असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने देश भर में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की वकालत की है. उन्होंने दावा किया कि UCC न होने का सबसे ज्यादा नुकसान मुस्लिम महिलाओं को उठाना पड़ता है. बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं और समस्याओं से निपटने के लिए देश में एक समान कानून का होना बेहद जरूरी है.
रविवार शाम सीएम सरमा पूर्वी उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी के तेलियाजोत गांव स्थित आवास पर पहुंचे थे. वो वहां हरीश द्विवेदी की मां के निधन पर शोक व्यक्त करने गए थे.
इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा यूसीसी को देश भर में लागू करने का समर्थन किया. उन्होंने कहा, 'असम में यूसीसी को पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है और इसे अब पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए.'
उन्होंने कहा कि एक समान कानून बनने से महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी और बहुविवाह जैसी सामाजिक बुराइयों पर लगाम लगेगी.
विपक्ष पर निशाना: 'ताकत से नहीं, वोट से आती है सत्ता'
सरमा ने इस दौरान एंटी-एसआईआर (SIR) विरोध प्रदर्शनों और 'सत्ता परिवर्तन' की मांग को लेकर कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों पर पलटवार भी किया. उन्होंने कहा, 'सत्ता वोट से आती है, सीनाजोरी या ताकत के बल पर नहीं. जो लोग ये सोचते हैं कि डराने-धमकाने से सरकार बदली जा सकती है, उन्हें बांग्लादेश और नेपाल के हालातों को देखना चाहिए.' उन्होंने ये भी दावा किया कि दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन में सिर्फ 5,000 से 10,000 लोगों ने ही हिस्सा लिया था.
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कोलकाता भगदड़ पर जताया दुख
असम के मुख्यमंत्री ने इस दौरान कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सरकार ने घटना का तुरंत संज्ञान लिया और घायलों के इलाज के पूरे इंतजाम किए. आगे ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए जरूरी कदम भी उठाए जा रहे हैं.