यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) यानी समान नागरिक संहिता एक प्रस्ताव है जिसका उद्देश्य धर्मों, रीति-रिवाजों और परंपराओं पर आधारित व्यक्तिगत कानूनों को धर्म, जाति और जेंडर के बावजूद सभी के लिए एक समान कानून.
कानून की नजर में सब एक समान होते हैं. शादी, तलाक,एडॉप्शन, उत्तराधिकार, विरासत लेकिन सबसे बढ़कर लैंगिक समानता वो कारण है, जिस वजह से यूनिफार्म सिविल कोड की आवश्यकता महसूस की जाती रही है. UCC का मतलब है विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम. भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो. समान नागरिक संहिता जिस राज्य में लागू की जाएगी वहां, शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा (Law Under UCC).
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर उत्तराखंद के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी (CM Pushkar Dhami) ने ड्राफ्टिंग कमेटी गठित कर दी है. उत्तराखंड UCC पर काम करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है (UCC in Uttarakhand).
विशेषज्ञों की माने तो सबके लिए एक कानून होने से देश में एकता को बढ़ावा मिलेगा. भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. साथ ही, UCC के जरिये सभी लोगों के साथ धर्म से ऊपर जाकर समान व्यवहार होना जरूरी है (UCC in India).
यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहस जारी है. उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है. विधानसभा में तीखी बहस, विपक्ष के विरोध और सरकार के मजबूत बचाव के बीच यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है.
मध्य प्रदेश में CM Mohan Yadav द्वारा समान नागरिक संहिता को लेकर दिए गए बयान ने एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है. इसमें एक विवाह की बात और सभी के लिए एक जैसे कानून की जरूरत पर जोर दिया गया है. इस मुद्दे पर सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर बड़ा बयान दिया है. सीएम मोहन ने कहा कि अब एक शादी जो करेगा उसी को कानूनन मध्य प्रदेश में रहने का अधिकार रहेगा. देखें वीडियो.
मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की दिशा में सरकार को समिति की रिपोर्ट मिल गई है. रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है. अब सरकार इसकी समीक्षा के बाद मानसून सत्र में विधेयक ला सकती है.
महाराष्ट्र सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक सात-सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है. जानकारी के अनुसार, समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार यूसीसी के मसौदे को अंतिम रूप देगी.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पांच साल के कार्यकाल पूरे कर लिए हैं. इस मौके पर उन्होंने राज्य के विकास के लिए एक बड़ा विजन पेश किया है. सीएम धामी ने 2035 तक उत्तराखंड को एक पूर्ण विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है. उन्होंने बताया कि इसके लिए बुनियादी ढांचे, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन और स्वरोजगार के विकास पर जोर दिया जा रहा है.
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. इसके लिए दो हफ्तों के भीतर एक कमेटी का गठन किया जाएगा.
पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बीजेपी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति बनाने का ऐलान किया है. यह समिति चार सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
पश्चिम बंगाल की अटकलें तेज हैं कि आज पश्चिम बंगाल विधानसभा समान नागरिक संहिता से जुड़ा बिल पेश हो सकता है लेकिन अब तक इस पर सस्पेंस बना हुआ है, विपक्ष के विधायकों का दावा है कि उन्हें बिल की कॉपी नहीं मिली है. ऐसे में बिल आज पेश होगा या नहीं, कहना मुश्किल है. आजतक ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के मंत्री शंकर घोष से बात की.
महाराष्ट्र में भी UCC यानी समान नागरिक संहिता लागू किया जाएगा. इसका ऐलान गृहराज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा में किया. उन्होंने कहा कि, यूसीसी लागू करने के लिए हाईकोर्ट के रिटायर जज के नेतृत्व में एक समिति गठित की जाएगी. इस मामले में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने मुस्लिमों को टारगेट करने का आरोप लगाया. तो मंत्री नितेश राणे ने कह दिया कि, UCC का विरोध करने वालों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए.
मध्य प्रदेश सरकार आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने की तैयारी में है. सरकार जहां इसे सामाजिक समानता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे आदिवासी समुदाय की पहचान और संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा करार दिया है.
असम विधानसभा से यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास हो गया है. उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है.
चुनाव जीतने के बाद असम की बीजेपी सरकार अपने वादे के मुताबिक समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर आगे बढ़ गई है. राज्य सरकार ने सोमवार को बिल विधानसभा में पेश कर दिया गया है. इस बिल में विवाह और लिव इन रिलेशन को लेकर कई प्रावधान किए गए हैं.
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने केंद्र सरकार की वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने की कड़ी निंदा की है. मदनी ने इसे मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है. उन्होंने कहा कि उनका संगठन सरकार के इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएगा. मदनी ने ये भी आरोप लगाया कि देश में मुसलमानों और इस्लाम धर्म को निशाना बनाया जा रहा है.
असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा बाल विवाह और बहुविवाह पर पहले की कंट्रोल की बात कर चुके हैं. उन्होंने कहा है कि तीन पत्नियां रखना असम की संस्कृति नहीं है. अब दूसरी बार CM बनने के बाद उन्होंने UCC का दांव चल दिया है.
गुजरात विधानसभा में UCC यानि यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित होने के बाद देश में एक बार फिर बहस तेज हो चली है. गुजरात में भी इसका विरोध किया गया. मुस्लिम समाज के लोगों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज पढ़ी और यूसीसी के खिलाफ अपना विरोध दर्ज किया.
'विकसित उत्तराखंड 2026' के '4 साल कितने असरदार' सेशन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की उपलब्धियों और भविष्य के विजन पर अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने राज्य में लागू हुए UCC कानून पर विस्तार से बात की. देखें पूरा वीडियो.
गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल लंबे विरोध और हंगामे के बाद विधानसभा से पास हो गया है. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा में बहुमत के बल पर UCC बिल को मनमाने तरीके से पारित किया है और इसे मुस्लिम विरोधी बताया. लेकिन 7 घंटे तक चली बहस के बाद बिल को मंजूरी मिल गई. देखें गुजरात आजतक.
गुजरात में कॉमन सिविल कोड (UCC) बिल पेश हो गया है. सरकार इसे बड़ा सुधार बता रही है. कहा जा रहा है कि इससे सबके लिए एक जैसा कानून होगा. शादी, तलाक, विरासत -सबमें समानता आएगी. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? या फिर कहानी थोड़ी अलग है?
गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पास हो गया है. सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे जल्दबाजी और चुनावी रणनीति करार दे रहा है.
गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं. स्पेशल कमिटी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है. राज्य सरकार बजट सत्र में इस बिल को विधानसभा में पेश कर सकती है.