होगी. नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें 17 अक्टूबर को प्रिवेंटिव कस्टडी से रिहाई के समय 10,000 रुपये के बॉन्ड और शांति बनाए रखने की अंडरटेकिंग मांगी गई थी. नेहा बोरा का कहना है कि पुलिस का यह कदम अनुचित है और उन्हें इसमें अदालत से तुरंत राहत मिलनी चाहिए.
दिल्ली हाईकोर्ट में CJP एक्टिविस्ट सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत बढ़ाने के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. सौरव रांका ने अपनी अर्जी वापस ले ली. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बॉन्ड उल्लंघन, जमानतदारों की अस्वीकृति और मजिस्ट्रेट के अधिकारों पर सवाल उठाए. कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब कानून में अपील का विकल्प मौजूद है, तो याचिकाकर्ता सीधे हाईकोर्ट क्यों आए.
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. पुलिस ने शांति बनाए रखने के नाम पर 10,000 रुपये का मुचलका और जमानत राशि जमा करने को कहा था, जिसे नेहा बोरा ने चुनौती दी है.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भारत में 'रिजीम चेंज' की बात करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन केवल चुनावों के जरिए हो सकता है, किसी बाहरी ताकत के जरिए नहीं. उन्होंने बांग्लादेश और फ्रांस में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए भारत में भी ऐसी साजिश रचे जाने का आरोप लगाया.
दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत मिल गई है. उन्हें बॉन्ड साइन करने के लिए कहा गया.
‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को शनिवार को सशर्त जमानत मिलने के बाद रिहा कर दिया गया. रिहाई के बाद उन्होंने पहला ट्वीट कर सौरव दास और आशुतोष रांका की तस्वीर साझा की. उन्होंने लिखा कि अब उन्हें अपने भाइयों के आजाद होने का इंतजार है. वहीं, आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत से रिहा कर दिया गया है.
CJP Tiranga Yatra Live Updates: दिल्ली में तिरंगा मार्च को लेकर प्रदर्शन जारी है. अभिजीत दिपके और नेहा बोरा समेत अब तक 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है.
दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ली गई नेहा बोरा को सुबह तड़के रिहा कर दिया है. वहीं, इस मामले में अभिजीत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. नेहा बोरा की रिहाई के समय की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं. रिहाई के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नेहा बोरा ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि देश में आम लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है जैसे वे कोई गंभीर अपराधी हों.
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके को दिल्ली की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी है. अदालत ने उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपये का श्योरिटी बॉन्ड भरने का निर्देश दिया है. बॉन्ड की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनकी रिहाई होगी. दिपके को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने निषेधाज्ञा के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की थी.