यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) यानी समान नागरिक संहिता एक प्रस्ताव है जिसका उद्देश्य धर्मों, रीति-रिवाजों और परंपराओं पर आधारित व्यक्तिगत कानूनों को धर्म, जाति और जेंडर के बावजूद सभी के लिए एक समान कानून.
कानून की नजर में सब एक समान होते हैं. शादी, तलाक,एडॉप्शन, उत्तराधिकार, विरासत लेकिन सबसे बढ़कर लैंगिक समानता वो कारण है, जिस वजह से यूनिफार्म सिविल कोड की आवश्यकता महसूस की जाती रही है. UCC का मतलब है विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम. भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो. समान नागरिक संहिता जिस राज्य में लागू की जाएगी वहां, शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा (Law Under UCC).
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर उत्तराखंद के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी (CM Pushkar Dhami) ने ड्राफ्टिंग कमेटी गठित कर दी है. उत्तराखंड UCC पर काम करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है (UCC in Uttarakhand).
विशेषज्ञों की माने तो सबके लिए एक कानून होने से देश में एकता को बढ़ावा मिलेगा. भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. साथ ही, UCC के जरिये सभी लोगों के साथ धर्म से ऊपर जाकर समान व्यवहार होना जरूरी है (UCC in India).
देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है, जिसमें उन्होंने साल 2029 तक केंद्र और बीजेपी शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू करने की बात कही है. अमित शाह द्वारा तय की गई इस डेडलाइन के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में एक नया तूफान खड़ा हो गया है.
UCC को लेकर राजनीति तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने यूसीसी पर अपना रुख साफ करते हुए योगी सरकार की मस्जिद पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई को मुस्लिम विरोधी बताया. वहीं, दूसरी ओर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भोपाल में आयोजित एक विशाल जनसभा में यूसीसी के खिलाफ जमकर हमला बोला. ओवैसी ने कहा कि यह प्रस्तावित कानून न केवल मुसलमानों के कुरान और सुन्नत के खिलाफ है, बल्कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए भारत के संविधान की मूल भावना के भी विपरीत है.
गृह मंत्री अमित शाह के समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर दिए गए हालिया बयान के बाद देश का राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है. इस मुद्दे पर शुरू हुआ सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है. विपक्षी दलों के साथ-साथ अब मुस्लिम धर्मगुरुओं और विद्वानों ने भी इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
यूसीसी पर धर्मयुद्ध शुरू हो गया है.. तीन दिन पहले अमित शाह ने कहा था कि वो एनडीए और बीजेपी शासित 21 राज्यों में यूसीसी लाने की तैयारी कर रहे हैं... और इन तीन दिनों में ही अच्छा खासा सियासी संग्राम खड़ा हो गया.. ओवैसी ने तो यूसीसी के खिलाफ सभाएं करनी शुरू कर दी हैं... देशभर के मुस्लिम नेता यूसीसी पर एक जुबान बोल रहे हैं... ओवैसी तो साफ कह रहे हैं कि किसी कीमत पर यूसीसी नहीं मानेंगे. देखें...
देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राजनीति जारी है. बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर कट्टरपंथी राजनीति करने का आरोप लगाया है. वहीं, उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर कहा कि वो ट्विटर की राजनीति कर रहे हैं.
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर जहां टीडीपी, शिवसेना और जीतन राम मांझी जैसी सहयोगी पार्टियां अमित शाह के साथ खड़ी हैं तो जेडीयू ने अलग स्टैंड लिया है. बीजेपी द्वारा 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के एजेंडे पर नीतीश कुमार तैयार नहीं हैं.
UCC के खिलाफ कई नेताओं ने विरोध जताया है. जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान का मैं विरोध करता हूं. ये संविधान सर्वोच्चता और नागरिकों के धार्मिक अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश है.
मध्य प्रदेश के भोपाल में UCC के विरोध में हुई सभा के दौरान AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा को सीधी चुनौती दे दी है. रामेश्वर शर्मा ने 4 सितंबर को जन्माष्टमी के कार्यक्रम में विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि भोपाल के करोंद इलाके से काजी कैंप की तरफ मिसाइल दागेंगे. कल बारी ओवैसी के पलटवार की थी. उन्होंने रामेश्वर शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि उनमें दम है तो बताएं कि मिसाइल कब लॉन्च करेंगे.
आज दस्तक की शुरुआत यूसीसी को लेकर एनडीए में सियासी घमासान की. गृहमंत्री अमित शाह ने एलान किया कि 2029 तक एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी यानी कॉमन सिविल कोड लागू हो सकता है, लेकिन गृहमंत्री के एलान के बाद टीम एनडीए में हलचल तेज हो गई. बिहार में बीजेपी के दो बड़े- सहयोगी नीतीश कुमार और चिराग पासवान ने यूसीसी पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं. देखें...
यूसीसी पर घमासान शुरू हो गया है. पूर्व सीएम नीतीश कुमार के आवास आज जेडीयू के कई नेता मिलने पहुंचे. इनमें केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, बिहार के मंत्री अशोक चौधरी भी पहुंचे और कई अन्य नेता शामिल हैं. यूसीसी मसले पर चर्चा के बीच इन नेताओं का नीतीश कुमार से मिलना अहम माना जा रहा है. जेडीयू के संजय झा इस मसले पर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2029 तक बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होगा. इस बयान के बाद सियासी दलों ने प्रतिक्रियाएं दीं.
विधानसभा चुनाव के लिए सियासी दलों ने मुद्दों के तीर तराशने शुरू कर दिए हैं. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समान नागरिक संहिता लागू करने के दावे ने सियासी सरगर्मी और बढ़ा दी है. अमित शाह का दावा है कि 2029 के पहले बीजेपी एवं उसके सहयोगियों के शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दिया जाएगा. इसमें यूपी भी शामिल है. बीजेपी इसे वादे के अमल के तौर पर पेश कर रही है, जबकि विपक्ष ध्रुवीकरण की कवायद बता रहा है.
UCC को लेकर दारुल उलूम के प्रवक्ता मौलाना सुफियान निजामी का बयान सामने आया है. उन्होंने इसे देश में लागू करना असंभव बताते हुए कहा कि सभी समुदायों के अपने पर्सनल कानून हैं. उन्होंने सरकार से मुसलमानों के विकास पर ध्यान देने की अपील भी की है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि साल 2029 तक देश के 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू किया जाएगा. अमित शाह के इस बयान के बाद अब सबकी नजरें NDA के दो बड़े नेताओं पर टिक गई हैं. नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू क्या UCC पर सरकार को समर्थन देंगे? ये सवाल इसलिए क्योंकि दोनों ही नेता UCC को लागू करने के खिलाफ रहे हैं. देखें खबरदार.
अमित शाह के 21 राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान पर एनडीए में हलचल मच गई है. इस पर JDU ने कहा है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी पक्षों से व्यापक चर्चा जरूरी है. JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अमित शाह से मुलाकात का समय मांगा है.
असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी और केंद्रीय गृह मंत्री पर UCC को लेकर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि बीजेपी समानता के नाम पर UCC लागू नहीं कर रही, बल्कि इसे 18 करोड़ मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही है. ओवैसी ने गोवा चुनाव से पहले बीजेपी को चुनौती दी कि वह गोवा में भी UCC लागू करे.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को मुंबई पहुंचे. जहां उन्होंने मुंबई की एशियाटिक सोसाइटी में ‘गणेश ज्ञानार्थी’ विशेष पांडुलिपि प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में भाग लिया. इस दौरान अमित शाह ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 2029 तक एनडीए शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा. देखें वीडियो.
मुंबई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि 2029 से पहले बीजेपी नेतृत्व वाले NDA के सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू हो जाएगा. उन्होंने देश की सुरक्षा नीति, आर्थिक प्रगति और अवैध घुसपैठ के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया.
यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहस जारी है. उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है. विधानसभा में तीखी बहस, विपक्ष के विरोध और सरकार के मजबूत बचाव के बीच यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है.
मध्य प्रदेश में CM Mohan Yadav द्वारा समान नागरिक संहिता को लेकर दिए गए बयान ने एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है. इसमें एक विवाह की बात और सभी के लिए एक जैसे कानून की जरूरत पर जोर दिया गया है. इस मुद्दे पर सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर बड़ा बयान दिया है. सीएम मोहन ने कहा कि अब एक शादी जो करेगा उसी को कानूनन मध्य प्रदेश में रहने का अधिकार रहेगा. देखें वीडियो.